दिल्ली में सरकार के बुलडोजर अभियान का ज़बरदस्त विरोध

राजधानी दिल्ली में बीते कुछ हफ़्तों से सरकार जगह-जगह पर बुलडोजर भेजकर, मेहनतकशों के घर-बार और रोज़ी-रोटी के साधनों को उजाड़ने का एक क्रूर अभियान चला रही है। यह अभियान “अतिक्रमण” को हटाने और “शहरी विकास” के नाम पर चलाया जा रहा है। वास्तव में, यह शहर के मज़दूरों-मेहनतकशों के अधिकारों पर एक बेरहम हमला है।

400_Left Party LG Office Demoइस अभियान के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ बुलंद करने के लिए, 11 मई, 2022 को दिल्ली में कम्युनिस्ट पार्टियों और अनेक जन संगठनों ने मिलकर उपराज्यपाल के घर पर ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में मज़दूर, नौजवान, छात्र, महिला और अध्यापक शामिल हुये। तोड़ी गई कई बस्तियों के पीड़ित लोगों ने भी प्रदर्शन में भाग लेकर, सरकार के खि़लाफ़ अपना आक्रोश प्रकट किया।

प्रदर्शनकारियों ने अपने हाथों में प्लाकार्ड पकड़े थे, जिन पर लिखा था – ‘अतिक्रमण के नाम पर लोगों की रोज़ी-रोटी और घर-बार उजाड़ना बंद करो!’, ‘आवास और रोज़गार के अधिकार की संवैधानिक गारंटी दो!’, ‘बुलडोजर की नीति नहीं चलेगी!’, ‘पूंजीवादी शोषण के खि़लाफ़ एकजुट हों!’, आदि।

प्रदर्शन में भाग लेने वाली कम्युनिस्ट और वाम पार्टियां थीं – भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले-लिबरेशन), रेवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी और ऑल इंडिया फारवर्ड ब्लाक। इसके अलावा, कई जन संगठनों, छात्र, नौजवान और महिला संगठनों ने विरोध प्रदर्शन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इनमें शामिल थे – आल इंडिया डेमोक्रेटिक विमेंस एसोसियेशन, आल इंडिया प्रोग्रेसिव विमेंस एसोसियेशन, सहेली, अनहद, आल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसियेशन, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया, आल इंडिया यूथ फेडरेशन, डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया, रेवोल्यूशनरी यूथ एसोसियेशन, डेमोक्रेटिक टीचर्स फेडरेशन, क्रांतिकारी युवा केन्द्र, संघर्षशील महिला केन्द्र, आदि।

कई सहभागी संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रदर्शन को संबोधित किया।

सरकार द्वारा मज़दूरों-मेहनतकशों पर बेरहम हमले की भर्त्सना करते हुए, वक्ताओं ने यह स्पष्ट किया कि “अवैध बस्तियों” और “अतिक्रमण” को हटाने के नाम पर चलाया जा रहा यह अभियान हमारे अधिकारों का सरासर हनन है। हक़ीक़त तो यह है कि हुक्मरान सरमायदार वर्ग और उसकी राजनीतिक पार्टियों के नेतागण ही इन झुग्गी-झोपड़ी कालोनियों को बसाते हैं, जहां मज़दूरों को अमानवीय हालतों में बिना पीने का पानी, शौच प्रबंध, सीवर आदि के जीने को मजबूर किया जाता है। हुक्मरान सरमायदार और उनकी राजनीतिक पार्टियां झुग्गी-झोपड़ियों को इसलिए बसाते हैं ताकि पूंजीपतियों को सस्ते श्रम का अनवरत स्रोत मिलता रहे। इन बस्तियों के निवासी हुक्मरान वर्ग व उसकी राज्य की मशीनरी और उसकी राजनीतिक पार्टियों की दया पर जीने को मजबूर होते हैं। जब-जब पूंजीपति वर्ग चाहता है, तब-तब सरकार इन झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोगों के घरों और संपत्तियों को उजाड़ देती है और उनकी ज़मीन को बड़े-बड़े रियल एस्टेट डेवलपर्स के हाथों सौंप देती है। इसके साथ-साथ, सरमायदारों की राजनीतिक पार्टियों द्वारा यह झूठा प्रचार फैलाया जाता है कि किसी खास समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है, ताकि सभी मज़दूर एकजुट होकर उन मेहनतकशों की हिफ़ाज़त में आगे न आयें, जिनके घर तोड़े जा रहे हैं।

कई वक्ताओं से साफ़-साफ़ कहा कि हिन्दोस्तान में जो संघर्ष चल रहा है, यह अलग-अलग धर्मों के लोगों के बीच में संघर्ष नहीं है। यह शोषकों और शोषितों के बीच में संघर्ष है। मज़दूरों-मेहनतकशों को शोषण और दमन के ख़िलाफ़ एकजुट होकर संघर्ष करने के रास्ते से भटकाने के लिए, हुक्मरान धर्म के आधार पर नफ़रत फैलाने और लोगों को भड़काने की पूरी कोशिश करते रहते हैं।

पूंजीपति वर्ग द्वारा मज़दूरों-मेहनतकशों पर किये जा रहे बढ़ते हमलों के ख़िलाफ़ अपनी एकता और एकजुट संघर्ष को तेज़ करने के ज़ोरदार नारों के साथ, कार्यक्रम का समापन किया गया।

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