जम्मू व कश्मीर में बिजली क्षेत्र के मज़दूरों ने अपने संघर्ष में जीत हासिल की

जम्मू और कश्मीर में बिजली क्षेत्र के हड़ताली मज़दूरों ने 21 दिसंबर, 2021 को कड़े संघर्ष से हासिल जीत का जश्न मनाया। उन्होंने 17 दिसंबर की मध्यरात्रि से काम के बहिष्कार का आह्वान किया था, जब सरकार ने इस केंद्र शासित प्रदेश में बिजली क्षेत्र के निजीकरण की दिशा में उठाए गए क़दम को रोकने की उनकी मांग को पूरा नहीं किया।

400_JK-Power-Sector-Strikeजम्मू और कश्मीर डिवीजनों के लिए अलग ट्रांसमिशन और वितरण निगमों के गठन के साथ, 2019 में जम्मू और कश्मीर में बिजली क्षेत्र में सुधार किए गए। 4 दिसंबर, 2021 को सरकार ने पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और जम्मू व कश्मीर पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन (जे.के.पी.टी.सी.एल.) का एक संयुक्त उपक्रम बनाकर जम्मू व कश्मीर की बिजली संपत्तियों के निजीकरण करने की घोषणा की।

कार्य बहिष्कार का आह्वान ऑल जे.एंडके. पावर इंप्लाईज़ एंड इंजीनियर्स कोर्डिनेशन कमेटी (जे.के.पी.ई.ई.सी.सी.), जम्मू व कश्मीर के बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के सभी एसोसियेशनों और यूनियनों की समन्वय समिति द्वारा किया गया था। समिति ने बिजली विभाग के जम्मू-कश्मीर के प्रधान सचिव को एक पत्र भेजा था तथा इस क़दम पर अपनी असहमति व्यक्त की थी। उन्होंने सरकार से इस क़दम को रोकने और समन्वय समिति के साथ बातचीत शुरू करने का अनुरोध किया था। जब सरकार ने उनकी मांग को पूरा करने से इंकार कर दिया, तब बिजली कर्मचारियों ने राज्यव्यापी बहिष्कार को जारी रखा। जे.के.पी.ई.ई.सी.सी. ने घोषणा की कि वह अपने रुख़ पर अडिग रहेगी कि पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के साथ संयुक्त उपक्रम की कंपनी को जम्मू और कश्मीर में किसी भी परिस्थिति में अनुमति नहीं दी जाएगी।

400_JK-Power-Sector-Strike_1हड़ताल की उल्लेखनीय विशेषता यह थी कि यह हड़ताल सम्पूर्ण जम्मू-कश्मीर में की गई थी। इंजीनियरों सहित बिजली कर्मचारियों की अनुपस्थिति में बिजली आपूर्ति ठप्प होने के कारण जम्मू-कश्मीर के प्रमुख हिस्से अंधेरे में डूब गये। समन्वय समिति के नेताओं के आवासों पर पुलिस की छापेमारी के बावजूद मज़दूर बेख़ौफ डटे रहे। बिजली कर्मचारियों ने अपने उद्देश्य के समर्थन में लोगों को सक्रिय रूप से लामबंध किया, क्योंकि वे समझते थे कि रखरखाव की गतिविधियों के बहिष्कार से लोगों को बहुत कठिनाई होगी। समिति के सदस्यों ने मोर्चे का नेतृत्व किया और वे प्रदेश भर में हड़ताल कर रहे मज़दूरों के साथ डटे रहे थे। सरकार ने उन्हें बर्खास्त करने और नौकरी से निकालने की धमकियां दीं, लेकिन मज़दूर एकजुट रहे और अपने संकल्प पर डटे रहे।

समन्वय समिति ने निर्णय लिया था कि यदि किसी भी कर्मचारी को गिरफ़्तार किया जाता है या किसी भी कर्मचारी के ख़िलाफ़ कोई दंडात्मक कार्रवाई की जाती है, तो जम्मू-कश्मीर के लगभग 21,000 बिजली कर्मचारी और इंजीनियर जिला मुख्यालय में सामूहिक गिरफ़्तारी देंगे और इसके परिणाम की ज़िम्मेदारी सरकार की होगी।

21 दिसंबर को सरकार द्वारा निजीकरण की प्रक्रिया को रोकने के लिए सहमत होने के बाद हड़ताल वापस ले ली गई। सरकार एक समिति गठित करने पर भी सहमत हुई जिसमें बिजली क्षेत्र में सुधारों की सिफारिश करने के लिए जे.के.पी.ई.ई.सी.सी. के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

सरकार ने इंजीनियरों के नियमितीकरण और दिहाड़ी मज़दूरों की काम करने की स्थिति के संबंध में तथा बिजली क्षेत्र के मज़दूरों के वेतन और अन्य मांगों के समय पर संवितरण की गारंटी भी दी। सरकार ने मज़दूरों से वादा किया कि इन मुद्दों को समयबद्ध तरीक़े से हल किया जाएगा।

इस हड़ताल ने केंद्र शासित प्रदेश के बिजली क्षेत्र में 20,000 से अधिक मज़दूरों की एकता को दर्शाया। इसे अन्य राज्यों के बिजली क्षेत्र के मज़दूरों से भी व्यापक समर्थन मिला। लेह, तेलंगाना और उत्तराखंड के बिजली कर्मचारी, जम्मू-कश्मीर के मज़दूरों के समर्थन में हड़ताल पर चले गए।

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