क्यूबा में अराजकता व हिंसा फैलाने के अमरीकी साम्राज्यवाद के प्रयासों की निंदा करें

अमरीकी साम्राज्यवाद ने क्यूबा की सरकार का तख़्ता पलट करने के अपने प्रयासों को एक बार फिर तेज़ कर दिया है। इसका उद्देश्य क्यूबा के लोगों पर दुबारा से अपने नव औपनिवेशिक शासन को स्थापित करना है।

11 जुलाई को “मानवीय सहायता” और “अंतर्राष्ट्रीय सहायता” के लिए “मुक्त गलियारा” खोलने की मांग को लेकर क्यूबा के कई शहरों में एक साथ विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए थे। कुछ उग्र भीड़ के छोटे समूहों ने सार्वजनिक संपत्ति पर हमला करते हुए कई जगहों पर अराजकता और हिंसा फैलाई।

साथ ही, अमरीकी साम्राज्यवाद नियंत्रित अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने क्यूबा की सरकार के ख़िलाफ़ उन्हें बदनाम करने का अभियान शुरू कर दिया। बड़े पैमाने पर दुष्प्रचार का इस्तेमाल किया गया। यह दिखाने के लिए कि क्यूबा के लोग अपनी सरकार के ख़िलाफ़ विद्रोह कर रहे थे। उसी दिन क्यूबा में सरकार के समर्थन में हुई रैलियों तस्वीरों और दस साल पहले मिस्र में हुये सरकार विरोधी प्रदर्शनों की तस्वीरों को दिखाकर यह बताया गया कि क्यूबा के लोग अपनी सरकार के ख़िलाफ़ विद्रोह कर रहे हैं। क्यूबा की सरकार पर यह झूठा आरोप लगाया जा रहा है कि वह अपने लोगों को भोजन, दवाइयों, बिजली और अन्य आवश्यक चीजों से वंचित कर रही है। क्यूबा को एक तानाशाही राज्य और मानवाधिकारों के उल्लंघनकर्ता के रूप में दर्शाया जा रहा है और उसकी निंदा की जा रही है। अमरीकी राष्ट्रपति बाइडन ने अपने देश का समर्थन प्रदर्शनकारियों को देते हुए दावा किया है कि वे लोकतंत्र और मानवाधिकारों के लिए लड़नेवाले योद्धा हैं। मियामी, फ्लोरिडा के मेयर ने क्यूबा पर बमबारी सहित प्रदर्शनकारियों के समर्थन में अमरीकी सैन्य हस्तक्षेप का आह्वान किया है।

यह पूरी तरह से स्पष्ट हो गया है कि अमरीकी साम्राज्यवादियों ने क्यूबा के अंदर अपने एजेंटों के नेटवर्क को सक्रिय कर दिया है। उनका उद्देश्य क्यूबा की सरकार के ख़िलाफ़ असंतोष फैलाना है। वे हिंसा और अराजकता फैलाकर, अमरीकी सैन्य हस्तक्षेप के लिए परिस्थितियां बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वे मानवीय सहायता प्रदान करने और मानवाधिकारों की रक्षा के नाम पर अपनी आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी क्यूबा के आंतरिक मामलों में अमरीकी सरकार के क्रूर हस्तक्षेप और क्यूबा की सरकार का तख़्ता पलट करने के अमरीका के घृणित प्रयासों की निंदा करती है।

पिछले डेढ़ साल से अधिक समय से क्यूबा अभूतपूर्व आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहा है। अमरीका द्वारा लगाई गई आर्थिक नाकेबंदी का और कड़ा होने की वजह से क्यूबा को इन मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ट्रम्प शासन ने क्यूबा को आवश्यक विदेशी मुद्रा से वंचित करने के लिए कई क़दम उठाए थे। इसमें अमरीका में रह रहे क्यूबा के लोग जो अपने घर पैसे भेजते थे उनपर पैसे भेजने पर रोक लगाना भी शामिल था। इसमें क्यूबा जाने वाले अमरीकी और अन्य पर्यटकों पर गंभीर प्रतिबंध भी शामिल थे। क्यूबा को अपनी अर्थव्यवस्था चलाने के लिए आवश्यक विदेशी मुद्रा से वंचित रखा गया है। क्यूबा पर अपने लोगों के लिए आवश्यक दवाओं या अन्य आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चे माल के आयात पर भी रोक लगाई गई है। वे लोगों की ज़रूरतों की आवश्यक वस्तुओं और खाने के उत्पादन, बिजली के उत्पादन, वस्तुओं के उत्पादन तथा निर्यात के लिए आवश्यक मशीनरी का आयात नहीं कर पा रहे हैं। बाइडन सरकार ने इन क़दमों को जारी रखा है।

क्यूबा की अर्थव्यवस्था पर कोविड महामारी का विनाशकारी प्रभाव पड़ा है। उनके ख़िलाफ़ अमरीकी प्रतिबंधों के डर से किसी भी देश ने क्यूबा को टीके उपलब्ध नहीं कराए हैं। इन स्थितियों में, क्यूबा ने अपने स्वयं के टीके विकसित किए हैं और अपनी आबादी को टीका लगाना शुरू कर दिया है।

क्यूबा के लोगों के सामने आ रहे मानवीय संकट के लिए अमरीकी साम्राज्यवाद ज़िम्मेदार है। वह क्यूबा के लोगों के सामने आने वाली गंभीर कठिनाइयों के लिए ज़िम्मेदार है। वे इन कठिनाइयों का फ़ायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि वे क्यूबा को झुकाकर अपने अधीन कर सकें।

क्यूबा के लोगों और सरकार ने सुनिश्चित किया है कि अमरीका अपने लक्ष्य में सफल न हो। उन्होंने अमरीका और उसके एजेंटों को मुंहतोड़ जवाब दिया है। जब प्रतिक्रांतिकारियों ने अमरीका के आह्वान पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए, तभी क्यूबा के लोग अपनी सरकार की रक्षा के लिए अपने राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल बरमूडेज के आह्वान पर सड़कों पर आ गए। उन्होंने अमरीका की नाकेबंदी की निंदा की और अपने देश और व्यवस्था की रक्षा करने का संकल्प लिया। उन्होंने विरोध करने वालों का सामना किया और अमरीकी एजेंटों द्वारा गुमराह किए गए लोगों को समझाया कि वे गलत क्यों थे।

Cuba_Havana_Mass_Rally_Defence_Revoluti_on_3x511 जुलाई को क्यूबा के राष्ट्रपति ने अपने देश के लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि, “हम अपने लोगों की संप्रभुता, स्वतंत्रता और देश की स्वतंत्रता को ख़त्म नहीं होने देंगे। इस शहर में हम बहुत से क्रांतिकारी हैं जो अपनी जान देने को तैयार हैं और यह कोई नारा नहीं है, यह एक दृढ़ संकल्प है। अगर वे क्रांति से मुकाबला करना चाहते हैं तो उन्हें हमारी लाशों पर से गुजरना होगा, हम कुछ भी करने के लिए तैयार हैं और हम सड़कों पर लड़ेंगे।” क्यूबा की स्वतंत्रता और संप्रभुता की रक्षा के लिए 17 जुलाई को क्यूबा की राजधानी हवाना में एक विशाल रैली आयोजित की गई थी।

क्यूबा सरकार ने बताया कि कैसे अमरीकी राज्य ने “मानवीय सहायता” के नाम पर तथाकथित स्वतः स्फूर्त विरोध का आयोजन किया। अमरीकी सरकार द्वारा प्रायोजित संगठनों ने जनसंचार के आधुनिक उपकरणों का उपयोग करके क्यूबा में लाखों लोगों को एक साथ स्वचालित संदेश भेजे। इन संदेशों में लोगों की स्थितियों के प्रति क्यूबा सरकार के लापरवाह रवैये की निंदा की गई और एक विशेष समय और तारीख पर विरोध प्रदर्शन करने का आह्वान किया गया। लोगों से इस बात को छुपाया गया कि ये संदेश अमरीकी खुफिया एजेंसियों द्वारा भेजे गये हैं। इसके बजाय ऐसा दिखाया गया कि ये संदेश क्यूबा के सामान्य नागरिकों से आए हैं। ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया ने जानबूझकर अपने नियमों का उल्लंघन करते हुए ऐसा होने दिया।

अमरीकी साम्राज्यवाद अपने पूर्व स्वर्ग, क्यूबा में अपनी हार को कभी स्वीकार नहीं कर पाया है। 1959 तक क्यूबा अमरीका की एक नव-उपनिवेशित बस्ती थी, जब क्यूबा के लोग क्रांति के लिये उठे और अमरीकी साम्राज्यवादियों को क्यूबा से बाहर निकाल फेंका। तब से पिछले 62 वर्षों से अमरीकी साम्राज्यवाद क्यूबा पर अपने शासन को फिर से स्थापित करने की हर संभव कोशिश करता आ रहा है। इन कोशिशें में सैन्य आक्रमणों का आयोजन, लोगों के बीच अशांति को भड़काना और साथ-साथ फिदेल कास्त्रो और क्यूबा के अन्य नेताओं की हत्या के सी.आई.ए. द्वारा किये गये सैकड़ों प्रयास शामिल हैं। क्यूबा और उसके लोगों को अपने घुटनों पर लाने के प्रयास में, 60 से अधिक वर्षों से अमरीका ने क्यूबा पर बर्बर आर्थिक प्रतिबन्ध लगाए हैं। अमरीकी सरकार के एक उच्च अधिकारी लेस्टर डीण मैलोरी ने 6 अप्रैल, 1960 को लिखा था कि, “क्यूबा के आर्थिक जीवन को कमजोर करने के लिए हर संभव उपाय तुरंत किए जाने चाहिए। क्यूबा को धन और आपूर्ति से वंचित करना, मौद्रिक और वास्तविक मज़दूरी का स्तर गिराना, भूख और हताशा फैलाना और सरकार को उखाड़ फेंकना।” अमरीका ने हाल के वर्षों में क्यूबा पर प्रतिबंध तेज़ कर दिए हैं। लेकिन इन सबके बावजूद वे अपने मक़सद में सफल नहीं हो पाए हैं। इसके विपरीत, अपने साम्राज्यवादी उद्देश्यों को पूरा करने के लिए लोगों की स्वतंत्रता और संप्रभुता का बेशर्मी से हनन करने वाले राज्य बतौर अमरीका का पर्दाफ़ाश हुआ है।

क्यूबा पर लगाए अन्यायपूर्ण नाकेबंदी की दुनिया के अधिकांश देशों ने निंदा की है। अभी हाल ही में, 23 जून को संयुक्त राष्ट्र संघ महासभा ने भारी बहुमत से अमरीका को क्यूबा से नाकेबंदी समाप्त करने का आह्वान किया। 184 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। केवल दो देषों अमरीका और इस्राइल ने इसके ख़िलाफ़ मतदान किया। यह लगातार 29वां वर्ष है जब संयुक्त राष्ट्र संघ महासभा ने क्यूबा में नाकेबंदी को समाप्त करने का आह्वान किया है। लेकिन फिर भी अंतर्राष्ट्रीय राय की अवहेलना करते हुए, अमरीका ने नाकेबंदी को जारी रखा है तथा उसे और कड़ा कर दिया है।

क्यूबा के लोगों के साम्राज्यवाद-विरोधी साहसी रुख़ को दुनिया की सभी साम्राज्यवाद-विरोधी ताक़तों का समर्थन प्राप्त है। संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रस्तावों और देशों के बीच संबंधों को नियंत्रित करने वाले सभी अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों के खुले उल्लंघन में क्यूबा की अमानवीय नाकेबंदी को तुरंत समाप्त किया जाना चाहिए। अमरीकी साम्राज्यवाद को यह तय करने का कोई अधिकार नहीं है कि क्यूबा के लोगों के पास किस तरह की आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था होनी चाहिए। क्यूबा के लोगों को साम्राज्यवादी हुकूमत से मुक्त अपनी पसंद की आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था चुनने का पूरा अधिकार है।

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