बिजली क्षेत्र के मज़दूरों का देशव्यापी प्रदर्शन

19 जुलाई, 2021 को, संसद के मानसून सत्र के पहले दिन पर, बिजली क्षेत्र के मज़दूरों ने देशव्यापी प्रदर्शन किया। इसमें 20 लाख से अधिक बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों में से 60 प्रतिषत से अधिक ने हिस्सा लिया। यह प्रदर्शन दो घंटे चला।

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प्रदर्शन की अगुवाई नेशनल कोर्डिनेशन कमेटी ऑफ़ इलेक्ट्रीसीटी इम्प्लाईज एंड इंजीनियर्स (एन.सी.सी.ओ.ई.ई.ई.) ने की। प्रदर्शन के बाद हड़ताल के नोटिस की घोषणा की गई। घोषित नोटिस में कहा गया कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं की जाती हैं तो देश भर में बिजली क्षेत्र के मजदूर 10 अगस्त को एक दिन के लिए काम का बहिष्कार करेंगे। मांगों में बिजली (संशोधन) विधेयक, 2021 को रद्द करना शामिल है, जिसे चालू मानसून सत्र के दौरान संसद में पेश किया जाएगा। संशोधन विधेयक को रद्द करने के साथ-साथ, मज़दूरों की मांग है कि बिजली क्षेत्र में सभी मौजूदा निजी लाइसेंसों और फ्रेंचाइजियों को रद्द किया जाये और राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बिजली के निजीकरण की प्रक्रिया को तुरंत रोका जाये।

विद्युत अधिनियम में किए जाने वाले संशोधन में बिजली वितरण व्यवसाय को लाइसेंस मुक्त करने का प्रयास है। इसका परिणाम देश भर में बिजली वितरण के निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा। यह प्रक्रिया पहले से ही कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (यू.टी.) में चालू हो चुकी है। एन.सी.सी.ओ.ई.ई.ई. ने इस बात को सामने रखा कि विद्युत (संशोधन) बिल का उद्देश्य निजी पूंजीपति इजारेदारों के लिए अधिकतम मुनाफे सुनिश्चित करना है। बिजली वितरण व्यवसाय को निजी कंपनियों के लिए खोलने से आम उपभोक्ता के लिए बिजली के दाम बढ़ जाएंगे।

10 अगस्त की हड़ताल के लिए बिजली क्षेत्र के मज़दूरों को तैयार करने के लिए समन्वय समिति योजना बना रही है। इस बीच, उन्होंने 25 जुलाई से 9 अगस्त तक एक देशव्यापी अभियान शुरू करने की योजना बनाई है। बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों का एक प्रतिनिधिमंडल 27 जुलाई को केंद्रीय बिजली, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आर. के. सिंह से मिलने और अपनी मांगों को रखने के लिए दिल्ली की यात्रा करने वाला है।

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