कृषि विरोधी अध्यादेशों के एक साल बाद :

कृषि विरोधी कानूनों को रद्द करने के लिए किसानों का संघर्ष जारी है!

5 जून, 2021 को दिल्ली की सीमाओं पर तथा देश के अनेक स्थानों पर आंदोलित किसानों ने अपने एक साल भर के संघर्षों को याद किया और अपने संकल्प को दोहराया कि उनका संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक तीनों किसान-विरोधी क़ानून रद्द नहीं किये जायंगे। किसानों ने इस दिन को “सम्पूर्ण क्रांति दिवस” के रूप में मनाया। विदित है कि ठीक एक साल पहले, 5 जून, 2020 को केंद्र सरकार ने किसान-विरोधी अध्यादेश पारित किये थे, जिन्हें आगे चलकर, देशभर के किसानों के भारी विरोध के बावजूद, सितम्बर में क़ानून बना दिया गया था।

इस अवसर पर राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले की उप-तहसील रामगढ़ में लोक राज संगठन और संघर्ष समिति रामगढ़ के झंडे तले, भारी संख्या में किसानों ने इकट्ठे होकर प्रदर्शन किया और इन काले कानूनों की प्रतियों को जलाया। गगनभेदी नारों के साथ केंद्र सरकार से अपनी मांगों को मनवाने के लिए, आंदोलित किसानों ने आंदोलन को और तेज़ करने का संकल्प लिया।

लोक राज संगठन के सर्व हिंद उपाध्यक्ष हनुमान प्रसाद शर्मा, उज्जलवास पंचायत के पूर्व सरपंच कामरेड ओम साहू, अखिल भारतीय किसान सभा के उपाध्यक्ष कामरेड कुलदीप, मनीराम लकेसर, आदि अनेक कृषि नेताओं व कार्यकर्ताओं ने सभा को संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि सरकार बड़े-बड़े कॉर्पोरेट घरानों के पक्ष में काम कर रही है और पूरी तरह किसान-विरोधी व मज़दूर-विरोधी है। सरकार किसानों की एकता को तोड़ने और उनके आन्दोलन को बदनाम करने की तरह-तरह कोशिश कर रही है और किसानों पर अत्याचार कर रही है। अनेक किसान नेताओं व कायकर्ताओं को झूठे आरोपों के आधार पर गिरफ़्तार किया गया है। किसानों को अपने संघर्ष को और तेज़ करने के लिए प्रोत्साहित करते हुए, वक्ताओं ने सरकार से गिरफ़्तार किसानों को फ़ौरन रिहा करने और किसानों की मांगों पर अमल करने की मांग की।

केंद्र द्वारा पारित तीनों कृषि विरोधी काले कानूनों तथा बिजली संशोधन बिल को रद्द करने और एमएसपी को कानूनी रूप देने की मांग को लेकर, पंजाब और हरियाणा में अनेक स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किये गए।

5 जून को हरियाणा के सिरसा में किसानों ने काले कानूनों की प्रतियों को जलाया। उन्होंने 13 जून को सिरसा से दिल्ली की सीमा तक ट्रेक्टर मार्च करने की योजना घोषित की। इससे पूर्व, 31 मई को सिरसा में एक किसान पंचायत आयोजित किया गया। किसान-विरोधी कानूनों का विरोध और तेज़ करने के संकल्प के साथ, किसानों ने उन सैकड़ों किसानों को फ़ौरन रिहा करने की मांग की, जिन्हें कुछ ही दिन पहले, झूठे आरोपों के आधार पर गिरफ़्तार किया गया था। हरियाणा में जगह-जगह पर किसानों ने 26 मई को काला दिवस मनाया था। दिल्ली की सरहदों पर संघर्ष कर रहे किसानों के समर्थन में, हरियाणा में कई रेल-रोको, रास्ता-रोको, मुख्य मंत्री व अन्य मंत्रियों का घेराव, आदि लगातार चल रहा है।

पंजाब में अनेक स्थानों पर किसानों ने काले झंडे लेकर विरोध प्रदर्शन किये और किसान-विरोधी कानूनों के प्रतियाँ जलाईं।

पंजाब और हरियाणा के कई स्थानों पर – अमृतसर, जालंधर, मोहाली, अबोहर, होशियारपुर, बरनाला, नवाशहर, पटियाला, फगवाड़ा, चंडीगढ़, सिरसा, जींद, करनाल, पानीपत, अम्बाला, आदि में काले कानूनों का विरोध किया गया। पंचकुला में आंदोलित किसानों ने पुलिस की लाठी चार्ज का सामना करते हुए, हरियाणा विधान सभा के स्पीकर का घेराव किया।

देश के अन्य राज्यों में भी किसान-विरोधी कानूनों का विरोध किया गया। आंध्र प्रदेश में किसानों ने कानूनों की प्रतियों को जलाकर, कानूनों को रद्द करवाने के लिए सम्पूर्ण क्रांति का नारा बुलंद किया।

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