ओडिसा में बढ़ते राजकीय आतंक की निंदा करें!

मजदूर एकता लहर बड़े गुस्से के साथ हिन्दोस्तानी राज्य की निंदा करती है, जो सबसे बड़े पूंजीवादी समूहों की खनन परियोजनाओं के खिलाफ़ लोगों के विरोध को कुचलने के लिए ओडिसा के विभिन्न इलाकों में कार्यकर्ताओं की सुनियोजित ढंग से हत्या करवा रहा है।
मजदूर एकता लहर बड़े गुस्से के साथ हिन्दोस्तानी राज्य की निंदा करती है, जो सबसे बड़े पूंजीवादी समूहों की खनन परियोजनाओं के खिलाफ़ लोगों के विरोध को कुचलने के लिए ओडिसा के विभिन्न इलाकों में कार्यकर्ताओं की सुनियोजित ढंग से हत्या करवा रहा है।
नियमगिरी संघर्ष के कार्यकर्ता लेंजु और उसके साथियों को सोते समय घेरकर मार डाला गया। जैसा कि लेंजु ने एक पूंजीपति अखबार में लिखे गये अपने एक लेख में कुछ समय पहले पूर्वानुमान लगाया था, उसे ”माओवादी” करारकर मार डाला जायेगा।
कलिंग नगर में जहां लोग कई वर्षों से टाटा के इस्पात संयंत्र का विरोध कर रहे हैं, वहां पुलिस ने एक फरेबी मुठभेड़ आयोजित किया। पुलिस की हिरासत में पहले से ही रखे गये लोगों को जंगल में ले जाकर मार डाला गया, जिनमें बालीगुठा गांव से एक बारह वर्षीय लड़की जंगा भी शामिल थी। यह कलिंग नगर हत्याकांड की पांचवी सालगिरह के एक दिन पहले किया गया, जिस हत्याकांड में इस्पात संयंत्र का विरोध करने के लिये पुलिस ने 14 आदिवासी पुरूषों, महिलाओं और बच्चों को गोली से भून डाला था।
गंधमर्धन में गंधमर्धन सुरक्षा युवा परिषद के दो कार्यकर्ताओं, माधवसिंह ठाकुर और रमेश साहु, को पुलिस ने 26 दिसम्बर, 2010 को गंधमर्धन पर्वतमाला पर ले जाकर गोलियों से उड़ा दिया। यह संगठन पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से पर्वतों को खनन से बचाने के लिये अभियान को अगुवाई दे रहा है। जबकि पुलिस ने इन्हें ”माओवादी” बताया, तो भाजपा ने इन दोनों कार्यकर्ताओं को अपनी पार्टी के सदस्य बताये और इस घटना की निंदा की। इन वहशी हत्याओं के विरोध में, ओडिसा के कई इलाकों में 3 जनवरी, 2011 को सुबह से शाम तक बंद आयोजित किया गया।
बड़ी-बड़ी कंपनियों के नियंत्रण में मीडिया इन हत्याकांडों का जिक्र करके इन्हें ”वाम उग्रवाद” को कुचलने में सरकार की बड़ी जीत बता रहे हैं। शासक संप्रग सरकार और ओडिसा सरकार इस देश को चलाने वाले बड़े इजारेदार पूंजीवादी समूहों के हथकंडे हैं। यह शासक वर्ग ओडिसा और देश के अन्य भागों के कुदरती संसाधनों का शोषण करने पर तुला हुआ है व अपने इरादों को हासिल करने के लिये राजकीय आतंक फैला रहा है और इस दमन को जायज़ ठहराने के लिये, राज्य का विरोध करने वाले सभी लोगों को ”माओवादी” बता रहा है। यह जरूरी है कि लोगों के अधिकारों के लिये संघर्ष करने वाले एकजुट होकर, शासक वर्ग की इस साज़िश का पर्दाफाश और विरोध करें।

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