मज़दूरों ने किसानों के संघर्ष के साथ एकजुटता प्रकट की

अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों और देश के कोने-कोने से मज़दूर और कई संगठन किसानों के संघर्ष के समर्थन में खुलकर सड़कों पर उतर आये हैं। उन्होंने देश के तमाम हिस्सों में धरना प्रदर्शन आयोजित किये हैं। तीन कृषि कानूनों को रद्द करने की किसानों की मांगों के समर्थन में मज़दूर उनके साथ एकजुट होकर खड़े हैं। मज़दूरों और किसानों के बीच एकता बढ़ती जा रही है।

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व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और काम की स्थिति अधिनियम-2020 :

यह पक्षपातपूर्ण नियम मज़दूरों के खिलाफ़ है

19 नवंबर, 2020 को सरकार ने व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य की स्थिति अधिनियम, 2020 को लागू करने के लिए नियमों की अधिसूचना जारी की। मज़दूर कानूनों में जो थोड़े-बहुत मज़दूर के हितों के प्रावधान थे, इन नियमों ने उन्हें पूरी तरह से अनदेखा कर दिया है। इसी के साथ इसमें मज़दूर-विरोधी प्रावधान शामिल किये गये हैं, जिनके चलते कड़े सघर्ष के बाद हासिल किये गए अधिकार भी अब मज़दूरों से छीन लिए जाएंगे।

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प्रदर्शन कर रहे किसानों के समर्थन में जालंधर में कैंडल जुलूस

किसान-विरोधी कानूनों के खि़लाफ़ किसानों का संघर्ष पूरे देश में फैला हुआ है। इस संघर्ष को न केवल देश में बल्कि विदेशों से भी सभी वर्गों के लोगों का समर्थन मिल रहा है। पूरे देश के मज़दूर और शहरों में रहने वाले अन्य लोग भी बड़ी संख्या में किसानों के समर्थन में और केंद्र सरकार की जन-विरोधी नीतियों का विरोध

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बाबरी मस्जिद के विध्वंस की 28वीं सालगिरह पर : दोषियों को सज़ा देने की मांग करने के लिए एक संयुक्त रैली

6 दिसंबर को हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बाबरी मस्जिद के विध्वंस की 28वीं सालगिरह पर नई दिल्ली में मंडी हाउस पर आयोजित संयुक्त रैली मोर्चे में हिस्सा लिया।

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सेन्ट्रल लंदन में किसान-विरोधी कानूनों के खि़लाफ़ हजारों लोगों का विरोध प्रदर्शन!

हाल ही में हिन्दोस्तानी सरकार द्वारा पारित किसान-विरोधी कानूनों के खि़लाफ़ 6 दिसंबर, 2020 को सेन्ट्रल लंदन में हजारों लोग इकट्ठा हुए।

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तीन किसान-विरोधी कानूनों को वापस लिया जाना चाहिए! किसानों की लूट बंद करो!

इंडियन वर्कस एसोसिएशन (जी.बी.) का बयान, 6 दिसंबर, 2020

प्रिय भाइयों और बहनों,

पंजाब और हरियाणा के लाखों किसान, जो हिन्दोस्तान की केंद्र सरकार द्वारा पारित किसान-विरोधी कानूनों को वापस लेने की मांग करने के लिए दिल्ली आए हैं। वे 26 नवंबर से दिल्ली के बॉर्डर पर 11 दिन से इस कड़ाके की ठंड के मौसम में किसी भी सुविधा के बिना, यहां तक कि शौचालय और स्नान के लिए व्यवस्था तक के बिना, सड़क पर इतनी कठिन परिस्थितियों में किसी तरह सो कर गुजारा कर रहे हैं। पुरुष और महिलाएं, बुजुर्ग और युवा और यहां तक कि किसानों के बच्चे भी अपने घरों से सैकड़ों किलोमीटर दूर आकर सरकार के खिलाफ़ अपना कड़ा विरोध प्रकट कर रहे हैं।

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किसानों को मज़दूरों की यूनियनों का समर्थन

बैंक यूनियन और केंद्रीय ट्रेड यूनियन : 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के एक संयुक्त मंच ने किसानों के “भारत बंद” के आह्वान को अपना समर्थन दिया है। ये ट्रेड यूनियन हैं – इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (आई.एन.यू.टी.यू.सी.), ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (ए.आई.टी.यू.सी.), हिंद मजदूर सभा (एच.एम.एस.), सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सी.आई.टी.यू.), ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर

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किसानों के संघर्ष के समर्थन में देशभर में प्रदर्शन

देशभर में मज़दूर और किसान, सरकार द्वारा पारित किसान-विरोधी कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर चल रहे संघर्ष के समर्थन में सड़कों पर उतर रहे हैं। “काले कृषि कानून वापस लो!” की मांग देशभर में गूंज रही है। किसान बार-बार इन कानूनों के असली इरादों के बारे बता रहे हैं, जिसका पूरे देश के सामने पर्दाफाश हो चुका है।

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6 दिसंबर, 2020 – बाबरी मस्जिद के विध्वंस के 28 वर्ष बाद :

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के प्रवक्ता के साथ साक्षात्कार

मज़दूर एकता लहर : 28 वर्ष पहले 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद का विध्वंस किया गया। बाबरी मस्जिद का विध्वंस करने की साजिश के आरोपियों को 30 सितम्बर, 2020 को लखनऊ में सी.बी.आई. अदालत ने बेगुनाह करार दिया गया था। इससे पहले अगस्त 2020 में प्रधानमंत्री ने खुद, ठीक उसी जगह पर राम मंदिर का शिलान्यास किया जहां पर विध्वंस से पहले बाबरी मस्जिद खड़ी थी। गुनहगारों को सज़ा दिलाने के संघर्ष को जारी रखते हुए, कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी क्या हासिल करना चाहती है?

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हिन्दोस्तानी किसानों के आंदोलन को दुनियाभर में समर्थन

कनाडा से ऑस्ट्रेलिया तक से ख़बरें आ रही हैं कि वहां लोग हिन्दोस्तानी किसानों के आंदोलन के समर्थन में सड़कों पर उतर रहे हैं। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान व अन्य राज्यों के किसान सरकार द्वारा पारित किये किसान-विरोधी तीन कानूनों का जमकर विरोध कर रहे हैं। उनकी मांग है कि इन तीनों कानूनों को रद्द किया जाये, जो

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