पंजाब में गन्ना किसानों ने बकाया भुगतान और अपनी उपज के उच्च मूल्य के लिए आंदोलन किया

गन्ना मिलों के बढ़ते बकाये और कम (एस.ए.पी.) के ख़िलाफ़ पंजाब के दोआबा क्षेत्र के हजारों किसान 20 अगस्त से आंदोलन कर रहे हैं। एस.ए.पी. वह क़ीमत है जो मिल मालिक गन्ना किसान को उसकी उपज के लिए देता है।

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पंजाब के दोआबा क्षेत्र के गन्ना किसानों ने समय पर बकाये के भुगतान की मांग करते हुए हाईवे को रोक दिया

पंजाब के बटाला, गुरदासपुर, दीनानगर, पठानकोट, भोआ, होशियारपुर, भोगपुर और दसूया में गन्ने की खेती होती है। जालंधर में शुरू हुए इस विरोध प्रदर्शन में दोआबा और माझा क्षेत्र के गन्ना किसान सबसे आगे हैं। जालंधर-फगवाड़ा हाइवे की धनोवली रोड पर आंदोलन के पहले दिन 20,000 से अधिक किसानों ने धरना दिया और जुलूस निकाला। उन्होंने हाईवे के साथ-साथ रेलवे ट्रैक को भी बंद कर दिया।

मकसूदन बाईपास फ्लाईओवर से लेकर पी.ए.पी. चौक, जो जालंधर, अमृतसर और लुधियाना को जोड़ता है, उस पर यातायात ठप हो गया। जालंधर-फगवाड़ा हाईवे पर सैकड़ों ट्रक खड़े हो गये। पंजाब परिवहन निगम और पी.आर.टी.सी. की बसों को लिंक रोड का इस्तेमाल करना पड़ा है। धनोवली में रेल पटरियों पर धरने के कारण भारतीय रेल को 126 ट्रेनों को रद्द करने या दूसरे मार्ग पर भेजने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

आंदोलनरत गन्ना किसान मांग कर रहे हैं कि गन्ने का एस.ए.पी. मौजूदा 310 रुपये से बढ़ाकर कम से कम 400 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए।

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अपनी मांगों को लेकर गन्ना किसानों आंदोलन जारी है

दोआबा किसान यूनियन के अध्यक्ष कुलदीप सिंह के मुताबिक राज्य सरकार ने पिछले छह साल से गन्ने के लिए एस.ए.पी. की क़ीमत नहीं बढ़ाई है। उर्वरक, मज़दूरी, डीजल की क़ीमतों में वृद्धि हुई है। किसान हर साल सरकार को मांग पत्र दे रहे हैं, लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, “2017 में जब सरकार आई तो क़ीमत में सिर्फ 10 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी जबकि 20 का वादा किया था। इससे पहले अकालियों ने क़ीमत नहीं बढ़ाई थी, उसके बाद जब कांग्रेस पार्टी आई तब उन्होंने हर साल 10 रुपये से क़ीमत को बढ़ाने का वादा किया था। अगर वे हर साल इतना भी बढ़ा देते, तो हमें शिकायत नहीं होती। लेकिन अब ज़रूरत है कि गन्ने का एस.ए.पी. कम से कम 400 रुपये प्रति क्विंटल हो।” उन्होंने बताया कि “पिछले पांच वर्षों से किसानों का 2,000 करोड़ रुपये सरकार पर बकाया है और चीनी मिलों का 56 करोड़ रुपये का भी बकाया है”।

अन्य आंदोलनकारी किसानों ने पंजाब राज्य सरकार की ईमानदारी पर सवाल उठाया कि जो एक तरफ दिल्ली की सीमाओं पर किसान-विरोधी कानूनों का विरोध करने वाले किसानों के साथ एकजुटता का प्रदर्शन करती है, वही सरकार दूसरी तरफ गन्ना किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य मिले यह सुनिश्चित करने के लिए कुछ भी नहीं करती है। एस.ए.पी. को बढ़ाकर 400 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग के बारे में स्पष्टीकरण देते हुए किसानों ने बताया कि गन्ने की खेती पर किसान कम से कम 1 लाख रुपये प्रति एकड़ खर्च करते हैं।

दोआबा की सभी किसान यूनियनों  – दोआबा किसान यूनियन, भारतीय किसान संघ, दोआबा किसान संघर्ष समिति और माझा किसान संघर्ष समिति (एम.के.एस.सी.), विरोध के मुख्य आयोजक हैं। माझा किसान संघर्ष समिति (एम.के.एस.सी.) के 15,000 सदस्य विरोध प्रदर्शन में भाग ले रहे हैं। गुरदासपुर के किसान भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। संयुक्त किसान मोर्चा (एस.के.एम.) के तहत 32 किसान यूनियनों ने गन्ना किसानों के आंदोलन का समर्थन किया है।

सिंघु सीमा पर किसानों के 9 महीने के लंबे विरोध से प्रेरणा लेते हुए, विरोध प्रदर्शन के लिए जालंधर आये एस.के.एम. नेता बलजीत सिंह ने कहा कि “सिंघु मोर्चा देश के लिए है, लेकिन यह विरोध पंजाब के लिए है। मोर्चा (एस.के.एम.) गन्ना खेती की चिंताओं को उठा रहा है और एस.ए.पी. में उचित बढ़ोतरी की मांग कर रहा है। लगातार आई सरकारों ने एस.ए.पी. को हर साल 15-20 रुपये बढ़ाने का वादा किया था। लेकिन वादा अभी तक पूरा नहीं हुआ है। कल गुरदासपुर में हमारा काफिला 2-3 किलोमीटर लंबा था। किसान जानते हैं कि अगर वे एक हो गए तो उन्हें वादा किए गए दाम मिलेंगे।”

एम.के.एस.सी. के अध्यक्ष बलविंदर सिंह राजू ने मीडिया से कहा कि “व्यास नदी माझा और दोआबा के बीच बहती है। उस क्षेत्र में गन्ने के अलावा कोई अन्य फ़सल नहीं उगती। हर साल वहां बाढ़ आती है। वे (सरकारें) हमें बाढ़ के लिए पर्याप्त मुआवज़ा नहीं देती। हम विविधता लाना चाहते हैं, लेकिन हमारे लिए कोई न्यूनतम समर्थन मूल्य (एम.एस.पी.) नहीं है। मक्के का एम.एस.पी. 1,800 रुपये है, लेकिन यह महज 800-900 रुपये में बिकता है। मूंग का एम.एस.पी. 7,500 रुपये है, लेकिन व्यापारी केवल 4,000 रुपये देते हैं। दाल एम.एस.पी. पर बिकती ही नहीं है। वे सब कुछ कॉर्पोरेटों को देना चाहते हैं। यह शर्मनाक है कि वे गन्ने के लिए भी एस.ए.पी. का भुगतान नहीं करते हैं। जिस भाव मांग हम कर रहे हैं, वह हरियाणा के बराबर है जहां गन्ने का दाम कम से कम 363 रुपये से 383 रुपये प्रति क्विंटल है। फिलहाल 310 रुपये के एस.ए.पी. मिलने से हमें 50-70 रुपये का नुकसान हो रहा है। 2017 में हमने मनप्रीत बादल के साथ बैठक की थी और उन्होंने उस साल 10 रुपये और हर साल नियमित बढ़ोतरी का वादा किया था। लेकिन अब वे कहते हैं कि उनके पास पैसे नहीं हैं।”

महिलाओं ने विरोधकर्ताओं के लिए भोजन और अन्य आवश्यक वस्तुओं को पूरा करते हुये, बड़ी संख्या में विरोध प्रदर्शन में भाग लिया है। अपने आंदोलन को लंबे समय तक चलाने की तैयारी कर रहे प्रदर्शनकारी गन्ना किसानों ने विरोध स्थल पर टेंट और शौचालय बना लिए हैं। वे तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक कि सरकार उनकी मांगों को स्वीकार नहीं करती।

आस-पास के क्षेत्रों के लोग भोजन, पानी, तंबू आदि की आपूर्ति कर रहे हैं और  तहे दिल से आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी किसानों ने रक्षाबंधन के दिन रास्ते खोल दिए, ताकि लोग त्योहार के अवसर पर मिल सकें।

राज्य सरकार और गन्ना किसानों के बीच 22 अगस्त को वार्ता हुई लेकिन इससे किसानों की मांगों का कोई समाधान नहीं निकला। आंदोलनकारी गन्ना किसान यूनियनों ने अपना विरोध जारी रखने के लिए दृढ़ संकल्प किया है और घोषणा की है कि जब तक राज्य सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती, तब तक हाईवे और रेल नाकाबंदी जारी रहेगी।

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