दिल्ली राज्य के मज़दूरों के सम्मेलन ने 25 नवंबर, 2021 को हड़ताल का आह्वान किया :
अपनी आजीविका और अधिकारों पर बढ़ते हमलों के ख़िलाफ़ संघर्ष में एकजुट हों!

हम यहां मज़दूर एकता कमेटी से प्राप्त ट्रेड यूनियन समन्वय समिति द्वारा आयोजित अधिवेशन की रिपोर्ट प्रकाशित कर रहे हैं।

दिल्ली की ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने 30 सितंबर को नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण सम्मेलन आयोजित किया था। सम्मेलन ने दिल्ली के मज़दूरों, विशेष रूप से अनौपचारिक और असंगठित क्षेत्र के मज़दूरों की गंभीर स्थिति का आकलन किया। सम्मलेन में हमारी आजीविका और अधिकारों पर बढ़ते हमलों के ख़िलाफ़ एकजुट संघर्ष का आह्वान किया गया।

400_30-sept-trade-union-Convention_Stage_1सम्मेलन ने बेरोज़गारी और आजीविका की असुरक्षा की भयानक समस्याओं पर प्रकाश डाला, जिसमें बताया गया कि किस तरह मज़दूरों को कम मज़दूरी पर लंबे समय तक काम करने के लिए मजबूर किया जाता है और इसके बावजूद उन पर नौकरी खोने का ख़तरा लगातार बना रहता है। कोविड-19 के संकट ने इन समस्याओं को और भी बढ़ा दिया है। कोविड-19 की महामारी के दौरान सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी सुविधाओं की कमी ने मज़दूरों के कष्टों को और बढ़ा दिया है। किसी भी प्रकार की सामाजिक सुरक्षा के नहीं होने का मतलब है कि मज़दूरों को खुद के हाल पर छोड़ दिया गया है। दूसरी ओर, सबसे बड़े इजारेदार पूंजीपतियों की संपत्ति में तेज़ी से वृद्धि हुई है।

सम्मलेन में बताया गया कि सरकार सबसे बड़े इजारेदार कॉरपोरेट घरानों के एजेंडे को ही लागू कर रही है। हमारे किसानों और मज़दूरों पर गंभीर हमला करने वाले किसान विरोधी कानूनों और श्रम संहिताओं को आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने कोविड-19 के प्रतिबंधों का इस्तेमाल किया है। सम्मेलन में निजीकरण और मुद्रीकरण कार्यक्रम की आलोचना की गई, जिसके तहत हजारों करोड़ रुपये की भूमि और सार्वजनिक संपत्ति कॉरपोरेट घरानों को सौंपी जा रही है। यह बताया गया कि निजीकरण का कार्यक्रम बेरोज़गारी और मज़दूरों की आजीविका और अधिकारों पर हमलों को बढ़ावा देगा।

400_30-sept-trade-union-Convention_particiअधिवेशन में दिल्ली की ट्रेड यूनियनों द्वारा उठाई गई मुख्य मांगें थीं : चार श्रम संहिताओं को ख़ारिज करना, किसान-विरोधी कानूनों को ख़ारिज करना, न्यूनतम मज़दूरी 21,000 रुपए प्रति माह लागू हो, कोविड संकट के दौरान अपनी नौकरी गंवाने वाले मज़दूरों को मुआवज़ा मिले, मुफ्त टीकाकरण हो, अनुबंध पर मज़दूरी को समाप्त किया जाये, समान काम के लिए समान वेतन मिले, सभी मज़दूरों के लिए सामाजिक सुरक्षा और वृद्धावस्था पेंशन हो, निजीकरण को समाप्त किया जाये, इत्यादि।

सम्मेलन में हमारी आजीविका और अधिकारों की रक्षा के लिए एक संयुक्त संघर्ष का आह्वान किया गया। 25 नवंबर, 2021 को दिल्ली की सभी ट्रेड यूनियनों द्वारा संयुक्त हड़ताल करने का आह्वान किया गया।

सम्मेलन का आयोजन सीटू, एटक, ऐक्टू, एच.एम.एस., मज़दूर एकता कमेटी (एम.ई.सी.), यू.टी.यू.सी., टी.यू.सी.सी., ए.आई.यू.टी.यू.सी., आई.सी.टी.यू., सेवा, एल.पी.एफ. और इंटक द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था।

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