अमरीकी रणनीति में क्वाड की भूमिका

अमरीका, जापान, हिन्दोस्तान और ऑस्ट्रेलिया के शासनाध्यक्षों ने 24 सितंबर को अमरीका में मुलाक़ात की। यह इन चार देशों की सरकारों के प्रमुखों की पहली बैठक थी, जिसमें वे सब स्वयं एक साथ उपस्थित थे, इस गठबंधन को क्वाड (चतुर्भुज सुरक्षा संवाद) के नाम से जाना जाता है। इस साल की शुरुआत में इन सरकारों के प्रमुखों ने मार्च में एक ऑनलाइन बैठक भी की थी।

क्वाड पूरी दुनिया पर अपना बेजोड़ वर्चस्व स्थापित करने की अमरीकी रणनीति का एक हिस्सा है और इसकी शुरुआत एशिया को जीतने की भूमिका के रूप में है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अमरीका, उभरते हुए चीन को एक मुख्य ख़तरे के रूप में देखता है। शिखर सम्मेलन के अंत में चारों नेताओं द्वारा जारी संयुक्त बयान से स्पष्ट रूप से पता चलता है कि अमरीका चीन को रोकने के लिए क्वाड गठबंधन का इस्तेमाल करने की उम्मीद रखता है।

यह बयान हिन्द-प्रशांत महासागर क्षेत्र और दुनिया में “सुरक्षा और समृद्धि” को, कथित रूप से मजबूत करने के लिए “अंतर्राष्ट्रीय कानून में निहित, एक नियम-आधारित व्यवस्था के समर्थन” इन चार देशों की प्रतिबद्धता पर आधारित है। अमरीका किसी भी अंतर्राष्ट्रीय कानून का सम्मान नहीं करता है। इसके विपरीत यह नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था का सबसे बड़ा विरोधी है। यह उन सिद्धांतों का लगातार उल्लंघन करता आया है जिन पर संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना हुई थी, जैसे कि सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान करना चाहे उनकी आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था अलग भी हो। संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा क्यूबा से नाकेबंदी हटाने की मांग के प्रस्तावों के बावजूद, अमरीका क्यूबा की अवैध नाकेबंदी जारी को रखे हुए है।

अमरीका ने ईरान की एकतरफा आर्थिक नाकेबंदी कर दी है। अमरीका ने हर उस देश को सज़ा देने की धमकी दी है, जो ईरान के साथ व्यापार करने की जुर्रत करता है। अमरीकी साम्राज्यवाद द्वारा आक्रामकता, हमले और सैन्य हस्तक्षेप के परिणामस्वरूप, कोरियाई प्रायद्वीप के देश, वियतनाम, लाओस,  कंबोडिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस, अफगानिस्तान, इराक, ईरान, लीबिया, सीरिया और सोमालिया के लोगों को भारी विनाश और तबाही का सामना करना पड़ा है।

अमरीका पृथ्वी पर, अब तक की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति है और इसके युद्धपोत दुनिया के सभी समुद्रों और महासागरों में खुल्लम-खुल्ला बिना किसी रोक के स्वतंत्र घूमते हैं और अन्य सभी देशों को, वे चाहे बड़े हों या छोटे धमकी देते हैं। वह अन्य देशों की क्षेत्रीय जल-सीमाओं को मान्यता नहीं देता है, जैसा कि यू.एन.सी.एल.ओ.एस. (संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन की सहमति से बने समुद्र के क़ानून) द्वारा परिभाषित किया गया है। इस साल की शुरुआत के अप्रैल में हिन्दोस्तान के ख़िलाफ़ एक उकसावे के रूप में अमरीका द्वारा, अपने सातवें जहाजी बेड़े के एक अमरीकी युद्धपोत को लक्षद्वीप के पास हिन्दोस्तानी जल क्षेत्र की सीमाओं का उल्लंघन करते हुए जबरदस्ती भेजा गया था। अमरीका ने सार्वजनिक रूप से और बड़ी बेशर्मी के साथ, यह ऐलान भी किया था कि वह इन जल-क्षेत्रों की  सीमाओं पर हिन्दोस्तान के अधिकारों को मान्यता नहीं देता।

हिन्दोस्तान के साथ-साथ दक्षिण पूर्व एशिया के विभिन्न देशों के अपनी देश की सीमाओं और क्षेत्रीय जल सीमाओं के बारे में चीन के साथ मतभेद हैं। ये मतभेद उपनिवेशवादी हुकूमत की विरासत हैं। चीन को नियंत्रण में करने के लिए अमरीका इस तरह के मतभेदों का फ़ायदा उठा रहा है और अपने नेतृत्व में इन देशों का चीन के ख़िलाफ़ गठबंधन बनाने के लिए उन्हें उकसा रहा है।

अमरीका ने प्रस्ताव रखा है कि उसके नेतृत्व में एक पूर्वी-नाटो-यानी, अमरीका, जापान, हिन्दोस्तान, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण पूर्व एशिया के देशों का चीन के ख़िलाफ़ एक सैन्य गठबंधन स्थापित किया जाना चाहिए। दक्षिण पूर्व एशिया और पूर्वी एशिया के लोगों को औपनिवेशिक हुकूमत, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उनके देशों पर बर्बर जापानी कब्ज़े और कोरियाई, वियतनामी और अन्य लोगों के ख़िलाफ़, अमरीकी साम्राज्यवाद द्वारा छेड़े गए क्रूर युद्ध की कड़वी यादें एक दम ताजा हैं। वे अमरीका या किसी अन्य साम्राज्यवादी शक्ति के अधीन नहीं होना चाहते। वे बिलकुल नहीं चाहते कि अमरीका और चीन के बीच बढ़ते टकराव में उनके देश उलझे।

इस हक़ीक़त का एहसास करते हुए कि दक्षिण पूर्व एशिया के अधिकांश देश चीन के ख़िलाफ़ अमरीकी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन का हिस्सा नहीं बनना चाहते हैं, अमरीका, एशिया पर अपना वर्चस्व जमाने की अपनी रणनीति में कुछ परिवर्तन लाने की कोशिश कर रहा है।

क्वाड गठबंधन की स्थापना का अंतर्निहित उद्देश्य है चीन से दोनों ही हालातों में, चाहे ज़मीन पर या महासागरों में एक सैन्य शक्ति के रूप में लड़ना। साथ ही दक्षिण पूर्व एशिया के अन्य देशों को इस तरह के गठबंधन में लामबंध करने के लिए, अमरीका एक बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सहायता देने के बहाने, उनका समर्थन हासिल करने का प्रयास कर रहा है। अमरीका दावा करता है कि यह सहायता बिना किसी शर्त और स्वार्थ के एशियाई देशों और लोगों को प्रदान की जाएगी – कहने के लिए यह तरीक़ा, इन देशों में बुनियादी ढांचे के विकास में चीन के निवेश के तरीके से बिलकुल अलग है।

चीन ने एशिया, अफ्रीका और यूरोप के कई देशों को शामिल करते हुए बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव नामक बड़े पैमाने पर एक बुनियादी ढांचे के विकास की पहल की है। क्वाड शिखर सम्मेलन ने चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के एक पर्याय के रूप में आसियान देशों में बुनियादी ढांचे के विकास में निवेश करने का निर्णय लिया।

क्वाड शिखर सम्मेलन ने 5जी संचार, सौर-ऊर्जा आदि के साथ, उच्च तकनीकी क्षेत्रों में चार देशों के बीच सहयोग की घोषणा की। अमरीका इन क्षेत्रों में चीन को चुनौती देना चाहता है।

चीन ने आसियान के देशों में भारी मात्रा में कोविड टीकों की आपूर्ति की है। क्वाड शिखर सम्मेलन ने भी ऐलान किया कि हिन्दोस्तान अक्तूबर से इन देशों को टीकों की आपूर्ति करेगा। हिन्दोस्तान में टीकों के उत्पादन का वित्त-पोषण अमरीका, जापान और ऑस्ट्रेलिया द्वारा किया जाएगा।

क्वाड शिखर सम्मेलन में निर्बाध-आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करने की बात की गई। चीन दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला के साथ-साथ कई औद्योगिक वस्तुओं में महत्वपूर्ण तत्वों का उत्पादक है। चीन में इस समय उत्पादित आपूर्ति-श्रृंखलाओं के महत्वपूर्ण तत्वों के उत्पादन को अमरीका ने हिन्दोस्तान में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव पेश किया है।

संक्षेप में, अमरीका दक्षिण पूर्व एशिया के देशों पर, चीन के साथ अपने टकराव में हिन्दोस्तान का इस्तेमाल करना चाहता है।

अमरीका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन द्वारा ए.यू.के.यू.एस. नामक एक नए सैन्य गठबंधन के गठन की घोषणा के केवल एक सप्ताह बाद ही क्वाड शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया था। यह नया गठबंधन खुले तौर पर चीन के ख़िलाफ़ और चीन पर लक्षित है और इसका उद्देश्य ऑस्ट्रेलिया को एक आधार के रूप में इस्तेमाल करते हुए हिन्द और प्रशांत महासागरों में चीन को सैन्य रूप से चुनौती देना है।

दस साल पहले, तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने “एशिया की धुरी” नामक रणनीति की घोषणा की थी। अमरीका ने अपने अधिकांश सशस्त्र बलों को हिंद-प्रशांतमहासागर क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया है। अमरीका ने जापान के साथ मौजूदा सैन्य-संधि के अलावा, ऑस्ट्रेलिया और हिन्दोस्तान के साथ  अलग-अलग रणनीतिक सैन्य गठबंधन स्थापित किए हैं। चारों देश हिंद महासागर के साथ-साथ प्रशांत महासागर में नियमित रूप से संयुक्त सैन्य अभ्यास करते हैं। अब अमरीका ने एक नए ए.यू.के.यू.एस. सैन्य गठबंधन की स्थापना की है।

हिन्दोस्तानी पूंजीपति ए.यू.के.यू.एस. के साथ सैन्य गठबंधन स्थापित कर, एक ख़तरनाक खेल खेल रहे हैं। समाचार रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि अमरीका ने हिन्दोस्तान में कश्मीर या लद्दाख में अमरीकी सैन्य अड्डे उपलब्ध कराने के लिए कहा है। इससे पता चलता है कि अमरीकी क्षेत्र के अन्य देशों के ख़िलाफ़ अपने युद्धों में हिन्दोस्तान को उलझाना चाहता है। हिन्दोस्तानी लोगों को यह मांग करनी चाहिए कि हिन्दोस्तान, अमरीका के साथ अपने रणनीतिक गठबंधन को समाप्त कर दे।

अमरीका ने एशिया पर विजय की अपनी रणनीति को पूरा करने के लिए क्वाड की स्थापना की है। अमरीका, हिन्दोस्तान और चीन के बीच के अंतर्विरोधों को और तेज़ करने की कोशिश करेगा। अमरीका, चीन के साथ प्रतिस्पर्धा में अपने बाज़ारों और एशिया में प्रभाव क्षेत्र का विस्तार करने के लिए, हिन्दोतानी पूंजीपति वर्ग की महत्वाकांक्षाओं को बढ़ावा देने की कोशिश करेगा। सच तो यह है कि कई देशों को इस बात का कड़वा तजुर्बा है कि कैसे अमरीका ने अपने रणनीतिक साम्राज्यवादी मंसूबों के हासिल करने के लिए उनका इस्तेमाल किया और जब उसका मतलब निकल गया, तो फिर उनके पीठ में छुरा भोंका।

क्वाड इस क्षेत्र में अमरीकी साम्राज्यवाद के मंसूबों को पूरा करने के लिए छेड़े गए युद्धों में हिन्दोस्तान के उलझने के ख़तरों को और बढ़ाता है। हिन्दोस्तान को क्वाड से बाहर निकलना होगा।

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