जंग फरोश अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा वापस जाओ! 8 नवम्बर, 2010 को संसद पर आयोजित संयुक्त रैली के अवसर पर जारी बयान

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ऐसे समय पर हिन्दोस्तान आ रहा है जब इराक और अफगानिस्तान पर अमरीकी साम्राज्यवादी कब्ज़ा जारी हैअमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ऐसे समय पर हिन्दोस्तान आ रहा है जब इराक और अफगानिस्तान पर अमरीकी साम्राज्यवादी कब्ज़ा जारी है, जिसके चलते उन देशों में महिलाओं और बच्चों समेत हजारों-हजारों बेकसूर लोगों को बड़ी बेरहमी से मार डाला जा रहा है या घायल किया जा रहा है; जब अमरीकी साम्राज्यवादी फिलीस्तीनी लोगों के अपनी आजाद मातृभूमि के लिये जायज़ संघर्ष को क्रूरता से कुचलने में इस्राइल के जाउनवादी शासकों को पूरा समर्थन और सहयोग दे रहे हैं; जब क्यूबा, उत्तारी कोरिया और ईरान पर अमरीकी हमले का गंभीर खतरा है और अमरीकी साम्राज्यवादी सारी दुनिया में अपनी सैनिक तथा खुफिया जाल फैला रहे हैं। साथ ही साथ, अमरीकी साम्राज्यवादी शासक हिन्दोस्तानी शासक पूंजीपति वर्ग के साथ सैनिक संबंध बना रहे हैं, ताकि दुनिया पर अपनी दादागिरी जमाने में हिन्दोस्तान को अपना सांझेदार बना सकें।

 

सत्ता में आने के तुरंत बाद, ओबामा प्रशासन ने जो नई अफ-पाक नीतिशुरू की, उसके जरिये अमरीकी साम्राज्यवादियों और नाटो ने अफगानिस्तान में अपनी सशस्त्र सेनाओं को मजबूत किया है और नागरिकों पर कातिलाना हमले छेड़े हैं। अमरीकी और नाटो सेनाओं की धरती झुलसाने वाली नीति और निशाना अभ्यासकी वजह से दसों-हजारों स्त्री, पुरुष और बच्चे मारे गये हैं या घायल हुये हैं। पाकिस्तान के कई भागों, खास तौर पर अफ़गानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों पर भी इन सैनिक कार्यवाहियों को फैलाया गया है।

 

अमरीकी साम्राज्यवाद हिन्दोस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव बनाये रखने और हमारे लोगों को बांट कर रखने की हर प्रकार की कोशिश कर रहा है। उसका उद्देश्य है अपनी सैन्यीकृत अर्थव्यवस्था के लिये नये-नये बाज़ार पैदा करना, जो तभी संभव है जब वह दुनिया के अलग-अलग भागों में लगातार स्थानीय जंग और आतंक भड़काता रहेगा। हिन्दोस्तान और पाकिस्तान के लोगों को इस साम्राज्यवादी साजिश को समझना पड़ेगा। हमें मिलकर अमरीकी साम्राज्यवाद का विरोध करना होगा, जिसे हम अपने इलाके में तथा पूरी दुनिया में शान्ति और सुरक्षा का सबसे बड़ा खतरा और आतंकवाद का मुख्य स्रोत मानते हैं। ओबामा की हिन्दोस्तान यात्रा यह भी दिखाती है कि अमरीकी साम्राज्यवाद इस इलाके में अपने रणनैतिक दांवपेच में हिन्दोस्तान को और ज्यादा शामिल करना चाहता है, ताकि चीन को अमरीकी अर्थव्यवस्था के पूंजीवादी प्रतिस्पर्धी बतौर तेज़ी से आगे बढ़ने से रोका जाए।

 

हिन्दोस्तानी लोगों की साम्राज्यवाद विरोधी संघर्ष की महान परंपरा है। हम बराक ओबामा की यात्रा और हिन्द-अमरीकी रणनैतिक संबंध का जमकर विरोध करते हैं, क्योंकि यह इस इलाके की शान्ति और सभी लोगों की संप्रभुता के लिये गंभीर खतरा है।

 

हम सभी देशवासियों से आह्वान करते हैं कि अमरीकी राष्ट्रपति की इस दुष्ट इरादों से की जा रही यात्रा का विरोध करें और 8 नवंबर, 2010 को नई दिल्ली में मंडी हाउस से संसद मार्ग तक विरोध रैली में भाग लें।

जंग फरोश अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा वापस जाओ!

 

अमरीकी साम्राज्यवादी – इराक और अफगानिस्तान से बाहर निकलो!

 

अमरीकी साम्राज्यवादी – दक्षिण एशिया में हस्तक्षेप बंद करो!

 

अमरीकी साम्राज्यवादी – जाउनवादी इस्राइल का समर्थन करना बंद करो!

 

अमरीकी साम्राज्यवादी – क्यूबा, उत्तारी कोरिया और ईरान के साथ छेड़खानी बंद करो!

 

अमरीकी दादागिरी मुर्दाबाद, मुर्दाबाद!

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