किसान संगठनों का अपनी मांगों को लेकर संघर्ष जारी

केंद्र सरकार द्वारा तीन किसान विरोधी कानूनों को वापस लेने के बाद, किसानों ने दिल्ली की सीमाओं पर किसान आंदोलन के विरोध को स्थगित कर दिया था। आन्दोलन स्थगन के चार महीने बाद, पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों में किसान संगठन संघर्ष जारी रखने के लिए सक्रिय रूप से लोगों को लामबंद कर रहे हैं।

किसान संगठन इस ओर इशारा कर रहे हैं कि किसानों की शेष सभी मांगों को पूरा करने का लिखित आश्वासन, जो कि प्रधानमंत्री ने उन्हें दिसंबर 2021 में दिया था, जिसके बाद उन्होंने दिल्ली की सीमाओं पर अपना विरोध वापस ले लिया था, वह महज दिखावा था। विभिन्न फसलों के लिए एम.एस.पी. निर्धारित करने के लिए एक समिति गठित करने पर सरकार द्वारा आज तक कोई कदम नहीं उठाया गया है। वादे के मुताबिक आंदोलनकारी किसानों के ख़िलाफ़ पुलिस मामले वापस लिये जाने थे जो अभी तक नहीं लिए गए हैं। कई किसान अभी भी हिरासत में हैं। आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों के परिवारों को अभी तक वादा किया गया मुआवजा नहीं मिला है। लखीमपुर खीरी में आंदोलनकारी किसानों की हत्या के मुख्य दोषी अजय मिश्रा टेनी को सजा नहीं मिली है। किसान संगठनों ने महसूस किया है कि उन्हें अपनी मांगों को पूरा करने के लिए पंजाब के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ पूरे देश में एक साथ आने और आंदोलन को आगे बढ़ाने की जरूरत है।

हम पंजाब में किसानों के हालिया कुछ विरोध कार्यों को नीचे रिपोर्ट कर रहे हैं।

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29 मार्च को अमृतसर के भगतनवाला अनाज मंडी में किसान संगठनों की विशाल रैली

29 मार्च को अमृतसर के भगतनवाला अनाज मंडी में किसान संगठनों ने एक विशाल रैली की। अमृतसर और गुरदासपुर जिलों से बड़ी संख्या में महिलाओं सहित किसान अनाज मंडी में एकत्र हुए और संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया। उन्होंने किसान आंदोलन में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड में पंजाब राज्य के अधिकारों की बहाली की मांग की। उन्होंने ट्रेड यूनियनों और मज़दूर संगठनों की दो दिवसीय अखिल भारतीय हड़ताल का समर्थन किया।

रैली का आयोजन किसान-मज़दूर संघर्ष समिति, पंजाब की ओर से किया गया था। वक्ताओं ने दिसंबर 2021 में आंदोलन की वापसी के समय किए गए अपने वादों पर मुकर जाने के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने किसानों की आय को दोगुना करने में विफलता के लिये और गेहूं फसल की खरीद में अनावश्यक बाधा उत्पन्न करने के साथ-साथ चालू सीजन के दौरान पेट्रोल, डीज़ल और रसोई गैस की कीमतें बढ़ाने के लिए सरकार की निंदा भी की।

बीकेयू एकता (उग्राहां) के बैनर तले 29 मार्च को पंजाब के मुक्तसर जिले में लंबी उप-तहसील के बाहर सैकड़ों किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया। वे अपनी कपास की फसल को गुलाबी बॉलवर्म से हुई क्षति के लिए लंबे समय से मुआवज़ा न मिलने का विरोध कर रहे थे। आंदोलन के तहत, उन्होंने कई घंटों तक एक उप-तहसील कार्यालय के अंदर सरकारी अधिकारियों का घेराव किया। पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे किसानों पर लाठीचार्ज किया, जिससे कई किसान घायल हो गए। पुलिस ने कुछ आंदोलनकारी किसानों के ख़िलाफ़ प्राथमिकी भी दर्ज की।

बीकेयू एकता (उग्राहां) और अन्य किसान यूनियनों ने 7 अप्रैल को बठिंडा से शुरू होकर गांव, ब्लॉक और जिला स्तरों पर नियमित बैठकों और घर-घर की गतिविधियों का अभियान चलाया। यह अखिल भारतीय विरोध, ‘एम.एस.पी. गारंटी सप्ताह’ (11 से 17 अप्रैल) मनाने के लिए एस.के.एम. के आह्वान का एक हिस्सा था। लुधियाना में एक राज्य-स्तरीय बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें 12 किसान यूनियनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में किसानों ने 29 मार्च को पंजाब बॉर्डर एरिया किसान यूनियन के बैनर तले तरन तारन में स्थानीय जिला प्रशासन परिसर (डी.ए.सी.) के सामने विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की नीति के अनुसार, जिन किसानों की ज़मीन सीमा पर बाड़ लगाने के लिए अधिग्रहित की गई है उन्हें मुआवजे के रूप में 10,000 रुपये प्रति एकड़ का भुगतान किया जाना है जो पिछले 4 वर्षों से लंबित है। उन्होंने इस मुआवज़़े के शीघ्र भुगतान के साथ-साथ सीमा पर गश्त के लिए बी.एस.एफ. द्वारा ली गई जमीन के मुआवज़े की मांग की। उन्होंने उपायुक्त को एक ज्ञापन सौंपा।

25 मार्च को एस.के.एम. के बैनर तले सैकड़ों किसान मोहाली में गुरुद्वारा श्री अम्ब साहिब के सामने जमा हुए। उन्होंने तीन कृषि कानूनों को रद्द करने के समय केंद्र सरकार द्वारा किए गए सभी वादे पूरे होने तक संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया। उनकी अन्य मांगों में संसद द्वारा पारित बांध सुरक्षा अधिनियम-2021 को वापस लेना शामिल है, जिसका उद्देश्य देश की नदियों पर बने बांधों के पानी और बिजली को कॉरपोरेट घरानों को सौंपना तथा  भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बी.बी.एम.बी.) में पंजाब और हरियाणा के सदस्यों के स्थायी प्रतिनिधित्व को समाप्त करने के निर्णय को रद्द करना है।

इससे पहले इसी दिन, किसानों ने चंडीगढ़ में राजभवन तक एक ट्रैक्टर मार्च निकाला, लेकिन चंडीगढ़ पुलिस ने उन्हें वाई.पी.एस. चौक पर रोक दिया। इसके बाद वे मोहाली-चंडीगढ़ सीमा पर स्थित गीता मंदिर के पास धरने पर बैठ गए। बाद में, 35 सदस्यीय किसान प्रतिनिधिमंडल ने पंजाब के राज्यपाल के माध्यम से भारत के राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा और अपनी मांगों का चार्टर हरियाणा के राज्यपाल को भी सौंपा।

रोहतक में 22 मार्च को कई किसान संगठनों ने जाट धर्मशाला से करनाल मिनी सचिवालय तक धरना और विरोध मार्च निकाला। उन्होंने नगर मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा।

कीर्ति किसान यूनियन (के.के.यू.) ने 21 अप्रैल को घोषणा की कि वह किसानों से कर्ज़ की वसूली के लिए सहकारी बैंकों द्वारा अपनाए जा रहे मज़बूत उपायों का विरोध करने के लिए पंजाब सरकार के ख़िलाफ़ आंदोलन शुरू करेगी। यूनियन ने बताया कि राज्य सरकार ने विभिन्न सरकारी विभागों को किसानों से कर्ज की वसूली के लिए कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। यूनियन ने घोषणा की कि वह किसानों की गिरफ़्तारी और उनकी संपत्तियों की कुर्की का कड़ा विरोध करेगा। यूनियन ने बताया कि इस साल गेहूं की पैदावार में काफी कमी आई है। किसान कर्ज की किश्त नहीं चुका सकते। उन्होंने मांग की है कि छोटे किसानों का पूरा कर्ज़ तत्काल माफ़ किया जाए।

किसानों का लगातार हो रहा आंदोलन दिखाता है कि किसान केंद्र सरकार के झूठे वादों को मानने के विचार में नहीं हैं।

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