हरियाणा में किसान-विरोधी कानूनों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन

Black-flag-protestकिसान-विरोधी कानूनों के ख़िलाफ़ आन्दोलन के चलते, 11 जुलाई को हरियाणा में किसानों ने कई विरोध प्रदर्शन किये। किसानों ने इससे पहले ही अपना फ़ैसला घोषित कर दिया था कि वे अपनी मांगों को उठाने के लिए राज्य सरकार द्वारा आयोजित सभी कार्यक्रमों पर धरना-प्रदर्शन करेंगे।

रिपोर्टों के अनुसार, सिरसा में प्रदर्शनकारी किसानों ने हरियाणा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर रणबीर सिंह गंगवा का घेराव किया था।

हरियाणा सरकार ने पांच किसानों को गिरफ़्तार कर लिया और उन पर राज्द्रोह का आरोप लगा दिया। इसके जवाब में हजारों-हजारों किसानों ने सचिवालय, चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय और भगत सिंह स्टेडियम को जाने वाली सभी सड़कों को रोक दिया। संयुक्त किसान मोर्चा के कई नेता किसानों को संबोधित करने के लिए आये और उन सभी ने पांचों किसानों की रिहाई के लिए संघर्ष को तेज़ करने का वादा किया। संयुक्त किसान मोर्चा के नेता बलदेव सिंह सिरसा उनकी रिहाई की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठ गए। अंत में, 21 जुलाई को सरकार ने गिरफ़्तार किये गए पांचों किसानों को रिहा कर दिया।

Sirsa_Chakka-jamफतेहाबाद में आन्दोलनकारी किसानों ने एक सरकारी कार्यक्रम पर प्रदर्शन किया, जिसमें हरियाणा सहकार्य मंत्री बनवारी लाल और सिरसा के सांसद सुनीता दुग्गल सभा को संबोधित करने वाले थे। भारी पुलिस बैरिकेड का मुक़ाबला करते हुए, किसानों ने अपनी मांगों के लिए नारे लगाये।

झज्झर जिले में, आंदोलित किसानों ने काले झंडों के साथ एक सरकारी कार्यक्रम पर प्रदर्शन किया, जिसे राज्य के भाजपा नेता ओ.पी. धनकर संबोधित करने वाले थे। उन्होंने कार्यक्रम को रोक दिया और अपने नारों से यह साफ कर दिया कि जब तक किसानों की मांगें पूरी नहीं की जाएंगी, तब तक वे किसी भी सरकारी प्रोग्राम को क़ामयाब नहीं होने देंगे।

अम्बाला जिले में किसानों ने अम्बाला-साहा रोड पर एक सरकारी कार्यक्रम में विरोध प्रदर्शन किया। पानीपत में पुलिस ने प्रदर्शनकारी किसानों को गिरफ़्तार कर लिया परन्तु किसानों के विरोध के चलते, उन्हें जल्दी ही रिहा करना पड़ा। सरकार के प्रति अपना गुस्सा दर्शाने के लिए किसानों ने पंजाब के गुरदासपुर जिले के डेरा बाबा नानक से दिल्ली के सिंघु बॉर्डर तक ट्रेक्टर और अन्य वाहनों के साथ मार्च किया।

किसान तीनों कानूनों को रद्द करवाने के लिए और सभी कृषि उत्पादों के लाभकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी देने वाले कानून के लिए अपने संघर्ष पर टिके हैं।

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