मध्यप्रदेश में नर्सों की हड़ताल जारी

5 जुलाई, 2021 को मध्यप्रदेश में नर्सों की हड़ताल के छः दिन पूरे हो गए। वेतन बढ़ोतरी सहित अन्य लंबित मांगों को लेकर शुरू हुई हड़ताल, धीरे-धीरे पूरे प्रदेश में फैल गई है। हड़ताल की अगुवाई राज्य नर्सेस एसोसिएशन मध्यप्रदेश और प्रान्तीय नर्सेस एसोसियेशन कर रही हैं।

गौरतलब है कि मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित हमीदिया अस्पताल की 300 और सुल्तानियां अस्पताल की 100 नर्सों ने प्रशासन द्वारा अपनी मांगों को न माने जाने पर 28 जून को एक दिन के सामूहिक अवकाश पर जाने का ऐलान किया था। वे 28 जून की सुबह हमीदिया अस्पताल के नर्सेस अधीक्षक कार्यालय के सामने एकत्रित हुईं। हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक और गांधी मेडिकल कॉलेज के डीन के आश्वासन के बाद नर्सें काम पर लौट गई थीं। इसके एक दिन बाद, 30 जून से उन्होंने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी।

बीते कई महीनों से मध्यप्रदेश की नर्सों ने अपनी मांगों को लेकर कई बार सरकार और प्रशासन को अवगत कराया है। नर्सों के संगठनों ने शांतिपूवर्क ढंग से अलग-अलग तरीके से अपनी मांगों को लेकर अपना विरोध जताया है। लेकिन सरकार और प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। अंत में, नर्सों को मजबूरन हड़ताल पर उतरना पड़ा है।

ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, सागर, इंदौर सहित पूरे प्रदेश में अस्पताल की नर्सें हड़ताल पर हैं। इंदौर स्थित महाराजा यशवंत राव अस्पताल पर रोज़ चल रहे प्रदर्शन में, नेशनल हेल्थ मिशन (एन.एच.एम.) की नर्सें भी शामिल हो रही हैं। इससे पहले राधा स्वामी सेंटर सहित अन्य अस्पतालों की 150 से ज्यादा नर्सें भी हड़ताल के समर्थन में आगे आ गईं।

सरकार नर्सों की जायज़ मांग को मानने की जगह पर हड़ताल को तोड़ने के लिए नर्सों के बीच गुटबाजी को हवा दे रही है। सरकार नर्सिंग की पढ़ाई कर रहे अनुभवहीन छात्रों से काम चला रही है।

नर्सें अपनी मांगों को लेकर अपने-अपने अस्पताल के गेट के सामने बड़ी बहादुरी से प्रदर्शन कर रही हैं। प्रदर्शन में नर्सों ने कोरोना वॉरियर्स सम्मान को लहरा-लहराकर सरकार के खि़लाफ़ नारेबाजी की और इस सम्मान को राज्य के मुख्यमंत्री को लौटाने की धमकी दी।

हड़ताली नर्सों की मुख्य मांगें हैं कि पुरानी पेंशन स्कीम लागू की जाये; कोरोना काल में काम करने वाली नर्सों को दो वेतन वृद्धि दी जाए; भर्ती नियमों में मांगे गए संशोधन किये जायें; सेवारत नर्सों को उच्च शिक्षा की सुविधा दी जाये; सातवें वेतन आयोग के लाभ सभी नर्सों को समान रूप से मिलें; कोरोना काल में शहीद हुए नर्सिंग स्टाफ के परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति देने के साथ राष्ट्रीय कोरोना योद्धा अवार्ड से सम्मानित किया जाए; और मेल नर्स की भर्ती भी तत्काल की जाए।

नर्सों के अडिग संघर्ष की वजह से स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारी स्टेट नर्सेस एसोसियेशन और प्रान्तीय नर्सेस एसोसियेशन के पदाधिकारियों को वार्ता के लिये बुलाने को मज़बूर हुये हैं।

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