अमरीकी साम्राज्यवाद अपनी रणनीति को बढ़ावा देने के लिए यूक्रेन के लोगों को प्यादे के रूप में इस्तेमाल कर रहा है

जब से शीत युद्ध और दुनिया का दो ध्रुवों में बंटवारा समाप्त हुआ है, उस समय से अमरीकी साम्राज्यवाद अपनी प्रधानता के तले, एक-ध्रुवीय दुनिया स्थापित करने की अपनी रणनीति को आगे बढ़ा रहा है। इस समय अमरीका अपनी इस रणनीति को बढ़ावा देने के लिए यूक्रेन के लोगों को प्यादे के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।

अमरीका यह नहीं चाहता है कि यूक्रेन और रूस की सरकारें आपस में वार्ता करके, अपनी आपसी समस्याओं को हल कर लें। इसके बजाय, अमरीका और उसके नाटो मित्र यूक्रेन को रूस के खि़लाफ़ लड़ने के लिए खूब सारे हथियार दे रहे हैं। जाना जाता है कि यूरोप और उत्तरी अमरीका के अलग-अलग देशों से 20,000 से अधिक “वालंटियर” सैनिक यूक्रेन की सेना के साथ जुड़ गए हैं। उनमें से अधिकतम सैनिक बहुत ही उच्च प्रशिक्षण वाले सैनिक हैं। अमरीका के कई थिंक टैंक इस उम्मीद को प्रकट कर रहे हैं कि रूस यूक्रेन में लड़ते-लड़ते वहां फंस जाए, ठीक जिस प्रकार सोवियत संघ 1980 के दशक में अफगानिस्तान में फंस गया था। अमरीका को यूक्रेन के उन लाखों-लाखों लोगों की कोई परवाह नहीं है जिन्हें अपना घर-बार छोड़कर भागना पड़ा है और पोलैंड तथा यूरोप के दूसरे देशों में शरणार्थी बनकर रहना पड़ रहा है। अमरीका को इस बात की कोई परवाह नहीं है कि जंग को लंबा खींचने का अंजाम यूक्रेन, रूस और बाकी यूरोप के लोगों के लिए कितना भारी पड़ेगा।

अमरीकी प्रचार तंत्र दिन-रात रूस-विरोधी प्रचार करता रहता है। अमरीकी कंपनी मेटा, जो फेसबुक का मालिक है, उसने यह घोषणा की है कि वह रूस और बेलारूस के राष्ट्रपतियों की हत्या का आह्वान करते हुए संदेशों को फैलाने की पूरी इजाज़त देगी। अमरीका की कंपनियों ने रूसी समाचार माध्यमों को ब्लाक कर दिया है। जब रूस ने अमरीका द्वारा यूक्रेन में जैव हथियार बनाने के खि़लाफ़, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के साथ बैठक करने की मांग की, तो अमरीकी राष्ट्रपति रूस पर, यूक्रेन में रसायनिक अस्त्र इस्तेमाल करने की योजना बनाने का आरोप लगाने लगे। दूसरे देशों पर अपने हमले को जायज़ ठहराने के लिए झूठ बोलने का अमरीका का लंबा इतिहास है। हम यह नहीं भूल सकते कि किस प्रकार अमरीका और ब्रिटेन ने इराक पर हमले और उस देश को नष्ट करने के अपने घिनावने कारनामों को जायज़ ठहराने के लिए यह झूठा प्रचार फैलाया था कि इराक के पास रसायनिक अस्त्रों का भंडार है।

अमरीका और उसके नाटो मित्र यूरोप में इस बहुत ही ख़तरनाक स्थिति को पैदा करने के लिए ज़िम्मेदार हैं। अमरीका बड़े सुनियोजित तरीक़े से नाटो की सीमा को पूर्व की तरफ धकेलता रहा है। अमरीका ने उन सभी समझौतों का हनन किया है, जो उसने सोवियत संघ के साथ और सोवियत संघ के विघटन के बाद रूस के साथ, इस मुद्दे पर किए थे। 1991 से नाटो को 5 बार विस्तृत किया गया है और अब नाटो में 30 सदस्य देश हैं। 2008 में नाटो ने यह प्रस्ताव रखा कि यूक्रेन और जॉर्जिया भी उसके सदस्य बनाए जायें। यह रूस को मंजूर नहीं है क्योंकि अगर ऐसा होता है तो अमरीका की अगुवाई में नाटो सैनिक यूरोप में रूस की सीमा तक पहुंच जाएंगे। रूस ने यह मांग की है कि उसकी अपनी सुरक्षा से संबंधित इन सारी चिंताओं पर बातचीत की जाए। रूस ने यह मांग की है कि अमरीका पूर्व की ओर नाटो का विस्तार करना बंद कर दे।

प्रतिबंध

अमरीका और उसके यूरोपीय मित्रों ने रूस पर जो प्रतिबंध लगाए हैं, जिनमें रूस द्वारा ऊर्जा के आयातों पर अमरीका ने अब रोक लगा दी है, ये अब तक किसी प्रमुख आर्थिक ताक़त के खि़लाफ़ लागू किए गए प्रतिबंधों में सबसे कठोर प्रतिबंध हैं। फ्रांस के वित्त मंत्री ने इन प्रतिबंधों को “सर्व व्यापक आर्थिक और वित्तीय जंग” की परिभाषा दी है। इन प्रतिबंधों को अमरीका ने एकमत से लागू किया है। न तो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में और न ही संयुक्त राष्ट्र संघ की आम सभा में, इस पर कोई मंजूरी प्राप्त की गई है।

अमरीका दूसरे देशों पर प्रतिबंध इसलिए थोप सकता है क्योंकि दुनिया की अर्थव्यवस्था में विनिमय की मुद्रा के तौर पर, अमरीकी डॉलर हावी है। रूस पर लगाये गए प्रतिबंधों का असर न सिर्फ रूस पर पड़ेगा, बल्कि उन सभी देशों पर भी, जो उसके साथ व्यापार करते हैं, जिनमें जर्मनी, हिन्दोस्तान और चीन भी शामिल हैं।

अमरीका ने रूस के सेंट्रल बैंक पर प्रतिबंध लगाए हैं और अमरीकी वित्त व्यवस्था में रूस के सेंट्रल बैंक के जमा धन की लेन-देन पर रोक लगा रखी है। यूरोपीय संघ ने भी इसी प्रकार के प्रतिबंध लगा रखे हैं। इनकी वजह से रूस अपने 630 अरब डालर रिज़र्व को किसी काम के लिए इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है। रूस के 2 सबसे बड़े बैंक, स्बर बैंक और वी.टी.बी. बैंक तथा रूसी तेल और गैस कंपनी गैज़प्रोम को निशाना बनाया गया है। अमरीकी वित्त व्यवस्था में उनके सभी संसाधनों की लेन-देन पर रोक लगा दी गई है।

अमरीका और यूरोपीय संघ ने रूसी बैंकों को स्विफ्ट (सोसाइटी फॉर वर्ल्डवाइड इंटर बैंक फाइनेंसियल टेलीकम्यूनिकेशन) से हटा दिया है। स्विफ्ट एक ऐसी मेसेजिंग सर्विस है, जिसके सहारे दुनिया के अलग-अलग देशों के बैंक एक-दूसरे को भुगतान के संदेश भेजते हैं और संदेश पाते हैं। रूस में लगभग 70 प्रतिशत बैंक ट्रांसफर में इस सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है।

यह समझना महत्वपूर्ण होगा कि जबकि रूस को स्विफ्ट से हटा दिया गया है, तो यूरोपीय संघ ने इस बात का ध्यान रखा है कि अन्य देशों के रूस से प्राकृतिक गैस के आयातों पर कोई प्रतिबंध न लगाए जाएं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार 2021 में यूरोपीय संघ प्राकृतिक गैस की अपनी संपूर्ण ज़रूरत का लगभग 40 प्रतिशत रूस से आयात करता था। अमरीका यह मांग करता आया है कि जर्मनी रूस से प्राकृतिक गैस ख़रीदना रोक दे, और इसके बजाय, अमरीका से अपनी प्राकृतिक गैस ख़रीदे। अब तक जर्मनी रूस से ही अपनी गैस खरीदता आ रहा है।

रूस पर अमरीका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों की वजह से कई देशों को मजबूर होकर वैकल्पिक रास्ते तय करने पड़ रहे हैं, जिनके सहारे वे अमरीकी डालर का इस्तेमाल किए बिना, रूस के साथ अपना व्यापार जारी रख सकते हैं। कुछ ऐसी रिपोर्टें मिली हैं कि हिन्दोस्तान की सरकार रूस के साथ रुपए और रूबल में व्यापार करने के बारे में विचार कर रही है। चीन और रूस अपने आपसी व्यापार को युआन और रूबल में करने की योजना बना रहे हैं।

निष्कर्ष

अमरीका पूरी कोशिश कर रहा है कि यूक्रेन में जंग लंबे समय तक खिंचता जाए। अमरीका यह उम्मीद कर रहा है कि इस तरह रूस और यूक्रेन दोनों, एक दूसरे को थका देंगे और साथ ही साथ जर्मनी व यूरोप के अन्य देश भी कमजोर हो जाएंगे। रूस को कमजोर करने और यूरोप पर अपना नियंत्रण और प्रभुत्व मजबूत करने की अपनी इस रणनीति को लागू करने में, यूक्रेन के लोगों को प्यादे बनाकर, अमरीका उन्हें दुःख-दर्द और तबाही में धकेल रहा है।

एक बहुत बहुत ही ख़तरनाक स्थिति पैदा हो रही है। यह अमरीका की, सारी दुनिया को अपने वर्चस्व और नियंत्रण में लाने की कोशिशों का नतीजा है। इस संभावना को नकारा नहीं जा सकता कि यूक्रेन में चल रही जंग बाकी यूरोप में भी फैल जाए।

हिन्दोस्तान के लोगों को अमरीकी साम्राज्यवाद के झूठे प्रचार पर यक़ीन नहीं करना चाहिए, कि वह यूक्रेन के लोगों के हित में काम कर रहा है। हिन्दोस्तान के लोगों को यूक्रेन और रूस के बीच की समस्या के, अमरीकी साम्राज्यवाद की दख़लंदाज़ी के बिना, शांतिपूर्ण समाधान के लिए सभी प्रयासों का समर्थन करना चाहिए।

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