1984 के गुनहगारों को सज़ा दो!

1984 में राज्य द्वारा आयोजित सिखों के कत्लेआम की 27वीं बरसी पर दिल्ली और मुंबई में विरोध रैलियां हुईं।

1984 में राज्य द्वारा आयोजित सिखों के कत्लेआम की 27वीं बरसी पर दिल्ली और मुंबई में विरोध रैलियां हुईं।

दिल्ली में लोक राज संगठन और सिख फ़ोरम ने, पीयूसीएल और पीयूडीआर के साथ मिलकर, इंडिया गेट पर मोमबत्तियां जलाकर अपना विरोध जताया। समाज के सभी तबकों से सैकड़ों लोगों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। कत्लेआम के शिकार बने लोगों के परिवार और उनके छोटे बच्चे इसमें शामिल हुये। दिल्ली की मजदूर वर्ग बस्तियों से नौजवान आये, जिनका उस समय जन्म भी नहीं हुआ था, जो लोक राज संगठन के आह्वान पर बहादुरी से आगे आये, उन्होंने अपनी भागीदारी से यह दर्शाया कि वे 1984 के सिखों के जनसंहार को सभी हिन्दोस्तानी लोगों पर हमला मानते हैं। उन्होंने अपने सिख भाइयों-बहनों के साथ अपना भाईचारा प्रकट किया और 1984 के गुनहगारों को सज़ा दिलाने का अपना संकल्प दोहराया। कार्यक्रम में न्यायाधीश, वकील, पत्रकार, फिल्म निर्माता, शिक्षक, पेशेवर लोग तथा विभिन्न राजनीतिक पार्टियों व दलों के राजनीतिक कार्यकर्ता उपस्थित थे। हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सक्रियता से इसमें भाग लिया।

हिन्दी और अंग्रेजी भाषा में लिखे हुये बड़े-बड़े बैनरों पर लोगों की भावनायें और विचार स्पष्ट थे। “नवंबर 1984 में सिखों के जनसंहार को कभी भुलाया नहीं जा सकता!”, “हिन्दोस्तानी राज्य साम्प्रदायिक है, न कि हिन्दोस्तानी लोग!”, “1984 के सिखों के जनसंहार के गुनहगारों को सज़ा दो!”, “राजकीय आतंकवाद मुर्दाबाद!”, “1984 के सिखों के जनसंहार के गुनहगारों को सज़ा दिलाने का संघर्ष जारी रहेगा!”, राज्य द्वारा आयोजित साम्प्रदायिक हिंसा के खिलाफ़ एकजुट हो!”, “साम्प्रदायिक हिंसा – लोगों को बांटने के लिये राज्य का सबसे पसंदीदा हथियार!”, “सिखों के जनसंहार के लिये दोषी कांग्रेस पार्टी नेताओं को अभी तक सज़ा क्यों नहीं?” – इस तरह के नारे बैनरों पर लिखे थे।

रैली में भाग लेने वाले जाने-माने व्यक्तियों में शामिल थे जस्टिस रजिंदर सच्चर, फिल्म निर्माता शोनाली बोस, मानव अधिकार कार्यकर्ता फराह नकवी, वकील प्रशांत भूषण, एच.एस.फूलका और वृंदा ग्रोवर, सामाजिक कार्यकर्ता व शिक्षिक नंदिनी सुन्दर, सुचरिता, प्रो.भरत सेठ, व मालबिका मजुमदार, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के कामरेड जसवीर सिंह, भाकपा (माले) के कामरेड पी.के.शाही, मणिपुर के प्रसिद्ध मानव अधिकार कार्यकर्ता डा.परदेशी सिंह, हिंद नौजवान एकता सभा के संतोष कुमार व लोकेश कुमार, पुरोगामी महिला संगठन की कार्यकर्ता रेणु नायक व छाया, प्रकाश राव, बिरजू नायक, विंग कमांडर आर.एस.चटवाल और वरिष्ट पत्रकार कुलदीप नैयर।

 

मुंबई में, छत्रपति शिवाजी टरमिनस के बाहर, फोर्ट में लोक राज संगठन ने विरोध कार्यक्रम आयोजित किया था। सिख फोरम तथा रेलवे, एयरलाइन, रेसिडेंट डाक्टर आदि के ट्रेड यूनियनों व संगठनों ने भी इसमें भाग लिया। मोमबत्तियां जलाकर लोगों ने अपना विरोध प्रकट किया। 1984 में सिखों के कत्लेआम की निंदा करते हुये एक पर्चे की हजारों प्रतियां बांटी गयीं। कर्यक्रम में भाग लेने वाले जाने-माने व्यक्तियों में शामिल थे मजदूर एकता चलवल के प्रमुख नेता डा.मैथ्यू अब्राहम, शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता डा.संजीवनी जैन तथा जाने-माने वकील महेश जेठमलानी। शहर के बहुत से सिख लोगों ने कार्यक्रम में भाग लिया।

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी, दिल्ली और मुंबई के इन कार्यक्रमों को बहुत महत्वपूर्ण मानती है। ये कार्यक्रम दिखाते हैं कि हमारे लोग साम्प्रदायिक नहीं हैं, कि लोग एक पर हमले को सभी पर हमला मानते हैं और इंसाफ के लिये संघर्ष को आगे ले जाने पर डटे हुये हैं। इन कार्यक्रमों को आयोजित करने के लिये, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी लोक राज संगठन और सिख फोरम को बधाई देती है।

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