अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर वर्ग दिवस, मई दिवस ज़िंदाबाद!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी का आह्वान, 1 मई, 2021

मज़दूर साथियों,

आज मई दिवस, अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर वर्ग दिवस है। बीते 131 वर्षों से, सारी दुनिया में मज़दूर अपने वर्ग के इस दिवस पर जश्न मनाते आ रहे हैं। हम अपनी जीतों पर खुशियां मनाते हैं और अपनी हारों से सबक लेते हैं, ताकि अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ सकें। हम अपनी फौरी आर्थिक और राजनीतिक मांगों के लिए संघर्ष करते हैं और साथ-साथ, एक शोषण-दमन से मुक्त, नए समाजवादी समाज का निर्माण करने के अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए भी संघर्ष करते हैं।

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कोरोना वायरस महामारी की तबाही : सरासर जन-विरोधी व्यवस्था के घातक परिणाम हमारे सामने!

देश में मौजूदा स्वास्थ्य-सेवा व्यवस्था के पूरी तरह से नाकाम और निष्क्रिय होने के बाद पूरे देश में मौत और तबाही ही नज़र आती है।

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भारतीय रेल का निजीकरण – भाग-2 : रेलवे का निजीकरण – किसके हित में?

भारतीय रेल का निजीकरण देशी और विदेशी इजारेदार पूंजीपतियों के इशारे पर किया जा रहा है। ये पूंजीपति सस्ते दामों पर भारतीय रेल के विशाल बुनियादी ढांचे, भूमि और प्रशिक्षित मज़दूरों का अधिग्रहण करना चाहते हैं। दशकों से सत्ता में रही सभी पार्टियों द्वारा क़दम-दर-क़दम अपनाए गए निजीकरण का असली कारण यही है।

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भारतीय रेल का निजीकरण भाग-1 : भारतीय रेल के निजीकरण के ख़िलाफ़ बढ़ता विरोध

भारतीय रेल हमारे देश की जीवन रेखा है जिसमें हर वर्ष लगभग 800 करोड़ लोग यात्रा करते हैं। चाहे कार्यस्थल हो या फिर गृह नगर या गांव के बीच, करोड़ों मज़दूरों के लिए वह लंबी दूरी की यात्रा का एकमात्र विश्वसनीय और किफ़ायती साधन है।

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किसान आंदोलन ने अपना संघर्ष तेज़ किया

किसान आंदोलन ने घोषणा की है कि किसान-विरोधी तीन कानूनों को वापस लेने और सभी फ़सलों के लिए कानूनी न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी के लिए वे अपने आंदोलन को तेज़ करेंगे। उन्होंने फिर से दिल्ली की ओर कूच करने का आह्वान किया है – फिर दिल्ली चलो। 20 अप्रैल से ही हजारों किसान अपने गावों से निकलकर फिर से दिल्ली की ओर चल पड़े हैं। 23 अप्रैल को पंजाब गवर्नमेंट टीचर्स एसोसिएशन के 100 से भी अधिक शिक्षक टिकरी बॉर्डर पहुंचे।

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ईरान के परमाणु संसाधनों पर इस्राइल का हमला युद्ध के एक ऐलान से कम नहीं है

11 अप्रैल को एक विनाशकारी साइबर-हमले ने ईरान के सबसे बड़े परमाणु संसाधनों में से एक को बंद करने के लिए मजबूर कर दिया। ईरानी सरकार ने इसे “आतंकवादी हमला” कहा है और हमले के लिए इस्राइल को दोषी ठहराया है। हमले के कुछ ही घंटे बाद, नटंज़ रिएक्टर के वैज्ञानिकों ने उन्नत यूरेनियम के उत्पादन में तेज़ी लाने के उद्देश्य से रिएक्टर के यूरेनियम संवर्धन संयत्रों को फिर से शुरू कर लिया।

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ऐमज़ान के लुटेरी और एकाधिकार जमाने की हरकतों के ख़िलाफ़ छोटे व्यापारियों का आंदोलन

15 अप्रैल को हिन्दोस्तान के लाखों छोटे व्यापारियों और व्यवसायिकों ने ऐमज़ान डॉट कॉम जैसी बड़ी एकाधिकार वाली ई-कॉमर्स कंपनियों के ख़िलाफ़ एक धरना आयोजित किया था।

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सरकार की निजीकरण या निगमीकरण की नीतियों पर विराम लगाने में सफल संघर्ष

कामगार एकता कमेटी द्वारा आयोजित “निजीकरण के ख़िलाफ़ एकजुट हों!” श्रृंखला की 10वीं सभा

निजीकरण के ख़िलाफ़ संघर्ष का एक लम्बा इतिहास है। तब के प्रधानमंत्री नरसिंहा राव ने जब से निजीकरण तथा उदारीकरण द्वारा वैश्विकरण का कार्यक्रम लागू करना शुरू किया था, तब से ही अपने देश का मज़दूर वर्ग इसका विरोध करने में आगुवाई में रहा है। निजीकरण के विरोध में मज़दूरों के संघर्ष को चूर-चूर करने के लिए सत्ताधारी पूंजीपति वर्ग ने अनेक दांवपेंच अपनाये हैं। उसका कपटी ध्येय है निजीकरण का विरोध करने वाले मज़दूरों में फूट डालना।

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रेलवे मज़दूरों के कार्य की परिस्थिति: सिग्नल एंड टेलिकॉम के मज़दूर

आम तौर पर भले ही वे यात्रियों के संपर्क में न आते हों, लेकिन गाड़ियों के संचालन में सिग्नल एंड टेलिकॉम (एस. एंड टी.) के मज़दूरों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। भारतीय रेल का सिग्नल एंड टेलिकॉम विभाग यह सुनिश्चित करता है कि गाड़ियां ठीक समय पर और सकुशल अपने गंतव्य स्थानों पर पहुंचें।

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हमारे पाठकों से: पेरिस कम्यून 150वीं वर्षगांठ 

मज़दूर एकता लहर द्वारा 10 अप्रैल को प्रकाशित लेख को पढ़ा, इसेे पढ़कर मानों धमनियों में रक्त के संचार की गति बहुत तीव्र हो गई। यह लेख ऐतिहासिक होने के साथ-साथ आज के लिए प्रासंगिक भी है। वर्तमान पूंजीवादी साम्राज्यवादी राज्य और उसके द्वारा खड़े किये गये स्तंभ तो सिर्फ यह प्रचार करने में लगे हैं कि यही अंतिम उन्नत व्यवस्था है और पूंजीवादी व्यवस्था का कोई विकल्प नहीं है। अधिकांश पूंजीवादी पंडित समाज बनाने के लिए जिस रूपरेखा की बात करते हैं, दरअसल उसके अवशेष पेरिस कम्यून और बोल्शेविक क्रांति में निहित हैं…

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