रेल मजदूरों की कार्य परिस्थिति : ऑल इंडिया पॉइंट्समेन एसोसिएशन (ए.आई.पी.एम.ए.) के केंद्रीय अध्यक्ष और मीडिया सेंटर के केंद्रीय आयोजन सचिव के साथ वार्तालाप

मजदूर एकता लहर (म.ए.ल.) भारतीय रेल में लोको पायलटों, गार्डों, स्टेशन मास्टरों, ट्रेन नियंत्रकों, सिग्नल और रखरखाव कर्मचारियों, ट्रैक अनुरक्षकों, आदि का प्रतिनिधित्व करने वाले भारतीय रेलवे में कई श्रेणी-वार संघों के नेताओं के साथ साक्षात्कारों की एक श्रृंखला को प्रकाशित कर रहा है। इस श्रृंखला के छठे भाग में यहाँ पर हम हमारे संवाददाता को ए.आई.पी.एम.ए. के कॉम. अमजद बेग, केंद्रीय अध्यक्ष, और कॉम. एन.आर. साई प्रसाद, केंद्रीय आयोजन सचिव, मीडिया सेंटर से मिली जानकारी प्रस्तुत कर रहे हैं।

म.ए.ल.: भारतीय रेलवे के पॉइंट्समेन की मुख्य ज़िम्मेदारियां क्या हैं?

ए.आई.पी.एम.ए.: सबसे पहले हमारी एसोसिएशन, ऑल इंडिया पॉइंट्समेन एसोसिएशन (ए.आई.पी.एम.ए.) हमारी समस्याओं को भारत के रेल उपयोगकर्ताओं और नागरिकों के सामने रखने के लिए मज़दूर एकता लहर को धन्यवाद देना चाहती है।रेलवे के सुरक्षित संचालन के लिए पॉइंट्समेनों का काम बहुत महत्वपूर्ण है। हमें रेलवे स्टेशन से गुजरनेवाली ट्रेनों के लिए सभी सही संकेतों का आदान-प्रदान करना होता है। जब ट्रेन चल रही होती है तो स्टेशन मास्टर रेलवे प्लेटफॉर्म पर खड़ा होता है, हम ट्रेन के दूसरी तरफ खड़े होते हैं और प्लेटफॉर्म उपलब्ध न होने पर अक्सर हमें पटरियों पर खड़ा होना पड़ता है। हमें चलते समय ट्रेन का निरीक्षण करना होता है और ट्रेन के गुजरने के बाद ट्रेन की आवाजाही में किसी भी तरह की असामान्यता के बारे में स्टेशन मास्टर को बताना होता है। हमें ट्रेनों की शंटिंग के दौरान अटैचिंग (जोड़ने) और डिटैचिंग (अलग करने) का काम भी करना होता है और हमें स्टेशन मास्टर की मौजूदगी में रेलवे स्टेशनों पर ट्रेनों को खड़ा करना और पॉइंट्स को क्लैंप करना होता है।

म.ए.ल.: भारतीय रेलवे के पॉइंट्समेनों को किन मुख्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है?

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भारतीय रेल के पॉइंट्समेन काम पर

ए.आई.पी.एम.ए.: हमें अपने काम में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। हमें 12 घंटे ड्यूटी पर रहना पड़ता है क्योंकि हमें रेलवे कर्मचारियों की अनिवार्य अनिरंतर श्रेणी में वर्गीकृत किया जाता है। लेकिन भारतीय रेलवे के कुछ डिवीजनों में, हमें निरंतर श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है। रेलवे के अपने नियमों के अनुसार, निरंतर श्रेणी के श्रमिकों को प्रतिदिन अधिकतम 8 घंटे की ड्यूटी पर रखा जा सकता है। इन डिवीजनों में इसका उल्लंघन हो रहा था और हमारे संघ के संघर्षों से ही हम इन डिवीजनों में पॉइंट्समेनों के लिए 8 घंटे की ड्यूटी सुनिश्चित कर सके। बाकी भारतीय रेलवे के लिए, हमारे पॉइंट्समेनों को 12 घंटे ड्यूटी पर रहना पड़ता है और यह हम पर मानसिक और शारीरिक रूप से बहुत भारी पड़ता है। हालांकि हमारे काम की प्रकृति अत्यधिक जोखिम भरी है, क्योंकि हमें ज्यादातर समय खुले में खड़ा रहना पड़ता है, हमें कोई जोखिम या कठिनाई भत्ता नहीं मिल रहा है। इसके अलावा पहले पॉइंट्समेनों के पास वेतन संरचना के चार ग्रेड थे, 2550 रुपये, 2610 रुपये, 2750 रुपये और 3050 रुपये और अब इसे केवल दो ग्रेड वेतन, अर्थात् 1800 रुपये और 1900 रुपये में बदल दिया गया है। परिणामस्वरूप 10% पॉइंट्समेन 1800 रुपये ग्रेड में हैं। और शेष 90% 1900 रुपये ग्रेड पे में हैं।

म.ए.ल.: भारतीय रेलवे के पॉइंट्समेनों के काम करने के हालात कितने सुरक्षित हैं?

ए.आई.पी.एम.ए.: हमारी श्रेणी के लिए काम करने की स्थिति बहुत असुरक्षित है। उदाहरण के लिए, हमें प्रकाश और पंखे की बुनियादी सुविधाओं के साथ उचित आश्रय नहीं दिया जाता है और 12 घंटे की ड्यूटी करते समय हमारे लिए उचित कुर्सी या बेंच की भी व्यवस्था नहीं होती है। कई बार क्लैम्पिंग और शंटिंग करते समय कोई सुपरवाइजर हमारी निगरानी नहीं करता है और इससे हमारी जान चली जाती है। 2016 से औसतन हर साल 10 से 15 पॉइंट्समेन ड्यूटी पर मारे जाते हैं। इसके अलावा हमें नियमित रूप से सेफ्टी शूज और रेन कोट भी नहीं मिल रहे हैं।

म.ए.ल.: वर्तमान में भारतीय रेलवे में कुल कितने पॉइंट्समेन कार्यरत हैं? पॉइंट्समेनों के पदों की वास्तविक स्वीकृत संख्या क्या हैइनमें से कितने मज़दूर अनुबंध पर कार्यरत हैं?

ए.आई.पी.एम.ए.: ट्रैक मेंटेनर के बाद, पॉइंट्समेन रेलवे कर्मियों की दूसरी सबसे बड़ी श्रेणी है। वर्तमान में भारतीय रेलवे में लगभग 65,000 पॉइंट्समेन कार्यरत हैं। हमारी जानकारी के अनुसार स्वीकृत पदों की संख्या लगभग 79,000 है। हमारे काम की संवेदनशील प्रकृति के कारण, हमारी श्रेणी में ठेका श्रमिकों को नियुक्त करना संभव नहीं है।

म.ए.ल.: क्या रेलवे अधिकारियों द्वारा पदों को सरेंडर करके पॉइंट्समेनों के स्वीकृत पदों की संख्या को कम करने के लिए कोई कदम उठाया गया है?

ए.आई.पी.एम.ए.: पॉइंट्समेनों की संख्या को स्थिर करने के लिए प्रशासन द्वारा हर संभव कदम उठाए गए हैं। लेकिन पॉइंट्समेनों के द्वारा कितने हादसे टल गए, इसकी जांच के लिए रेलवे द्वारा गठित एक कमेटी ने पाया कि हमारी कैटेगरी ने सबसे ज्यादा हादसे टाले हैं। इसके बाद उन्होंने पॉइंट्समेनों की संख्या कम करने की कार्रवाई वापस ले ली।

म.ए.ल.: इन समस्याओं को रेलवे अधिकारियों के ध्यान में लाने के लिए आपके संघ ने क्या कदम उठाए हैं और उनकी क्या प्रतिक्रिया रही है?

ए.आई.पी.एम.ए.: ऑल इंडिया पॉइंट्समेन एसोसिएशन (एआईपीएमए) ने सभी स्तरों, बोर्ड स्तर, जोन स्तर और मंडल स्तर पर प्रशासन को अपना अभ्यावेदन दिया है। हमने 26.08.2019 को रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निर्देशक से भी मुलाकात की जिसके बाद उन्होंने एक समिति नियुक्त की और इस समिति ने हमारी शिकायतों के संबंध में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की है; हम अभी भी अंतिम आदेशों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

म.ए.ल.: कॉम. अमजद बेग और कॉम. एन. आर. साई प्रसाद इस बहुत जानकारीपूर्ण साक्षात्कार के लिए हम आपको धन्यवाद देते हैं और हम भारतीय रेलवे के पॉइंट्समेनों की उचित मांगों का पूरा समर्थन करते हैं। इन न्यायोचित मांगों का समर्थन करना सभी रेलकर्मियों के साथ-साथ पूरे मज़दूर वर्ग के लिए आवश्यक है!

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