फैक्ट्री अग्नि कांड में मज़दूरों की मौत के विरोध में प्रदर्शन

मज़दूर एकता कमेटी ने 22 मई, 2022 को मुंडका फैक्ट्री अग्निकांड में मज़दूरों की मौत के विरोध में, दक्षिण दिल्ली के ओखला औद्योगिक क्षेत्र में एक ज़ोरदार प्रदर्शन आयोजित किया। इसमें अनेक युवा और महिला मज़दूरों ने दिलेरी के साथ भाग लिया।

400_Campening on Mudka in Okhla 22 may-6मज़दूरों और युवा कार्यकर्ताओं ने अपने हाथों में बैनर और प्लेकार्ड बुलंद करके, उन पर लिखे नारों के माध्यम से अपनी मांगें प्रकट कीं तथा अपना गुस्सा ज़ाहिर किया। कुछ नारे इस प्रकार थे – ‘मज़दूरों के हत्यारे दिल्ली सरकार और एमसीडी जवाब दो!’, ‘पूंजीपति मालिकों और सरकारी एजेंसियों का गठजोड़ ही मज़दूरों की मौत के लिए जिम्मेदार है!’, ‘औद्योगिक दुर्घटनाओं का जिम्मेदार कौन – दिल्ली सरकार जवाब दो!’ ‘क्या मज़दूरों की जानें सस्ती हैं, और सुरक्षा उपकरण महंगे हैं?’, ‘औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ती दुर्घटनाओं के लिए सरकारी एजेंसियां ज़िम्मेदार है!’ आदि। कई पोस्टरों और व्यंग चित्रों के ज़रिये, प्रदर्शनकारियों ने पूंजीपतियों द्वारा मज़दूरों के शोषण को दर्शाया।

ओखला औद्योगिक क्षेत्र के रिहायशी इलाकों की गलियां क्रोधित मज़दूरों के नारों से गूँज उठीं। सैकड़ों मज़दूरों ने अपने घरों से बाहर आकर, मज़दूर एकता कमेटी के कार्यकर्ताओं के साथ समर्थन प्रकट किया।

कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने नुक्कड़ सभाएं आयोजित करके, अपनी बातें लोगों के सामने रखीं।

400_Campening on Mudka in Okhla 22 may-6वक्ताओं ने समझाया कि दिल्ली और देश के अनेक शहरों में प्रशासन और पूंजीपतियों की मिलीभगत के साथ, लाखों-लाखों ऐसी फैक्ट्रियां चलायी जाती हैं, जिनमें करोड़ों-करोड़ों महिला और पुरुष किसी भी प्रकार की सुरक्षा के बिना, दो वक्त की रोटी के लिए अपनी जानों को जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर हैं। इस प्रकार के कांड वर्तमान पूंजीवादी व्यवस्था के वहशी, अमानवीय चहरे को बार-बार सामने लाते हैं।

दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार दोनों के हाथ अग्निकांड में मरे मज़दूरों के खून से रंगे हुए हैं। सरकार और प्रशासन के उच्चतम पदों पर बैठे अधिकारियों को इसके लिए जवाबदेह ठहराना होगा। मज़दूर एकता कमेटी यह मांग करती है कि उन पर मुक़दमा चलाया जाना चाहिए और उनको सज़ा दी जानी चाहिए।

इस आदमखोर पूंजीवादी व्यवस्था की जगह पर हमें एक ऐसी व्यवस्था स्थापित करने के लिए संघर्ष करना होगा, जिसमें मज़दूरों और उनके काम की हालतों को “उत्पादन के खर्च को कम करने” के नज़र से नहीं देखा जायेगा, बल्कि सभी मज़दूरों की ज़रूरतों को पूरा करना और सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य का सबसे पहला और अहम दायित्व होगा।

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