सूरत के विद्युत करघा मज़दूरों का संघर्ष

सूरत के विद्युत करघा (पावर लूम) मज़दूरों ने 17 जनवरी, 2011 से वेतन वृध्दि की मांग को लेकर अपनी हड़ताल शुरू की है। उन्हें पुलिस के साथ बहादुरी से लड़ना पड़ा है जिसमें 15 मज़दूर जख्मी होने की रिपोर्ट मिली है।
सूरत के विद्युत करघा (पावर लूम) मज़दूरों ने 17 जनवरी, 2011 से वेतन वृध्दि की मांग को लेकर अपनी हड़ताल शुरू की है। उन्हें पुलिस के साथ बहादुरी से लड़ना पड़ा है जिसमें 15 मज़दूर जख्मी होने की रिपोर्ट मिली है।
उनकी हड़ताल के कारण, शहर के 6 लाख विद्युत करघे बंद पड़े हैं। अधिकतर औद्योगिक इलाकों में विद्युत करघों वाले कारखाने बंद पड़े हैं क्योंकि पुलिस के अत्याचार के बावजूद मज़दूर काम पर जाने से इनकार कर रहे हैं। इन करघों में रोजाना तीन करोड़ मीटर कपड़ा तैयार किया जाता है और ओड़िसा, बिहार, आन्ध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के करीब 7 लाख प्रवासी मज़दूर काम करते हैं। इनमें से 4 लाख मज़दूर बिहार और ओड़िसा से हैं। पॉलिएस्टर कपड़े का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सूरत में पूरे देश का करीब 40 प्रतिशत पॉलिएस्टर कपड़ा बनता है। बुनकरों के संगठन और मज़दूरों की यूनियन समझौते के लिये बातचीत कर रही हैं।

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