उत्तराखंड के ऊर्जा कर्मचारियों की हड़ताल सफल

उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यू.जे.वी.एन.एल.) के तहत तीनों निगमों के लगभग 3500 कर्मचारियों ने 26 जुलाई की आधी रात से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। यह हड़ताल विद्युत अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर आयोजित की गयी थी। हड़ताल की वजह से सम्पूर्ण उत्तराखंड राज्य में बिजली का उत्पादन, प्रसारण और वितरण 27 जुलाई को पूरी तरह ठप्प रहा।

Uttarakhand_electricity_workersबिजली कर्मचारी इसलिए हड़ताल करने को मजबूर हुए क्योंकि राज्य सरकार उनकी 14 सूत्रीय मांगों को मानने से बार-बार इंकार करती रही है। राज्य के ऊर्जा सचिव से जब 26 जुलाई के दिन भी बातचीत विफल हो गई तब कर्मचारियों ने हड़ताल पर जाने का यह क़दम उठाया। कर्मचारी मांग कर रहे हैं कि सुनिश्चित पदोन्नति (ए.सी.पी.) की पुरानी व्यवस्था को बहाल किया जाये, जिसके अनुसार 9, 5 और फिर 5 साल की सेवा के बाद पदोन्नति की जाती थी। बिजली निगमों में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के समय इस व्यवस्था को वापस लिया गया था। हड़ताली कर्मचारी यह भी मांग कर रहे हैं कि उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड (उपनल) के सभी संविदा कर्मचारियों को नियमित किया जाये। समान कार्य के लिए समान वेतन तथा बिजली क्षेत्र में निजीकरण का विरोध आदि, और भी कई महत्वपूर्ण मांगें इनमें शामिल हैं।

UK-5_400हड़ताली कर्मचारियों को डराने-धमकाने के लिए, उत्तराखंड प्रशासन ने 26 जुलाई को ऊर्जा विभाग में हड़ताल पर रोक के आदेश जारी कर दिए। 6 महीने के लिए यू.पी.सी.एल. और यू.जे.वी.एन.एल., पिटकुल में हड़ताल पर रोक के आदेश दिए गए। साथ ही प्रशासन ने यह भी घोषित की है कि सरकार ने ‘बैक अप प्लान’ बना लिया है जिससे बिजली सप्लाई सुचारू रूप से सुनिश्चित की जाएगी। परन्तु जुझारू कर्मचारियों ने ऐलान कर दिया कि जब तक सारी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। सरकार की धमकियों से न तो कर्मचारियों का हौसला टूटा और न ही बिजली सप्लाई जारी रही।

पूरे राज्य में सभी बिजली कर्मचारियों ने काम रोककर मुख्यालयों पर दिन-भर जोशीला प्रदर्शन जारी रखा। उनकी इस दृढ़ एकता की वजह से ठेकेदार के भरोसे छोड़ा गया बिजली सिस्टम पूरी तरह चैपट हो गया। बैक अप प्लान के नाम पर की गई व्यवस्थाए औंधे मुंह गिरी नज़र आई। पूरे राज्यभर में पावर सप्लाई सिस्टम बुरी तरह बाधित हुआ जिसका बुरा असर उद्योगों पर भी पड़ा।

Uttarakhand_electricity_workersकई वर्षों से कर्मचारी अपनी मांगों को उठाते आ रहे हैं मगर सरकार ने उन्हें अनसुना कर दिया है। मगर अब की बार कर्मचारियों की इस एकता को देखकर केवल एक दिन में ही सरकार को झुकना पड़ा। 27 जुलाई की शाम को राज्य के ऊर्जा मंत्री ने खुद संयुक्त मोर्चा के प्रतिनिधियों से बातचीत की। सबसे पहले उन्होंने आश्वासन दिया कि हड़ताल के दौरान न तो किसी कर्मचारी का वेतन काटा जाएगा और न ही किसी हड़ताली कर्मचारी पर कोई कार्रवाई की जाएगी। सभी मांगों के जल्द समाधान का आश्वासन दिया गया। तीनों निगमों के निजीकरण पर रोक लगाने की कर्मचारियों की मांग के सिलसिले में ऊर्जा मंत्री को कर्मचारियों के गुस्से से खुद को बचाने के लिए यह कहना पड़ा कि “प्रशासन स्तर पर ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है”।

वार्ताओं के दौरान, वार्ताकक्ष के बाहर प्रदेशभर से आये कर्मचारी अपनी मांगों के नारे लगाते रहे और आंदोलन में जोश भरते रहे। देर रात तक कर्मचारी धरने पर बैठे रहे।

देशभर में बिजली कर्मचारी और किसान बिजली कानून सुधार विधेयक 2021 के ज़रिये बिजली क्षेत्र के तेज़ गति से किये जा रहे निजीकरण का विरोध कर रहे हैं। इस संघर्ष के चलते, उत्तराखंड के सभी बिजली कर्मचारियों का यह एकजुट संघर्ष निश्चय ही बहुत स्फूर्तिदायी है। हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी इस संघर्ष का पूरा समर्थन करती है और देशभर के लोगों को आह्वान करती है कि सभी इसे अपना पुरजोर समर्थन दें।

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