ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना के मज़दूरों का संसद पर धरना

देशभर से आए मनरेगा (महात्मा गाँधी नैशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट) के मज़दूरों ने अपनी मांगों को लेकर, ‘नरेगा संघर्ष मोर्चा’ के झंडे तले, नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर 2 से 4 अगस्त को तीन दिवसीय धरना दिया। नरेगा संघर्ष मोर्चा विभिन्न मनरेगा मज़दूरों के बीच काम करने वाले संगठनों का एक संयुक्त मोर्चा है।

400_NREGA_20220802इस धरने में सैकड़ों स्त्री व पुरुष मनरेगा मज़दूर शामिल हुए। इस धरने के माध्यम से मनरेगा मज़दूरों की मुख्य तत्कालीन मांगों पर ज़ोर दिया गया।

नरेगा संघर्ष मोर्चा का कहना है कि वित्त वर्ष 2022-23 में मनरेगा के लिए सरकार द्वारा 73,000 करोड़ रुपये का आबंटन किया गया है। इसमें से लगभग 18250 करोड़ रुपए पिछले वर्षों की देनदारियां हैं। यह ऐसे समय में है जब मई 2022 में काम की मांग करने वाले परिवारों की संख्या पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 11 प्रतिशत अधिक है और कोविड महामारी आने से पहले के वर्ष की तुलना में भी बहुत अधिक है। 1 जुलाई, 2022 तक सरकार पर 15 राज्यों का पैसा बकाया है, जबकि पश्चिम बंगाल को जनवरी से कोई धनराशि नहीं मिली है। इसलिए, धरने में सरकार से इस धनराशि को फ़ौरन बढ़ाने और इसका आबंटन सुनिश्चित करने की मांग की गयी।

कई जगहों से आए मज़दूरों ने बताया कि मनरेगा के अधिनियम के अनुसार, काम के पूरा होने पर मज़दूरों को 15 दिनों के अंदर भुगतान किया जाना चाहिए। और मज़दूरों के वेतन मिलने में हर दिन की देरी पर पूरा मुआवज़ा दिया जाना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं होता है। नरेगा के क़ानूनी प्रावधानों का बेरहमी से उल्लंघन किया जा रहा है। नरेगा का विस्तार करने के बजाय, सरकार इसे कम कर रही है। मज़दूरी के भुगतान में भी महीनों की देरी होती है।

400_NREGA_20220802सभी मज़दूरों ने साल में 200 दिनों का काम व एक दिन की मज़दूरी 800 रुपये किए जाने की मांग को ज़ोर-शोर से उठाया।

मज़दूरों ने इस बात को भी ज़ोर-शोर से उठाया कि मनरेगा मज़दूरों पर योजनागत निगरानी सुनिश्चित करने और कार्यस्थल पर श्रमिकों की उपस्थिति के वास्तविक समय को रिकॉर्ड करने के लिए बनाए गए नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सॉफ्टवेयर (एन.एम.एम.एस.) ऐप के इस्तेमाल से मज़दूरों की परेशानी बहुत बढ़ी है। नेटवर्क के अभाव और तकनीकी गड़बड़ी के चलते, हाजिरी रिकार्ड नहीं हो पाती है। ऐसे में न घंटों और न ही दिनों के लिए मज़दूरी की गांरटी होती है। धरने में यह एक अहम मांग उठाई गयी कि एन.एम.एम.एस. सॉफ्टवेयर आधारित हाज़िरी दर्ज़ करने की व्यवस्था को तत्काल समाप्त किया जाए।

मनरेगा व्यवस्था के अन्दर अलग-अलग स्तरों पर मौजूद भ्रष्टाचार पर भी आंदोलित मज़दूरों ने बात रखी। कई राज्यों में निजी ठेकेदारों, राजनीतिक दलों के और भ्रष्ट पदाधिकारियों के बीच गठजोड़ के चलते, भ्रष्टाचार बढ़ रहा है। इसके खि़लाफ़ सख़्त कार्यवाही करने की मांग उठाई गयी।

नरेगा संघर्ष मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों के मांगपत्र को सभी संबंधित सरकारी कार्यालयों, सांसदों तथा राजनीतिक पार्टियों के कार्यालयों को सौंपा।

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