द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति की 75वीं वर्षगांठ पर

दुनिया में युद्ध और टकराव का स्रोत साम्राज्यवाद था और आज भी है

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी अपने पाठकों को द्वितीय विश्व युद्ध के कारणों के बारे में और लोगों को इससे क्या सबक लेना चाहिए इसके बारे में शिक्षित करने के लिए 6-भाग की एक श्रृंखला प्रकाशित कर रही है।

भाग 1 – इतिहास से सबक

हमें इतिहास से सही सबक लेना चाहिए, ताकि मानव जाति युद्ध के अभिशाप को और लोगों के उत्पीड़न को हमेशा के लिए ख़त्म कर सके।

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पेट्रोलियम कंपनियों का निजीकरण और मज़दूरों का विरोध

भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड (बी.पी.सी.एल.) के 32,000 से अधिक मज़दूर उसके निजीकरण के विरोध में 7 और 8 सितम्बर को देशव्यापी हड़ताल पर जायेंगे। इसमें 12,000 नियमित मज़दूर और 20,000 ठेका मज़दूर शामिल हैं। आल इंडिया कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ बी.पी.सी.एल. वर्कर्स ने  इस देशव्यापी हड़ताल का बुलावा दिया है, जिसमें बी.पी.सी.एल. की 22 से अधिक मज़दूर यूनियनें शामिल हैं।

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आज़ादी के 73 साल बाद :

शोषण और दमन से मुक्त हिन्दोस्तान के लिए संघर्ष जारी है

बर्तानवी बस्तीवादी हुकूमत की समाप्ति के 73 साल बाद भी, हिन्दोस्तान में राजनीतिक सत्ता मुट्ठीभर लोगों के हाथों में केंद्रित है। “सबका विकास” एक खोखला वादा बनकर रह गया है।

हिन्दोस्तान में केवल टाटा, अंबानी, बिरला और अन्य इजारेदार पूंजीपति घरानों की जायदाद और उनके निजी औद्योगिक साम्राज्य बड़ी तेज़ी से बढ़ रहे हैं।

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अपने अधिकारों के लिए दुनिया भर के मज़दूरों का संघर्ष जारी है

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खदान मज़दूरों की ऐतिहासिक भूमिका

हमारे देश के कोयला खदान मज़दूर निजीकरण के ख़िलाफ़ जबरदस्त संघर्ष चला रहे हैं। उन्होंने 18 अगस्त को देश-व्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। इस संदर्भ में सभी देशों में खदान मज़दूरों द्वारा आधुनिक उद्योग के विकास और अंतराष्ट्रीय मज़दूर वर्ग आंदोलन के विकास में अदा की गयी भूमिका को याद करना बेहद जरूरी है। 19वीं और 20वीं शताब्दी में

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अधिकारों की हिफ़ाज़त में संघर्ष

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अधिकारों के संघर्ष में उतरे दुनियाभर के मज़दूर

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हमारे पाठकों से : मज़दूरों को इस देश का “मालिक” बनना ही होगा

प्रिय संपादक, स्वतंत्रता दिवस पर जारी केंद्रीय समिति के बयान में बहुत अच्छी तरह से यह समझाया गया है की किस तरह सत्ताधारी हर साल इस दिन का उपयोग झूठ का प्रचार करने के लिए करते हैं। जो लोगों को पसंद आए वो बोलना लेकिन उसका पूरा उल्टा काम करने की कला में हमारे नेताओं ने महारथ हासिल कर ली

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कोयला क्षेत्र के निजीकरण का असली उद्देश्य

जिस समय कोयला क्षेत्र कम मुनाफ़ेदार था उस समय उसमें राज्य की इजारेदारी स्थापित की गयी
आज जब यह बेहद मुनाफ़ेदार हो गया है तो इसका निजीकरण किया जा रहा है

आज हिन्दोस्तान में कोयला खनन बेहद मुनाफ़ेदार उद्योग बन गया है। ऐसा अनुमान लगाया गया है कि विभिन्न उद्योगों के लिए कोयले की मांग लगातार बढ़ती जा रही है।

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कोयला क्षेत्र के निजीकरण के बारे में झूठे प्रचार के ख़िलाफ़

जब देशभर के कोयला मज़दूर 41 कोयला खदानों को निजी कंपनियों द्वारा कोयले के व्यावसायिक खनन के लिए नीलामी किये जाने के ख़िलाफ़ हड़ताल और अन्य तरह से विरोध प्रदर्शन आयोजित कर रहे हैं, सरकार के प्रवक्ता इस कदम को जायज़ ठहराने के लिए इस तरह के तथाकथित तर्क पेश कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने दावा किया है कि

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