यूक्रेन में जंग और यूरोप में ख़तरनाक स्थिति के लिए अमरीका और नाटो ज़िम्मेदार हैं

जब से रूस ने यूक्रेन में अपनी सैनिक दखलंदाज़ी शुरू कर दी, उसी समय से अमरीका की अगुवाई में पश्चिमी मीडिया ने बड़े पैमाने पर झूठा प्रचार फैलाने का अभियान शुरू कर दिया है। इस झूठे प्रचार अभियान का मक़सद है रूस को यूरोप में जंग भड़काने वाला बताना और अमरीका तथा उसके नाटो मित्रों को तथाकथित शांति-रक्षक, यूक्रेन की राष्ट्रीय संप्रभुता के रक्षक और “क़ानूनों पर आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था” के रक्षक के रूप में पेश करना। इस दुष्प्रचार का इरादा है रूस के बारे में हव्वा खड़ा करना और इस हक़ीक़त को छुपाना, कि अमरीकी साम्राज्यवादी और उसके नाटो मित्र ही यूरोप पर कब्ज़ा करने और एशिया पर हावी होने के लिए, बलपूर्वक अपनी मनमर्जी को थोप रहे हैं।

रूस को यूक्रेन में जंग भड़काने वाला बताना सरासर झूठ है। सच्चाई तो यह है कि अमरीका ही लगातार पूर्व की दिशा में नाटो का विस्तार करने के लिए ज़िम्मेदार है। अमरीका ने रूस के साथ किये गए पूर्व समझौते – कि नाटो का पूर्वी यूरोप में विस्तार नहीं किया जायेगा – का उल्लंघन करके, ऐसा किया है। इस समय रूस की पश्चिमी सरहदों पर हजारों-हजारों नाटो सैनिक तैनात किये गए हैं, जिसकी वजह से रूस की सुरक्षा को गंभीर ख़तरा है।

वह अमरीका ही था जिसने 2014 में, यूक्रेन की निर्वाचित सरकार को बलपूर्वक गिराकर, वहां आकस्मिक राज्य परिवर्तन करवाया था। उन्होंने सत्ता पर नव-नाज़ियों और उक्रेन के कुछ ऐसे कुलीनों को बिठाया था, जो अमरीका की रूस-विरोधी रणनीति में, अमरीका के साथ मिलीभगत करना चाहते थे। उस समय से लेकर आज तक, यूक्रेन में जो भी सरकार आई है, उसने अमरीका के साथ अपने सैनिक और रणनैतिक गठबंधन को क्रमशः मज़बूत किया है। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि यूक्रेन को किसी भी समय नाटो सैनिक गठबंधन का सदस्य बनाया जाने वाला था। इन सारी बातों से यह साफ़ हो जाता है कि यह अमरीका ही है जिसने यूक्रेन में संकट को भड़काया है।

यूक्रेन के लोगों और रूस के लोगों के बीच में, बहुत नज़दीकी के आपसी संबंध हैं। यूक्रेन की 30 प्रतिशन आबादी रूसी है। रूस के लोगों के साथ उनके बहुत क़रीबी के पारिवारिक संबंध हैं। 1922 में स्थापित हुए सोवियत समाजवादी गणराज्य संघ के सर्वप्रथम घटक राष्ट्रों में यूक्रेन एक था।

महान देशभक्ति के युद्ध (ग्रेट पेट्रियोटिक वॉर) के दौरान, यूक्रेन के लोगों ने नाज़ी कब्ज़ाकारी फ़ौजों को खदेड़ने और न सिर्फ अपनी मातृभूमि को बल्कि पूरे यूरोप को नाज़ी फासीवादियों से मुक्त कराने के लिए, सोवियत संघ के बाकी लोगों की तरह, बड़ी कुर्बानियां की थीं। उस युद्ध में जिन लोगों ने अपने ही देशवासियों के खि़लाफ़, जर्मन नाज़ियों की सहायता की थी, आज उन्हीं के औलाद – नव-नाज़ी – यूक्रेन में खुलेआम घूम रहे हैं। उन्हें अमरीकी साम्राज्यवादियों से धन और हथियार मिल रहे हैं। उन्होंने यूक्रेन में गृह युद्ध चला रखा है, जिसमें 15,000 लोग मारे गए हैं। यूक्रेन में जो लोग यह नहीं चाहते हैं कि उनका देश रूस के खि़लाफ़ अमरीकी रणनीति का हथकंडा बने, उन्हें ‘राष्ट्र-विरोधी’ और ‘रूसी एजेंट’ करार दिया जा रहा है और उन पर हमला किया जा रहा है।

अमरीकी साम्राज्यवाद और उसके नाटो मित्र ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाकर कह रहे हैं कि वे राष्ट्रों के आत्म-निर्धारण के अधिकार की हिफ़ाज़त करते हैं, कि वे दूसरे देशों और लोगों की संप्रभुता का आदर करते हैं। यह एक बहुत बड़ा झूठ है। अमरीका और उसके नाटो मित्रों ने लगातार उन सभी देशों और लोगों, जो अपनी पसंद के आर्थिक और राजनीतिक रास्ते पर चलना चाहते हैं, उनकी संप्रभुता को पांव तले कुचल दिया है। वे अमरीका और उसके मित्र ही हैं, जिन्होंने युगोस्लाविया, अफ़ग़ानिस्तान, इराक, लीबिया और सीरिया की संप्रभुता का घोर हनन किया है। आज अमरीका और ब्रिटेन का यह मांग करना कि रूस को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से बाहर निकाल दिया जाये क्योंकि उसने यूक्रेन की संप्रभुता का हनन किया है, यह पाखंड की हद है। इसी अमरीका ने ब्रिटेन और कुछ अन्य देशों के साथ मिलकर, “रजामंद देशों के गठबंधन” की स्थापना करके, 2003 में इराक पर हमला किया और उस देश पर कब्ज़ा किया था, जो कि संयुक्त राष्ट्र संघ के चार्टर का सरासर हनन था।

अमरीका और ब्रिटेन बिना कोई सबूत पेश किए, यह दावा कर रहे हैं कि रूस स्कूलों और अस्पतालों को नष्ट कर रहा है। हर रोज़ फ़र्ज़ी कहानियां और फोटो छापे जाते हैं, यह साबित करने के लिए कि रूसी सेना यूक्रेन के शहरों में रिहायशी इलाकों और दूसरे नागरिक संसाधनों पर हमला कर रही है। बाद में जाना गया है कि इनमें से कई हमले यूक्रेन की मिसाइलों की वजह से हुए थे। परंतु इन झूठी कहानियों को वापस नहीं लिया जाता है। दुनिया के दूसरे भागों में लिए गए युद्ध के फोटो को सुनियोजित तरीक़े से फैलाया जा रहा है, यह झूठा प्रचार करने के लिए कि यह सब कुछ यूक्रेन में हो रहा है।

अमरीका और ब्रिटेन यूक्रेन में युद्ध से भागने वाले शरणार्थियों के बारे में घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं। वे चाहते हैं कि दुनिया के लोग भूल जायें कि अमरीका ने सर्बिया, अफ़ग़ानिस्तान, इराक, लीबिया और सीरिया पर बम बरसा कर वहां किस प्रकार की तबाही मचाई थी। वे चाहते हैं कि लोग भूल जाएं कि उन्होंने कैसे इन देशों के करोड़ों-करोड़ों लोगों को शरणार्थी बना दिया था। यूक्रेन के मामले में भी शरणार्थियों के प्रति उनका दोहरा मापदंड साफ दिखता है। बीते कुछ हफ्तों में जब यूक्रेन के डॉनबास इलाके से लाखों-लाखों शरणार्थियों को रूस भागना पड़ा, तब उन्होंने कोई आंसू नहीं बहाया।

यह साफ़-साफ़ दिख रहा है कि अमरीका और उसके नाटो मित्र यह नहीं चाहते कि रूस और यूक्रेन आपस में कोई ऐसा समझौता कर लें, जिससे जंग का अंत हो और शांति बहाल हो। इसके विपरीत, अमरीका और उसके नाटो मित्र यह सुनिश्चित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं कि यूक्रेन और रूस के बीच में जंग जारी रहे। वे यूक्रेन की सेना को अरबों-अरबों डालरों के आधुनिकतम हथियार सप्लाई कर चुके हैं और करते जा रहे हैं। अमरीका यूक्रेन के इस वर्तमान युद्ध का इस्तेमाल करके, सभी नाटो सदस्य देशों को रूस के ख़िलाफ़ लामबंद करने की पूरी कोशिश कर रहा है।

यूरोप और पूरी दुनिया के लोगों के लिए एक बहुत ही ख़तरनाक स्थिति पैदा की गई है। बरतानवी-अमरीकी साम्राज्यवाद और यूरोपीय संघ ने रूस पर कठोर आर्थिक प्रतिबंध लागू किए हैं। इन प्रतिबंधों का न सिर्फ रूस की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर होगा, बल्कि यूरोप के सभी लोगों को भी इन प्रतिबंधों के कारण भारी कठिनाइयां झेलनी पड़ेंगी।

यह अमरीकी साम्राज्यवाद ही है, जो जंग की आग में घी डाल रहा है। इस संभावना को नकारा नहीं जा सकता कि यूक्रेन में हो रहा युद्ध पूरे यूरोप में फैल जाएगा।

हिन्दोस्तान के लोगों को अमरीकी साम्राज्यवाद के द्वारा फैलाए गए, यूक्रेन में रूसी सैनिक हस्तक्षेप के बारे में झूठे प्रचार पर यक़ीन नहीं करना चाहिए। हमें यह समझना होगा कि अमरीकी साम्राज्यवाद और नाटो इस समस्या के स्रोत हैं। वे इस समस्या के समाधान का हिस्सा नहीं हो सकते। हिन्दोस्तान के लोगों को अमरीकी साम्राज्यवादी हस्तक्षेप के बिना, यूक्रेन और रूस के बीच की समस्या के शांतिपूर्ण समाधान की सभी कोशिशों का पूरा-पूरा समर्थन करना चाहिए।

Share and Enjoy !

Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *