मानव अधिकारों के संघर्ष का मूल सार श्रमजीवी लोकतंत्र का संघर्ष है

10 दिसंबर, 1948 को संयुक्त राष्ट्र (सं.रा.) महासभा ने मानव अधिकारों को स्वीकृति दी और ऐलाननामा जारी किया। तब से दुनिया भर के मज़दूर व दबे-कुचले लोग हर साल 10 दिसंबर को, मानव होने के नाते, अपने अधिकारों का दावा और इन अधिकारों को अमल में लाने के संघर्ष को जारी रखने की प्रतिज्ञा करके, मनाते हैं।
सोवियत संघ में प्रस्थापित श्रमजीवी अधिनायकत्व का राज्य आधुनिक परिभाषा क

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हिन्द-अमरीकी रणनैतिक गठबंधन एक साम्राज्यवादी गठबंधन है! हिन्दोस्तान व दुनिया के लोगों के हितों तथा शान्ति के खिलाफ़ है!

अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा अमरीकी साम्राज्यवादियों और हिन्दोस्तानी शासक वर्ग के बीच गठबंधन को मजबूत करने के लिये, हाल में हिन्दोस्तान आये। यह गठबंधन हिन्दोस्तान के मजदूरों और लोगों के लिये तथा दक्षिण एशिया और

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ओबामा की हिन्दोस्तान यात्रा का विरोध

संपादक महोदय,
 
यह पत्र मैं कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी द्वारा अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की हिन्दोस्तान यात्रा का विरोध करने के बुलावे के समर्थन में लिख रहा हूँ. जैसे मजदूर एकता लहर के 16-31 अक्टूबर, 2010 के अंक में बताया गया था, हिन्दोस्तान और पाकिस्तान और इस पूरे इलाके के लोगो के बीच अमरीकी साम्राज्यवाद के मंसूबो के खिलाफ एकता बनाने यह अच्छा मौका है. हिन्दोस्तान के सरकार द्वारा अमेरिका की अफ-पाक नीति का समर्थन किये जाने की सभी लोगो ने भर्त्सना की जानी चाहिए, जिस नीति की वजह से अफगानिस्थान और पाकिस्तान के लोगो पर मौत और बर्बादी आई है. अमरीका द्वारा  आतंक के खिलाफ जंग के नाम पर चलाये जा रहा यह कत्लेआम कई सालो से चलता आया रहा है और इस जुर्म के लिए सजा से अमरीका बचता आया है. बुश प्रशासन को बदल का ओबामा प्रशासन के आने से कुछ भी नहीं बदला है, बल्कि इस इलाके के लोगो के खिलाफ जंग और तेज हुई है.
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समाज के उत्पादन से प्राप्त अतिरिक्त मूल्य पर मजदूरों के अधिकार को स्थापित करने का संघर्ष तेज़ करें!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 22 मार्च, 2010

मजदूर साथियों!

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23 मार्च, शहीदी दिवस के अवसर पर जनसभा: संगठित हो, हुक्मरान बनो और समाज को बदल डालो!

23 मार्च, 2010 को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस के अवसर पर दिल्ली में, ‘क्रांतिकारी शहीदों के सपनों को साकार करने के लिए, हिन्दोस्तान के नौजवानों, मजदूर वर्ग के नेता बनो!’ शीर्षक पर हिन्द नौजवान एकता सभा ने जनसभा आयोजित की। हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी, लोक राज सगठन, पुरोगामी महिला संगठन, स्थानीय लोक राज समिति आदि संगठनों ने इसमें भाग लिया। सैकड़ों की संख्या

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दुनिया भर में महिला दिवस जोर-शोर से मनाया गया

अंतर्राष्ट्रीय मेहनतकश महिला दिवस की शताब्दी, महिलाओं व मेहनतकश लोगों ने दुनिया भर में, मोर्चा, प्रदर्शनों, गोष्ठियों, नाटकों और तरह-तरह के दूसरे तरीकों से बड़े जोर-शोर से मनाई। जिन मुद्दों को उठाया गया था वे सभी सिर्फ महिलाओं पर प्रभाव डालने वाले मुद्दों तक सीमित नहीं थे बल्कि कई मुद्दे, मानवों, मेहनतकश लोगों व राष्ट्रों के अधिकारों से जुड़े थे।

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महिलायें एक नई राज्य सत्ता एक नये संविधान और एक नई राजनीतिक व्यवस्था व प्रक्रिया की मांग करती हैं!

8 मार्च 2010 पर हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का आह्वान

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के शताब्दी वर्ष की शुरुआत में, 8 मार्च 2010 के अवसर पर, कांग्रेस पार्टी नीत संप्रग सरकार हिन्दोस्तान की महिलाओं को तोहफा बतौर, महिला आरक्षण विधेयक को संसद में पेश करने जा रही है। इस विधेयक का मकसद है प्रत्येक लोक सभा व विधान सभा चुनाव में महिलाओं के लिये आरक्षित निर्वाचन

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मुंबई में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया

बहुत ही उत्साह और जोश से सैकड़ों स्त्री और पुरुषों ने मुंबई के मज़दूर वर्ग इलाके में एक जन रैली में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया।

7 मार्च 2010 के दिन यह जन रैली अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के सौवें वर्षगांठ की शुरुआत को मनाने के लिये वरली की बी.डी.डी. चाल के मैदान में की गयी।

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पैरिस कम्यून की 139वीं सालगिरह: जब मजदूर वर्ग ने आसमान को हिला दिया!

इस वर्ष के 18 मार्च को पैरिस कम्यून की 139वीं सालगिरह होगी। मजदूर वर्ग के इतिहास में यह एक बहुत ही महान और प्रेरक घटना थी। बहादुर क्रान्तिकारी ब़गावत के जरिये, पैरिस के मेहनतकशों ने राज्य सत्ता को अपने हाथ में ले लिया और पैरिस कम्यून के रूप में अपना शासन स्थापित किया। 26 मार्च से 30 मई, 1871 तक उन्होंने अपनी राज्य सत्ता को कायम रखा, पर अंत में उन्हें बेरहमी से कुचल डाला गया। उन्होंने पूंजीवा

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