मज़दूर एकता लहर

  • केंद्रीय बजट 2023-24 :
    पूंजीपतियों को मालामाल करने के लिए मेहनतकश जनता की लूट बढ़ाने की कवायद

    हर साल की तरह, अब भी केंद्रीय बजट की प्रस्तुति के समय हिन्दोस्तानी और विदेशी इजारेदार पूंजीपतियों की विभिन्न लॉबियां (दबाव गुट) कॉरपोरेट टैक्स में और ज्यादा कटौती तथा सरकार से और ज्यादा रियायतों की मांग उठाती रही हैं। इसके लिए वे यह तर्क पेश कर रहे हैं कि जब वैश्विक अर्थव्यवस्था की गति धीमी हो रही है, तो हिन्दोस्तानी अर्थव्यवस्था के तेज़ गति से बढ़ते रहने के लिए पूंजीपतियों को अधिक “प्रोत्साहन“ की आवश्यकता है।


  • फ़सल बीमा भुगतान के मुद्दे पर नोहर के किसानों का जबरदस्त संघर्ष

    किसानों का अनुभव रहा है कि जब उनकी फ़सलों को नुक़सान हो जाता है तो उनके बीमा क्लेम का पूरा भुगतान नहीं किया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया है कि बीमा कंपनियां सरकार से मिलीभगत करके किसानों के बीमा क्लेम में कटौती करती हैं। इसीलिये उन्होंने मांग की है कि क्रॉप कटिंग के आंकड़ों को सार्वजनिक किया जाये और इसके आधार पर किसानों को पूरा बीमा क्लेम दिया जाये।


  • राजस्थान के राज्य कर्मचारियों ने सरकार को दी चेतावनी

    राजस्थान के लगभग आठ लाख सरकारी कर्मचारियों का आंदोलन कई महीनों से जोर पकड़ रहा है। इसे सफल बनाने के लिये राजस्थान के विभिन्न जिलों में अनेक सरकारी कर्मचारी संगठन तैयारी करते आये हैं। जैसे कि हनुमानगढ़ में 18 जनवरी को संयुक्त कर्मचारी महासंघ की ओर से विभिन्न मांगों को लेकर कलक्ट्रेट के सामने विरोध प्रदर्शन किया गया था जहां पर अपनी मांगों के संबंध में मुख्यमंत्री के नाम कलक्टर को ज्ञापन दिया गया था।

  • राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन :
    सरकार अपने नापाक लक्ष्य को हासिल करने में नाकाम

    राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन, पूंजीपतियों के निजीकरण के कार्यक्रम का एक प्रमुख हिस्सा है। इसका उद्देश्य है पूरे समाज की खनिज सम्पदा को, भूमि व बुनियादी ढांचे की संपत्ति को, इजारेदार पूंजीपतियों को सौंपना। इन बुनियादी ढांचे की संपत्तियों का निर्माण, मज़दूरों की अनेक पीढ़ियों के श्रम द्वारा किया गया है।


  • फ्रांस में दस लाख से अधिक कर्मचारियों ने हड़ताल की

    19 जनवरी, 2023 को पूरे फ्रांस में एक दिन की हड़ताल हुई। दस लाख से अधिक की संख्या में मज़दूरों ने अपनी ट्रेड यूनियन संबद्धताओं को दरकिनार करते हुये एकजुट होकर भाग लिया। वे फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन की सेवानिवृत्ति की क़ानूनी उम्र को 62 से बढ़ाकर 64 करने की योजना का विरोध कर रहे थे। जिससे उन्हें अगले दो वर्षों के लिए उनकी देय पेंशन से वंचित कर दिया गया।


  • अपनी मातृभूमि के लिए फिलिस्तीनी लोगों का बहादुर संघर्ष जारी है

    वर्ष 2022 ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि किसी भी प्रकार का दमन फिलिस्तीनी लोगों की अदम्य भावना और अपनी मातृभूमि के लिए चले आ रहे उनके लंबे समय के संघर्ष को कुचल नहीं सकता।

  • मज़दूर एकता कमेटी द्वारा आयोजित सभा :
    जानलेवा शराब फैक्ट्री के ख़िलाफ़ पंजाब के लोगों का संघर्ष

    पंजाब में ज़ीरा तहसील, फिरोजपुर के मंसूरवाल गांव और उसके आस-पास के क्षेत्रों के किसान, शराब बनाने वाली एक फैक्ट्री, मालब्रोस इंटरनेशनल लिमिटेड, के ख़िलाफ़ बीते पांच महीने से अधिक समय से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वहां के रहने वाले सब लोग, अपने भूजल, मिट्टी और पर्यावरण पर, शराब कारखाने से निकलने वाले गंदे पानी के द्वारा पैदा हुए ख़तरनाक प्रदूषण का विरोध कर रहे हैं।


  • अमेज़न द्वारा दुनिया भर में हजारों मज़दूरों की बड़े पैमाने पर छंटनी

    2022 के ख़त्म होते-होते अमेज़न ने वैश्विक स्तर पर हजारों कर्मचारियों की छंटनी शुरू कर दी। उस विशाल कंपनी ने घाटे का हवाला देते हुए अपने विभिन्न व्यवसायों में नौकरियों में कटौती की है। अमेज़न की 15 लाख से अधिक की कुल मज़दूर संख्या का लगभग 7 प्रतिशत हिन्दोस्तान में हैं। जनवरी 2023 की शुरुआत में यह बताया गया कि हिन्दोस्तान में अमेज़न के 18,000 कर्मचारियों को सितंबर 2022 में निकाल दिया गया था।

  • छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य जंगलों में कोयला खनन :
    इजारेदार पूंजीपतियों की लालच को पूरा करना

    हिन्दोस्तानी राज्य इजारेदार पूंजीपतियों के अधिकतम मुनाफ़े कमाने की इच्छा को पूरा करने के लिए काम करता है। राज्य के सभी अंग – केंद्र और राज्य सरकारें, न्यायपालिका, संसद और राज्य विधान सभाएं, हुक्मरान वर्ग की प्रमुख पार्टियां – इजारेदार पूंजीवादी लालच को पूरा करने के लिए वचनबद्ध हैं।

  • हिन्दोस्तानी गणतंत्र की 73वीं सालगिरह  पर :
    इस गणतंत्र का मक़सद है मेहनतकश लोगों को सत्ता से बाहर रखना 

    हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति का बयान, 18 जनवरी, 2023

    लोगों को क़ानूनों को प्रस्तावित करने और क़ानूनों को ख़ारिज करने का अधिकार होना चाहिए। उन्हें संविधान में संशोधन करने या उसे दोबारा लिखने का अधिकार होना चाहिए। हमें चुनाव के लिए उम्मीदवारों का चयन करने, चुने गए लोगों को जवाबदेह ठहराने और उन्हें किसी भी समय वापस बुलाने और क़ानून प्रस्तावित करने का अधिकार होना चाहिए। लोगों के नाम पर फै़सले लेने के बजाय, राजनीतिक पार्टियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कर्तव्यबद्ध होना चाहिए, कि फ़ैसले लेने की शक्ति लोगों के हाथों में रहे।

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