Lenin

लेनिन के निधन की 100वीं बरसी पर:
लेनिन की शिक्षाएं एक अनिवार्य मार्गदर्शक हैं


विश्व स्तर पर, वर्तमान स्थिति कम्युनिस्टों को मार्क्सवाद-लेनिनवाद के मौलिक निष्कर्षों और असूलों पर आधारित होकर, श्रमजीवी क्रांति के सिद्धांत और कार्यनीति को विकसित करने के लिए आह्वान कर रही है।

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महान अक्तूबर समाजवादी क्रांति की 104वीं वर्षगांठ पर :
पूंजीवादी-साम्राज्यवादी व्यवस्था का एकमात्र असली विकल्प समाजवाद है

मौजूदा पूंजीवादी-साम्राज्यवादी व्यवस्था का विकल्प क्या है और इसे हक़ीक़त में कैसे हासिल किया जा सकता है – 20वीं शताब्दी ने इस प्रश्न का एक स्पष्ट उत्तर प्रदान किया है। 1917 की रूसी क्रांति और सोवियत संघ में एक समाजवादी व्यवस्था के निर्माण ने सिद्धांत और व्यवहार में ऐसे विकल्प की स्थापना की और सबके सामने पेश किया।

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हिरोशिमा और नागासाकी पर बमबारी की 76वीं वर्षगांठ :
साम्राज्यवाद का मानवता के ख़िलाफ़ कभी भी माफ़ न करने के योग्य अपराध

6 अगस्त और 9 अगस्त 1945 को अमरीकी वायु सेना के विमानों ने जापान के शहरों हिरोशिमा और नागासाकी पर क्रमशः दो परमाणु बम गिराए। इतिहास में यह पहला और एकमात्र मौका था जब इतनी बड़ी संख्या में पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को जानबूझकर मारने और नष्ट करने के लिए इतनी घातक क्षमता वाले हथियारों का इस्तेमाल किया गया था।

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भारतीय रेल का निजीकरण – भाग 4 : रेलवे के निजीकरण का अंतर्राष्ट्रीय अनुभव

दुनिया के विभिन्न देशों में रेलवे के निजीकरण के अध्ययन से पता चलता है कि इसका लाभ केवल पूंजीवादी इजारेदारों को ही मिला है।

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द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति की 75वीं वर्षगांठ पर

भाग 4 : द्वितीय विश्व युद्ध की प्रमुख लड़ाइयां

द्वितीय विश्व युद्ध में स्तालिनग्राद की लड़ाई सबसे निर्णायक मोड़ थी। स्तालिनग्राद के लोगों ने हर गली, हर घर और अपने शहर की एक-एक इंच ज़मीन को बचाने के लिए जंग लड़ी। कई महीनों तक चली इस बेहद कठिन जंग में जर्मन सेना की हार हुई, जिसे अभी तक अजेय माना जा रहा था। जर्मनी की सेना पूरी तरह से नष्ट हो गयी और आत्मसमर्पण के लिए मजबूर हो गयी।

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