जबरन वी.आर.एस. लेने के विरोध में प्रदर्शन

आदित्य बिरला समूह की सेंचुरी टेक्सटाइल्स एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड की मालिकी और प्रबंधन वाली सेंचुरी यार्न और सेंचुरी डेनिम मिल्स के मज़दूर 12 जुलाई से मध्य प्रदेश के खारगौन जिले में स्थित कारख़ाने में भूख हड़ताल पर हैं। यह मिल राज्य की राजधानी भोपाल से लगभग 290 किलोमीटर दूर स्थित है।

Century_Mills_hunger_strike_400.jpg July 23, 2021

आदित्य बिरला समूह द्वारा 84 एकड़ में फैली इस फैक्ट्री को पहली बार 2017 में कोलकाता स्थित कंपनी वेयरिट ग्लोबल लिमिटेड को कौड़ियों के दाम पर बेचा गया था (बॉक्स देखें: विरोध की पृष्ठभूमि)। नई कंपनी ने बाद में इस मिल को बंद कर दिया, जिससे कारखाने के 900 से अधिक मज़दूर रातों-रात बेरोज़गार हो गए।

पिछले लगभग 4 वर्षों से लेकर, आज तक, कोविड-19 महामारी से पहले और उसके दौरान भी, सेंचुरी मिल के मज़दूर मिल को बंद करने और अपनी आजीविका पर ख़तरे का विरोध कर रहे हैं।

अदालती लड़ाई के बाद मिल बंद होने के बाद भी मज़दूरों को वेतन मिल रहा था। लेकिन 29 जून को कंपनी ने एक आदेश जारी किया। आदेश में कहा गया कि सभी मज़दूरों को वी.आर.एस. (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना) लेना होगा और उसके लिए 13 जुलाई अंतिम तिथि रखी।

कंपनी द्वारा वी.आर.एस. लगाने के फैसले का मज़दूर विरोध कर रहे हैं। कंपनी प्रबंधन ने मनमाने ढंग से उनके बैंक खातों में वी.आर.एस. की एक छोटी राशि भेज दी है और उन्हें मिल परिसर स्थित अपने घर खाली करने का आदेश दिया है। अपने वेतन के अचानक बंद हो जाने से सभी मज़दूर हताश और एक अत्यंत अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहे हैं। श्रमिक जनता संघ (एस.जे.एस.) के बैनर तले संगठित मज़दूरों ने कंपनी के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए इसे “औद्योगिक नियमों का घोर उल्लंघन“ बताया है।

विरोध करने वाले मज़दूरों को जिला प्रशासन की ओर से लगातार धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें विरोध प्रदर्शन को वापस लेने का आदेश दिया गया है, जिसे निषेधात्मक आदेशों – महामारी की स्थिति में लागू धारा 144 – के तहत “अवैध” घोषित किया गया है। पुलिस बार-बार हड़ताल खत्म करने के लिए मज़दूरों को डराने-धमकाने की कोशिश कर रही है। 17 जुलाई को पुलिस ने इस धमकी के तहत भूख हड़ताल पर बैठे कई प्रदर्शनकारी मज़दूरों को गिरफ़्तार कर लिया था।

सेंचुरी मिल मज़दूरों का, जबरन वी.आर.एस. थोपने और उनकी नौकरी को खत्म किए जाने के खिलाफ संघर्ष, आजीविका के अधिकार के लिए संघर्ष है। यह पूरी तरह से जायज़ संघर्ष है।

विरोध की पृष्ठभूमि

2017 में आदित्य बिरला समूह ने लगभग 100 करोड़ रुपये का नुकसान दिखाते हुए मिल, भवन, मशीनरी आदि को वेयरिट ग्लोबल लिमिटेड को 2.5 करोड़ रुपये में बेच दिया था। इससे ठीक एक हफ्ते पहले कंपनी ने प्रस्तावित बिक्री का विरोध कर रहे मज़दूरों से वादा किया था कि वह कंपनी को नहीं बेचेगी।

17 मई, 2018 को, औद्योगिक न्यायाधिकरण न्यायालय ने मज़दूरों के पक्ष में आदेश पारित किया और आदित्य बिरला समूह और वेरिट ग्लोबल लिमिटेड के बीच बिक्री समझौते को रद्द कर दिया था।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने बाद में न्यायाधिकरण न्यायालय के फैसले को बरक़रार रखा और आदेश दिया कि मई 2018 से मज़दूरों के वेतन का भुगतान किया जाए। लेकिन 15 जुलाई 2021 को आदित्य बिरला समूह ने मज़दूरों को मरने के लिए छोड़ते हुए फैक्ट्री को मंजीत ग्लोबल को बेच दिया।

 

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