वेतन पर रोक और महंगाई तथा युद्ध के ख़िलाफ़ बेल्जियम में देशव्यापी हड़ताल

बेल्जियम में मज़दूरों ने 20 जून को देशव्यापी हड़ताल की थी। उसी दिन राजधानी ब्रसेल्स में बड़े पैमाने पर एक प्रदर्शन का आयोजन किया गया था।

20621-Workers-Protest-Belgiumमज़दूर आसमान छूती क़ीमतों और मज़दूरी की रोक को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन में 80 हजार से अधिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। कई क्षेत्रों में हड़तालें हुईं, विशेष रूप से परिवहन के क्षेत्र में जिसकी वजह से देश में ठहराव आ गया। ब्रसेल्स अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सभी एयरलाइनों उड़ानें रद्द कर दी गई थीं और देश के अन्य हवाई अड्डे भी प्रभावित हुए थे। देशभर में मेट्रो रेल, बसें और स्ट्रीटकार सेवाएं ठप्प हो गई।

हड़ताल का आयोजन जनरल लेबर फेडरेशन ऑफ बेल्जियम (एफ.जी.टी.बी.), कॉन्फेडरेशन ऑफ क्रिश्चियन ट्रेड यूनियन्स (सी.एस.सी.) और जनरल कन्फेडरेशन ऑफ लिबरल ट्रेड यूनियन्स ऑफ बेल्जियम (सी.जी.एस.एल.बी.) द्वारा किया गया था। इसी तरह के प्रदर्शन इस साल फरवरी, अप्रैल और मई में पूरे बेल्जियम में आयोजित किए गए थे। यूनियनों ने घोषणा की है कि जून के अंत से पहले और अधिक हड़तालों और प्रदर्शनों को आयोजित करने की योजना बनाई गई है।

हड़ताली मज़दूरों द्वारा उठाया गया एक लोकप्रिय नारा अनेक हड़ताल की कई कार्रवाइयों में बैनर पर प्रदर्शित किया गया था “बढ़ती क़ीमतें रोको, मज़दूरी नहीं”। मज़दूरों ने भोजन, ईंधन और आवास सहित आसमान छूती क़ीमतों की निंदा की। जून के महीने में महंगाई का अनुमान 9 प्रतिषत था जो कि 40 वर्षों की उच्चतम दर थी।

Belgium_cost_of_livingयूनियन कार्यकर्ताओं ने बताया कि अप्रैल 2021 से अप्रैल 2022 के बीच में बिजली की लागत में 49.7 प्रतिशत, प्राकृतिक गैस की लागत में 139.5 प्रतिशत, ईंधन के तेल में 57.8 प्रतिशत, डीजल में 33.5 प्रतिशत और गैसोलीन की लागत में 21 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस दौरान मज़दूरी में औसतन 0.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

उन्होंने बताया कि यूक्रेन में युद्ध के कारण बढ़ती क़ीमतों का फ़ायदा उठाते हुए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कंपनियां भारी मुनाफ़ा कमा रही हैं। तेल और ऊर्जा के क्षेत्र में बेल्जियम की बड़ी कंपनियां भारी मुनाफ़ा कमा रही हैं। दूसरी ओर, मज़दूर वर्ग के परिवारों का अब रोज़ की ज़रूरतों की बढ़ती क़ीमतों के कारण जीना मुश्किल हो गया है।

1996 के मज़दूरी मानक अधिनियम के कारण बेल्जियम में मज़दूरों की मज़दूरी की वृद्धि सीमित है। बेल्जियम के शासक वर्ग ने इस अधिनियम को इस तर्क के साथ उचित ठहराया है कि यह आवश्यक है, क्योंकि यह सुनिश्चित करेगा कि बेल्जियम में दी जा रही मज़दूरी यूरोपीय संघ के अन्य देशों के लोगों से तुलनीय है। दूसरे शब्दों में, पूर्वी यूरोप और दक्षिणी यूरोप के देशों के मज़दूरों की मज़दूरी के निचले स्तर का उपयोग बेल्जियम के मज़दूरों की मज़दूरी को कम करने के लिए किया गया है।

2021-2022 की अवधि के लिए, मज़दूरी वृद्धि के लिए अधिकतम मार्जिन 0.4 प्रतिशत निर्धारित किया गया था। इस सीमा को हर दो साल में नवीनीकृत किया जाता है। यूनियनें इस सीमा को ख़त्म करने की मांग कर रही हैं। वे मांग कर रही हैं कि सरकार मज़दूरी में वृद्धि पर लगे सभी प्रतिबंधों को हटा दे ताकि मज़दूरों और उनके नियोक्ताओं के बीच नई मज़दूरी पर फिर से बातचीत की जा सके, जो वर्तमान परिस्थितियों में एक सभ्य जीवन स्तर सुनिश्चित करेगा।

मज़दूर, ऊर्जा की क़ीमतों को कम करने, न्यूनतम मज़दूरी में वृद्धि और मज़दूरों की यात्रा लागत में नियोक्ताओं के योगदान में वृद्धि के उपायों की भी मांग कर रहे हैं।

ब्रसेल्स में हुये प्रदर्शन में मज़दूरों ने बड़ी संख्या में बैनर लगाए और नारे लगाए,  “पैसा मज़दूरी के लिए दो, युद्ध के लिए नहीं!” ब्रसेल्स न केवल बेल्जियम की राजधानी है, बल्कि यूरोपीय संघ और नाटो का मुख्यालय भी है। कई मज़दूरों ने “नाटो को बंद करो” का नारा लगाया। उन्होंने वर्तमान मूल्य वृद्धि के लिए रूस के प्रति अमरीकी नेतृत्व में पश्चिमी साम्राज्यवादी शक्तियों की आक्रामक नीतियों को सीधे ज़िम्मेदार ठहराया। उन्होंने अमरीका के नेतृत्व वाले नाटो गठबंधन और यूक्रेन के युद्ध में इसकी भूमिका की निंदा की, जिसमें रूस के ख़िलाफ़ यूरोपीय संघ के प्रतिबंध और यूक्रेन को हथियारों की बिक्री में भारी वृद्धि शामिल है। उन्होंने मांग की कि सरकार युद्ध पर खर्च करना बंद करे और इसके बजाय, कामकाजी लोगों की भलाई में निवेश करना शुरू करे।

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