रेलवे के ट्रेकमैनों का दिल्ली में विशाल विरोध प्रदर्शन

28 सितम्बर, 2022 को आल इंडिया रेलवे ट्रेक मेंटेनर्स यूनियन (ए.आई.आर.टी.यू.) की अगुवाई में हजारों की संख्या में आये, रेलवे के ट्रेकमैनों ने अपनी मांगों को लेकर नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर विशाल विरोध प्रदर्शन किया।

Trackmenप्रदर्शन में भारतीय रेल के 17 मंडलों से लगभग ढाई हजार से ज्यादा महिला और पुरुष ट्रेकमैन शामिल हुए। प्रदर्शन का संचालन संगठन के महामंत्री श्री राकेश चंद्र वर्मा ने किया। प्रदर्शन की अध्यक्षता श्री नरेंद्र पांचाल सहित 17 मंडलों से आए ट्रेकमैनों ने की।

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए, ए.आई.आर.टी.यू. के पदाधिकारियों ने घोषणा की कि ट्रेकमैनों के संघर्ष में यह प्रदर्शन ऐतिहासिक साबित होगा।

पदाधिकारियों ने लवासा कमेटी की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि हर महीने ड्यूटी के दौरान 40 ट्रेकमैनों की मौत हो जाती है। साल में लगभग 500 ट्रेकमैनों की मौत होती है। दुनिया में शायद ही कोई ऐसा विभाग होगा, जहां ड्यूटी के दौरान इतनी बड़ी संख्या में मौतें होती है। केन्द्र सरकार यह दावा करती है कि भारतीय रेल विश्व स्तर की सुरक्षित रेल यात्रा प्रदान करती है। लेकिन रेल यात्रा को सुरक्षित करने वाले लाखों ट्रेकमैनों के जीवन की सुरक्षा करने में सरकार असफल रही है।

विभिन्न मंडलों से आए ट्रेकमैनों ने काम के दौरान आने वाली अपनी मुश्किलों को बताते हुए कहा कि भारतीय रेल प्रशासन ट्रेकमैनों पर अत्यधिक काम का दबाव डाल रहा है। हमें अपने जायज़ अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। हमें अमानवीय व्यवहार का शिकार होना पड़ता है। हमें अधिकारियों के निजी घरेलू कार्य करने के लिए बाध्य किया जाता है। हमारे साथ गाली-गलौच व मारपीट आम बात है। यदि हम अपने अधिकारों की या नियम और क़ानून की बात करते हैं तो हमें दंडित करने के लिए झूठी चार्जशीट पकड़ा दी जाती है और परेशान किया जाता है।

Trackmenउन्होंने कहा कि ट्रेकमैनों को इंजीनियरिंग गेटों पर गेटमैन की ड्यूटी दी जाती है। लगातार 12 घंटे की ड्यूटी होती है। गेट पर बने छोटे से कमरे में रोशनी, पानी व शौचालय की व्यवस्था नहीं होती। रेल प्रशासन को इसका आभास नहीं है कि गेटमैन की ड्यूटी एक इंसान कर रहा है, जिसे प्यास भी लगती है, शौचालय की आवश्यकता भी पड़ती है।

मज़दूर एकता कमेटी की एक टीम ने रेलवे ट्रेकमैनों के समर्थन में, प्रदर्शन में भाग लिया। मज़दूर एकता कमेटी की ओर से ट्रेकमैनों के संघर्ष के समर्थन में एक पर्चा जारी किया, जिसका आंदोलित ट्रेकमैनों ने बहुत स्वागत किया।

मज़दूर एकता कमेटी की ओर से संतोष कुमार ने कहा कि हमारा संगठन भारतीय रेल के ट्रेकमैनों के साथ भी खड़ा है। आपका जुझारू संघर्ष देश के सभी मज़दूरों के लिए प्रोत्साहन का स्रोत है। हम आपके संघर्ष की जीत की पूरी कामना करते हैं। हम आपकी जायज़ मांगों का समर्थन करते हैं। मज़दूर एकता कमेटी सरकार से मांग करती है कि टेªकमैनों की मांगों को बिना शर्त पूरा करे और भारतीय रेल में किये जा रहे निजीकरण पर तुरंत रोक लगाए।

धरने को संबोधित करने वालों में थे – श्री कांता राजू (राष्ट्रीय महामंत्री), श्री राम नरेश पासवान (राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष), पंकज राजपूत (राष्ट्रीय सहायक महामंत्री, सह संचालक), श्री राजेंद्र कौशिक (राष्ट्रीय सहायक महामंत्री), श्री रवि यादव (अध्यक्ष इलाहाबाद मंडल), श्री शुभम उपाध्याय (मीडिया प्रभारी बिलासपुर), उपेन्द्र यादव (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष), राजेश मौर्या (मंडल महामंत्री एनसीआर), सुनील शुक्ला (मंडल उपाध्यक्ष पूर्वोत्तर रेलवे), आदि। इनके अलावा, विभिन्न मंडलों से आए ट्रेकमैनों ने भी अपनी बातें रखीं।

एक प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों का ज्ञापन रेलवे बोर्ड के अधिकारियों को सौंपा।

ज्ञापन में ट्रेकमैनों ने मांग की कि पुरानी पेंशन योजना को बहाल किया जाये, रेलवे में ट्रेक मेंटेनर्स की यूनियन को मान्यता दी जाये, ट्रेकमैन के खाली पदों पर हर साल भर्ती की जाये, ट्रेकमैन और गेटमैन की ड्यूटी को 8 घंटे निर्धारित किया जाये, ग्रेड पे को बढ़ाकर 4200 रुपये किया जाये, ट्रेकमैनों के परिजनों को मेडिकल और पास सुविधा प्रदान की जाये, अकुशल ट्रेकमैनों के लिये रिस्क अलाउंस लागू किया जाये, ट्रेकमैन की मौत होने पर 1 करोड़ गेच्युटी दी जाये और शौचालय व आरामकक्ष की सुविधायें उपलब्ध कराई जायें, आदि।

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