किसान आंदोलन – वर्तमान स्थिति और आगे का रास्ता

मज़दूर एकता कमेटी द्वारा आयोजित दूसरी बैठक

26 सितंबर को दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के लगातार विरोध प्रदर्शन को 10 महीने पूरे हुए। 28 सितंबर को मज़दूर एकता कमेटी (एमईसी) ने ‘‘किसान आंदोलनः वर्तमान स्थिति और आगे का रास्ता’’ विषय पर दूसरी ऑनलाइन बैठक आयोजित की।

बैठक में देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ ब्रिटेन और कनाडा के लोगों ने भी भाग लिया। बैठक में मणिपुर, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एन.सी.आर., महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड, तमिलनाडु, केरल, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और अन्य राज्यों से कार्यकर्ता मौजूद थे। निजीकरण के ख़िलाफ़ संघर्ष में शामिल कई सार्वजनिक क्षेत्र के यूनियनों के नेताओं ने बैठक में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। महिला संगठनों, किसान संगठनों, युवा संगठनों और लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ने वाले संगठनों के कार्यकर्ताओं ने बैठक और विचार-विमर्श में सक्रियता से भाग लिया।

बैठक का संचालन एम.ई.सी. की ओर से सुचरिता जी ने किया। उन्होंने मुख्य वक्ता, श्री जगजीत सिंह डल्लेवाल, अध्यक्ष, भारतीय किसान संघ (सिधुपुर) का परिचय कराया, जो इस समय किसान आंदोलन की अगुवाई करने वाले संगठनों में से एक हैं। उन्होंने अन्य संगठनों के नेताओं के नामों की भी घोषणा की जिन्हें किसान आंदोलन के समर्थन में बोलने के लिए आमंत्रित किया गया था।

बैठक में कॉमरेड हरभजन चीमा सहित कनाडा में ईस्ट इंडियन डिफेंस कमेटी (ई.आई.डी.सी.) के कई साथियों ने भाग लिया। ये कामरेड 1970 के दशक में कनाडा में हिन्दोस्तानियों पर राज्य-आयोजित नस्लवादी हमलों के ख़िलाफ़ संघर्ष में सबसे आगे थे, जिसके कारण 1973 में ई.आई.डी.सी. की स्थापना हुई थी। ई.आई.डी.सी. ने हिन्दोस्तानी समुदाय के हजारों महिलाओं और पुरुषों को राज्य-संगठित नस्लवादी हमलों के ख़िलाफ़ संघर्ष  के लिए, ‘‘आत्मरक्षा ही एकमात्र तरीका है!’’ के नारे के साथ संगठित किया था। आज ये कामरेड हिन्दोस्तान में किसान आंदोलन और मज़दूरों के संघर्ष के समर्थन में कनाडा में हिन्दोस्तानी समुदाय को संगठित करने में सबसे आगे हैं। सुचरिता जी ने कहा कि कनाडा में हिन्दोस्तानी समुदाय की गरिमा और अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ने वाले कामरेडों का बैठक में उपस्थित होना बड़े सम्मान की बात है।

श्री जगजीत सिंह डल्लेवाल ने इस बैठक को आयोजित करने और विदेशों में मज़दूरों, किसानों, युवाओं, महिलाओं और देशभ क्त हिन्दोस्तानियों के व्यापक दर्शकों को जुटाने के लिए एमईसी को धन्यवाद दिया। उन्होंने किसान आंदोलन की अब तक की प्रक्रिया, तीन किसान विरोधी कानूनों को निरस्त किए जाने तक किसानों की एकता और दृढ़ संकल्प, राज्य द्वारा फैलाए गए झूठ और विरोध करने वाले किसानों पर किए गए दमन, और किसानों की एकता को तोड़ने के लिए राज्य के प्रयासों के बारे में विस्तार से बताया।। उन्होंने कहा कि बड़े हिन्दोस्तानी और विदेशी इजारेदार पूंजीपतियों की निगाहें हिन्दोस्तान में कृषि क्षेत्र पर हमेशा भारी मुनाफे के स्रोत के रूप मे रही है। उन्होंने बताया की कृषि पर बड़े इजारेदार घरानों का प्रभुत्व का विरोध लगभग 30 साल पहले हिन्दोस्तान में निजीकरण कार्यक्रम के पहले चरण के संघर्ष से चालू है।

श्री डल्लेवाल जी ने मज़दूरों और किसानों की बढ़ती एकता और देश के सभी हिस्सों में हिन्दोस्तानी लोगों के सभी वर्गों से किसान आंदोलन के लिए भारी समर्थन पर प्रकाश डाला। उन्होंने आगे की राह बताते हुए किसान आंदोलन के संघर्ष को देश के कोने-कोने तक ले जाने के संकल्प की बात कही। उन्होंने कहा कि किसानों के संघर्ष और सरकार द्वारा उनकी जायज़ मांगों को मानने से इनकार करने से लोगों की नज़र में मोदी सरकार की विश्वसनीयता बहुत कम हो गई है। उन्होंने अपना विश्वास व्यक्त किया कि सरकार अंततः तीन किसान विरोधी कानूनों को निरस्त करने के लिए मजबूर होगी। उन्होंने बताया कि किसानों की समस्याओं का स्रोत तीस साल पहले शुल्क और व्यापार पर आम समझौता (गैट) पर हस्ताक्षर करके कृषि व्यापार को उदार बनाने का हिन्दोस्तान सरकार का निर्णय था। वैश्वीकरण और उदारीकरण के कार्यक्रम को पूरी तरह खतम करने की आवश्यकता है। नहीं तो सरकारें मौजूदा कानूनों के स्थान पर नए कानून बनाकर उसी किसान विरोधी एजेंडे को लागू करेंगी। संघर्ष केवल मोदी सरकार के ख़िलाफ़ नहीं था, बल्कि हर उस सरकार के ख़िलाफ़ था जो बड़े कॉरपोरेट घरानों के हितों की रक्षा मज़दूरों और किसानों की और जनता के हितों के ख़िलाफ़ काम करती है।

सभी आमंत्रित वक्ताओं ने आज हिन्दोस्तान में चल रहे संघर्ष के समर्थन में बात की।

दक्षिण रेलवे कर्मचारी संघ की ओर से आर. एलांगोवन जी ने किसान आंदोलन को अपना पूरा समर्थन देते हुए कहा कि किसानों की मांग हम सभी लोगों की मांग है। लोगों पर चौतरफा हमलों – किसान विरोधी कानूनों, श्रम संहिताओं, मूल्यवान सार्वजनिक संपत्तियों का मुद्रीकरण और निजीकरण, लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन – की गणना करते हुए उन्होंने इनसे निपटने के लिए मज़दूर-किसान एकता का आह्वान किया।

के.ई.सी. के गिरीश भावे जी ने निजीकरण के खतरों के सामने सभी क्षेत्रों के मज़दूरों की बढ़ती एकता का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि निजीकरण का विरोध करने वाले सभी मज़दूर यूनियनों और संगठनों को एक मंच पर लाने के लिए ऑल इंडिया फोरम अगेंस्ट प्राइवेटाइजेशन (ए.आई.एफ.ए.पी.) का गठन किया गया था। उन्होंने कहा कि यह अहसास बढ़ रहा है कि निजीकरण पूरी तरह से मज़दूरों, किसानों और हमारे सभी वर्गों के हितों के ख़िलाफ़ है और इसका विरोध किया जाना चाहिए।

ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ पावर डिप्लोमा इंजीनियर्स के श्री आर.के. त्रिवेदी जी ने सरकार को बिजली संशोधन अधिनियम 2021 के कार्यान्वयन को रोकने पर मजबूर करने के लिए किसान आंदोलन को बधाई दी। यह अधिनियम स्पष्ट रूप से किसानों के हितों के ख़िलाफ़ है और उन्होंने समझाया की इससे कृषि उत्पादन की लागत में वृद्धि होगी, आय घटेगी और किसानों के ऊपर कर्ज़ बढ़ेगा।

तमिलनाडु के किसान नेता श्री गोविंदस्वामी थिरुनावुकारसु जी ने बड़े इजारेदार पूंजीपतियों द्वारा हमारे प्राकृतिक संसाधनों की अप्रतिबंधित लूट की अनुमति देने और इस तरह पर्यावरण को नष्ट करने और हमारे लोगों को ख़तरे में डालने के लिए सरकार की आलोचना की। दिल्ली की सीमाओं पर और पूरे देश में किसानों के संघर्ष की सराहना करते हुए उन्होंने उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण के कार्यक्रम को हराने के उद्देश्य से संघर्ष छेड़ने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

इंडियन वर्कर्स एसोसिएशन (ग्रेट ब्रिटेन) के दलविंदर अटवाल ने किसान आंदोलन और बढ़ती मज़दूर-किसान एकता की सराहना की। उन्होंने कहा कि किसानों ने शासकों के झूठे प्रचार का भली-भांति पर्दाफाश किया है।

देश भगत स्पोर्ट्स क्लब एंड कल्चरल सोसाइटी, कनाडा के प्रवक्ता इकबाल सिंह सुंबल ने राज्य के हमलों का विरोध करने के लिए किसानों, मज़दूरों और हिन्दोस्तान में रहने वाले या विदेशो में रहने वाले सभी देशभक्त हिन्दोस्तानियों को एक मंच पर लाने के लिए एम.ई.सी. के प्रयास की सराहना की।

लोक राज संगठन के उपाध्यक्ष संजीवनी जी ने सवाल किया कि हमारे देश में किस तरह का लोकतंत्र है, जो सरकार को ऐसे कानूनों को पारित करने में सक्षम बनाता है जिनका लाखों लोगों द्वारा कड़ा विरोध किया जा रहा है। लोगों को सुख और रक्षा प्रदान करना राज्य का कर्तव्य है, उन्होंने मज़दूरों और किसानों को शासक बनने की, निर्णय लेने की और अपने भाग्य को अपने हाथों में लेने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

ग़दर इंटरनेशनल के सलविंदर ढिल्लों जी ने बताया कि शहीद भगत सिंह और उनके साथियों का – शोषण से मुक्त हिन्दोस्तान का सपना, चाहे शोषक ब्रिटिश हों या हिन्दोस्तानी या दोनों – अभी भी अधूरा है। उन्होंने कहा की आइए हम उस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए संघर्ष को आगे बढ़ाएं।

पुरोगामी महिला संगठन की शीना अग्रवाल ने आज किसान आंदोलन और संघर्ष के सभी मोर्चों पर महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की सराहना की। उन्होंने समझाया कि महिलाओं की मुक्ति का मार्ग पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ने, हमारे अधिकारों की रक्षा और सभी प्रकार के शोषण से मुक्त समाज में निहित है।

एम.ई.सी. के बिरजू नायक ने उन पार्टियों के ख़िलाफ़ आगाह किया जो इस लाइन को बढ़ावा दे रही हैं कि बीजेपी मुख्य दुश्मन है। भाजपा को मुख्य शत्रु के रूप में पहचानने का अर्थ है एक बार फिर से धोखा खाना और इस झूठी आशा से लोगों को धोखा देना कि भाजपा की जगह कांग्रेस पार्टी या कोई भाजपा विरोधी गठबंधन किसानों के हितों को आगे बढ़ाएगा। असली विकल्प मज़दूरों और किसानों के गठबंधन को मजबूत करना है, ताकि वह राजनीतिक सत्ता अपने हाथों में ले सके, इजारेदार पूंजीवादी कंपनियों और अन्य सभी निजी मुनाफ़ाखोरों द्वारा हमारे लोगों की लूट को समाप्त कर सके और सभी कामकाजी लोगों के लिए सुरक्षित आजीविका की गारंटी दे सके।

कई प्रतिभागियों ने अपने विचार रखे। उन्होंने इस बैठक के आयोजन में एम.ई.सी. की पहल की सराहना की और किसान आंदोलन की मांगों के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया। राजस्थान के शिक्षक और किसान नेता हनुमान प्रसाद शर्मा जी ने कहा कि सरकार सत्ताधारी पूंजीपति वर्ग के प्रबंधक के अलावा और कुछ नहीं है और यह उस एजेंडे को लागू करती है जो पूंजीपतियों द्वारा पहले ही तय किया जा चुका है। अन्य कार्यकर्ताओं ने बताया कि हमारे अधिकारों पर ये हमले लगातार होते रहे हैं, भले ही कोई भी सरकार सत्ता में रही हो। इसलिए केवल सरकार बदलने से समस्या का समाधान नहीं होगा। हमारा निशाना पूंजीपति वर्ग है। प्रतिभागियों ने शहीद भगत सिंह के मृत्युदंड, साहस और दृढ़ विश्वास को याद किया, जिनकी 114 वीं जयंती को पूरे देश में मज़दूरों और किसानों द्वारा एक दिन पहले मनाया गयी थी। एक युवा कार्यकर्ता ने किसानों के दृढ़ संकल्प और संघर्ष की भावना का जश्न मनाते हुए एक स्व-रचित कविता प्रस्तुत की।

सभी हस्तक्षेपों के अंत में, श्री जगजीत सिंह डल्लेवाल ने एक बार फिर चर्चा आयोजित करने के लिए एम.ई.सी. का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बैठक में शामिल सभी प्रतिभागियों से किसान आंदोलन के संदेश को देश के सभी हिस्सों में ले जाने और मज़दूरों और किसानों की एकता बनाने की अपील की।

सुचरिता जी ने सभी प्रकार के शोषण से मुक्त एक नए हिन्दोस्तान के लिए संघर्ष को आगे बढ़ाने, सभी के लिए सुख और रक्षा सुनिश्चित करने वाले मज़दूर-किसान शासन की स्थापना के लिए एक प्रेरक आह्वान के साथ बैठक का समापन किया।

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