देश की संपत्ति के निजीकरण के ख़िलाफ़ प्रदर्शन

9 अगस्त, 2021 को छत्तीसगढ़ के जिला सरगुजा में अम्बिकापुर के घड़ी चैक पर केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर धरना-प्रदर्शन आयोजन किया गया। भारी बरसात में भी इस प्रदर्शन में सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया। इसमें अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों के मज़दूरों और सरकारी कर्मचारियों ने हिस्सा लिया।

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हिरोशिमा और नागासाकी पर बमबारी की 76वीं वर्षगांठ :
साम्राज्यवाद का मानवता के ख़िलाफ़ कभी भी माफ़ न करने के योग्य अपराध

6 अगस्त और 9 अगस्त 1945 को अमरीकी वायु सेना के विमानों ने जापान के शहरों हिरोशिमा और नागासाकी पर क्रमशः दो परमाणु बम गिराए। इतिहास में यह पहला और एकमात्र मौका था जब इतनी बड़ी संख्या में पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को जानबूझकर मारने और नष्ट करने के लिए इतनी घातक क्षमता वाले हथियारों का इस्तेमाल किया गया था।

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सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ़ मज़दूरों का देश-व्यापी अभियान

9 अगस्त 2021 को, सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ़ अपनी आवाज़ बुलंद करते हुए, देश भर में लाखों-लाखों मजदूरों ने धरने-प्रदर्शन व हडतालें कीं. यह ट्रेड यूनियनों और मजदूर संगठनों के एक देश-व्यापी अभियान था।

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सर्व हिन्द निजीकरण विरोधी फोरम बिजली क्षेत्र के श्रमिकों के संघर्ष का समर्थन करता है

बिजली क्षेत्र के श्रमिकों के समर्थन में ऑल इंडिया फोरम अगेंस्ट प्राइवेटाइजेशन द्वारा 3 अगस्त 2021 को जारी किये गये बयान को हम यहां प्रकाशित कर रहे हैं।

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2020-21 में पूंजीपतियों के मुनाफ़े बढ़े जबकि लोगों के कष्ट बढ़े

वित्तीय वर्ष 2020-21 एक ऐसा दौर था जब देश के अधिकांश लोग अनकही पीड़ा से गुजरे। करोड़ों कामकाजी लोगों को कोरोना वायरस तथा राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर लगे लॉकडाउन के कारण कष्ट झेलना पड़ा। अर्थव्यवस्था का कुल आकार, वार्षिक मूल्य वर्धिता या सकल घरेलू उत्पाद (जी.डी.पी.) द्वारा मापा जाता है, यह पिछले वर्ष में 204 लाख करोड़ रुपये से घटकर 2020-21 में 197 लाख करोड़ रुपये हो गया।

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पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दाम :
जनता की सेवा के नाम पर मज़दूरों और किसानों की प्रत्यक्ष लूट

केंद्र सरकार द्वारा उत्पाद शुल्क से एकत्र किए गए राजस्व का एक बड़ा हिस्सा पेट्रोल और डीज़ल के द्वारा इकट्ठा किया जाता है। संशोधित बजट अनुमानों के अनुसार, पेट्रोलियम उत्पादों पर उत्पाद शुल्क 2020-21 में 3.6 लाख करोड़ रुपये था।

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कामरेड माणिक समझदार

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति कामरेड माणिक समझदार का 28 जुलाई, 2021 को कोलकता में हुए असामयिक निधन पर गहरा दुःख व्यक्त करती है। वे 67 वर्ष के थे।

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दालों पर स्टॉक की सीमा में ढील :
बड़े व्यापारियों और जमाखोरों के हित में एक क़दम

सरकार ने 19 जुलाई तक आदेश में ढील दी थी और आयातकों के लिए पूर्णछूट के साथ थोक और मिल मालिकों के लिए अनुमानित दालों की उचित स्टॉक की मात्रा में वृद्धि की थी। इससे साफ नज़र आता है कि सरकार ने तेल और दाल के सबसे बड़े व्यापारियों की मांगों को पूरा किया है।

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देश-भर के बिजली कर्मियों का संसद पर प्रदर्शन

देश के कोने-कोने से आये सैकड़ों बिजली कर्मियों व इंजीनियरों ने नेशनल को-आर्डिनेशन कमेटी आफ इलेक्ट्रीसिटी इंप्लाईज एंड इंजीनियर्स (एन.सी.सी.ओ.ई.ई.ई.) के झंडे तले, नई दिल्ली में संसद के निकट, जंतर-मंतर पर 3, 4, 5 और 6 अगस्त को, चार दिवसीय विरोध प्रदर्शन में भाग लिया।

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खाद्य तेलों और दालों की बढ़ती क़ीमतें : इजारेदार पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने के लिए लोगों की लूट

पिछले एक साल के दौरान अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 6 खाद्य तेलों की क़ीमतें जिसमें – मूंगफली का तेल, सरसों का तेल, वनस्पति और सोयबीन का तेल, सूरजमुखी का तेल और पामोलीन का तेल की क़ीमतें 20 प्रतिषत से 60 प्रतिशत तक बढ़ी हैं। इन दस सालों के दौरान खाद्य तेलों की क़ीमतें सबसे ज्यादा बढ़ी हुई, मई 2021 में देखी गईं। इन बढ़ती क़ीमतों ने उन कामकाजी लोगों पर और अधिक बोझ डाला है जो कुछ महीनों से पेट्रोल की बढ़ती क़ीमतों से पहले ही जूझ रहे हैं।

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