मध्य प्रदेश के जूनियर डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं

भोपाल में जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर 

चल रही महामारी ने हमारे देश में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की दशकों की उपेक्षा को पूरी तरह से उजागर कर दिया है। जहां लाखों लोगों ने इस बीमारी के कारण दम तोड़ दिया है, हम सभी जानते हैं कि डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के पूर्ण समर्पण के बिना यह संख्या इससे भी बहुत ज्यादा होती। लेकिन समय-समय पर हमें रिपोर्ट मिलती है कि इन स्वास्थ्य कर्मियों के साथ किस तरह से भयावह व्यवहार किया जा रहा है और उनके पास लड़ने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।

जबलपुर के ए. एस.सी.बी. मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टरों का प्रदर्शन 

यही हाल म.प्र. के जूनियर डॉक्टरों का भी रहा है। उन्होंने अपनी मांगों को अधिकारियों को भेज दिया था। उनकी मांगों में उनके वजीफे में 24 प्रतिशत वृद्धि और 6 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि का आश्वासन (जो बढ़ती क़ीमतों की पूर्ति मुश्किल से करता है) और बेहतर चिकित्सा सुविधाएं और उनके परिवारों के लिए कोविड के लिए मुफ्त उपचार शामिल हैं। वे चाहते हैं कि कोविड के मरीजों का इलाज करने वाले जूनियर डॉक्टरों के संक्रमित होने की स्थिति में उनके लिए अलग क्षेत्रों में बेड का आरक्षण हो। वे चाहते हैं कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

6 मई, 2021 को राज्य सरकार ने उनसे वादा किया था कि उनकी मांगों को पूरा किया जाएगा। जब तीन सप्ताह से अधिक समय तक कुछ नहीं हुआ, तो डॉक्टरों को काम बंद करने और 31 मई को हड़ताल पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

मध्य प्रदेश के जूनियर डॉक्टरों के समर्थन में 6 जून को दिल्ली के डॉक्टरों ने प्रदर्शन किया 

म.प्र. उच्च न्यायालय ने उनकी चार दिवसीय हड़ताल को अवैध घोषित कर दिया है और उन्हें तुरंत ड्यूटी पर लौटने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि यदि डॉक्टर ऐसा नहीं करते हैं तो राज्य सरकार को उनके खि़लाफ़ सख़्त कार्रवाई करनी चाहिए। इसके तुरंत बाद जबलपुर स्थित एम.पी. मेडिकल यूनिवर्सिटी ने 450 जूनियर डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया। तब राज्य के छह सरकारी अस्पतालों में कार्यरत सभी जूनियर डॉक्टरों ने इस्तीफ़ा देने का फ़ैसला किया। हमें याद रखना चाहिए कि जब महामारी अपने चरम पर थी, इन डॉक्टरों ने हर जोखिम और कठिनाई को सहन किया था और लगन से अपने काम पर लगे रहे थे।

मध्य प्रदेश जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष, डॉ. अरविंद मीणा ने घोषणा की कि एम.पी.जे.डी.ए. म.प्र. उच्च न्यायालय के फ़ैसले के खि़लाफ़ सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाएगा। उन्होंने कहा कि फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन और मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन के सदस्य भी हड़ताल में शामिल होंगे।

दिल्ली, राजस्थान, बिहार, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना और महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों के जूनियर डाक्टरों के साथ-साथ वरिष्ठ डॉक्टरों ने भी उनकी हड़ताल का समर्थन किया है।

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