केंद्रीय बजट 2021-22 : इजारेदार पूंजीपतियों के हित में समाज-विरोधी हमले जारी हैं

केंद्रीय बजट इजारेदार पूंजीपतियों के खुदगर्ज हितों की सेवा में है, इसका मेहनतकश लोगों की असुरक्षा और दुखों से कोई वास्ता नहीं है।

1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वर्ष 2021-22 का केंद्रीय बजट संसद में पेश किया। बजट की विषय वस्तु और उसके लक्ष्य को पूरी तरह से समझने के लिए यह सवाल पूछना अच्छा होगा कि केंद्रीय बजट क्या होता है?

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पेट्रोल और डीजल की उच्चतम क़ीमतों के लिए केंद्र और राज्य सरकारें ज़िम्मेदार हैं!!

पेट्रोल और डीजल की क़ीमतें देश के कई भागों में क्रमशः 100 रुपये और 90 रुपये प्रति लीटर के उच्चतम स्तर को छू रही हैं। इसके परिणाम स्वरूप व्यक्तिगत परिवहन और वस्तुओं की लागत में वृद्धि मेहनतकश लोगों पर कमर तोड़ बोझ डाल रही है। सरकार द्वारा कोई राहत दिये जाने के बजाय वह बहाने दे रही है। प्रधानमंत्री ने उच्च क़ीमतों के लिए पिछली सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया और अप्रत्यक्ष रूप से कच्चे तेल के अंतर्राष्ट्रीय मूल्य को दोषी ठहराया है।

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देशभर में किसानों का संघर्ष कृषि के गहरे संकट को दर्शाता है

शासक वर्ग बार-बार इस झूठ को दोहरा रहा है कि यह पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अमीर किसान हैं जो अपनी समृद्ध जीवन शैली की रक्षा के लिए दिल्ली की सीमाओं पर धरने पर हैं। किसानों द्वारा देशभर में विभिन्न स्थानों पर किये जा रहे विरोध प्रदर्शन सरकार और कई समाचार चैनलों के इस झूठे प्रचार को अस्वीकार करते हैं। हाल के वर्षों में, किसानों का विरोध और भी तेज़ हो गया है क्योंकि देश में कृषि-संकट और भी गंभीर हो गया है।

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निजीकरण के ख़िलाफ़ बी.ई.एम.एल. के मज़दूरों का आंदोलन

भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बी.ई.एम.एल.) के हजारों मज़दूर जनवरी 2021 की शुरुआत से केंद्र सरकार की सार्वजनिक क्षेत्र के महत्वपूर्ण रणनीतिक उपक्रम के निजीकरण की नीति के ख़िलाफ़ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।

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बजट भाषण में किसान कल्याण के झूठे दावे

अब यह एक आम प्रथा बन गयी है, जिसमें बजट के किसी एक आंकड़े को बढ़ा-चढ़कर दिखाया जाता है और एक झूठा आभास दिलाया जाता है कि इस एक क़दम से किसी ज्वलंत समस्या को हल किया गया है। ऐसा करते हुए सरकार इस हक़ीक़त को छुपाने की कोशिश करती है कि बजट दरअसल इजारेदार पूंजीवादी घरानों की अगुवाई में हुक्मरान पूंजीपति वर्ग के हाथों का एक औजार है, जिसे उनके खुदगर्ज हितों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

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किसान आंदोलन के आह्वान पर देशभर में रेलगाड़ियों का चक्काजाम

किसान आंदोलन ने देश के विभिन्न राज्यों में 18 फरवरी, 2021 को ”रेल रोको“ अभियान चलाने की घोषणा की थी। उत्तर रेलवे के कई क्षेत्रों और बिहार, बंगाल तथा मध्यपूर्वी रेलवे के अनेक स्टेशनों पर रेलगाड़ियों को रोका गया। पंजाब में फिरोज़पुर और अंबाला मंडलों में सबसे ज्यादा रेलगाड़ियां रोकी गयीं। रेल रोको चार घंटों तक चला।

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18 जनवरी को महिला किसान दिवस मनाया गया: अपने अधिकारों की हिफ़ाज़त के लिए महिलायें कंधे से कंधा मिलकर लड़ रही हैं

दिल्ली की सीमाओं – सिंघु, टिकरी, गाज़ीपुर, चिल्ला, ढांसा, बहादुरगढ़, इत्यादि पर किसानों के संघर्ष को 18 जनवरी का दिन “महिला किसान दिवस” के रूप में मनाया गया।

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विशाखापट्टनम स्टील प्लांट के निजीकरण का बड़े पैमाने पर विरोध

5 फरवरी को विशाखापट्टनम स्टील प्लांट के हजारों कर्मचारी विशाखापट्टनम में ग्रेटर विशाखापट्टनम नगर निगम कार्यालय के सामने इकट्ठे हुए और स्टील प्लांट के कॉर्पोरेट मालिक, राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आर.आई.एन.एल.) के शेयरों को बेचने के प्रस्ताव के ख़िलाफ़ एक विरोध रैली निकाली।

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रेलवे मज़दूरों के कार्य की परिस्थिति: ऑल इंडिया ट्रैक मेन्टेनर्स यूनियन के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के साथ साक्षात्कार

मज़दूर एकता लहर (म.ए.ल.) भारतीय रेल में लोको पायलट, गार्ड, स्टेशन मास्टर्स, रेलगाड़ी कंट्रोलर, सिग्नल व टेलीकॉम मेन्टेनन्स स्टाफ, ट्रैक मेन्टेनर्स, टिकट चेकिंग स्टाफ, आदि का प्रतिनिधित्व करने वाली श्रेणीबद्ध एसोसिएशनों के नेताओं के साथ साक्षात्कार करके, उनका प्रकाशन कर रहा है। इस श्रृंखला के तीसरे भाग में, यहां पर हम ऑल इंडिया ट्रैक मेन्टेनर्स यूनियन (ए.आर.टी.यू.) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष, कामरेड धनंजय कुमार (डी.के.) के साथ किये गए साक्षात्कार को प्रस्तुत कर रहे हैं।

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कोयला उद्योग के निजीकरण के विरोध में कामगार एकता कमेटी की सभा

31 जनवरी, 2021 को कामगार एकता कमेटी (के.ई.सी.) ने “निजीकरण के ख़िलाफ़ एकजुट हों” विषय पर एक सभा का आयोजन किया। इस सभा में कोयला उद्योग के निजीकरण के विषय पर विशेष ध्यान दिया गया। पूंजीपतियों के निजीकरण कार्यक्रम के ख़िलाफ़ मज़दूर वर्ग की एकता बनाने के लिए के.ई.सी. द्वारा आयोजित चर्चा सत्र की यह सातवीं कड़ी थी। इस सभा में विभिन्न उद्योगों और सेवाओं की ट्रेड यूनियनों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया।

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