हमारे पाठकों से
1857 के ग़दर की 165वीं सालगिरह

संपादक महोदय,

1857 के ग़दर की 165वीं सालगिरह के अवसर पर जो लेख मई के अंक में प्रकाशित किया गया है, मैं उसके बारे में लिख रहा हूं। आज के वर्तमान दौर की हालतों को देखते हुए यह पूरी तरह से सच है कि अब भी वही अंग्रजों द्वारा बनाई गई नीतियों के तहत लोगों में जाति और धर्म के नाम पर फूट डालो, बांटो और राज करो के हथकंडों को ही अपनाया जा रहा है। इनके खि़लाफ़ आज भी संघर्ष चल रहा है।

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हमारे पाठकों से :
लेखों को सुनिए

हमारी कोशिश यही रहती है कि यह पेपर ज्यादा से ज्यादा फैले। मेहनतकश व किसानों को जितना ज्यादा हम समझा पाऐंगे उतना ही अच्छा है। इसी दिशा में जो एक कदम उठाया गया है वह  मुझे बहुत ही अच्छा लगा। हमारी वेबसाईट पर “लेखों को सुनिए” नामक नया सेक्शन बना है जहां कुछ महत्त्वपुर्ण लेख तथा बयान हमें ऑडियो के माध्यम से उपलब्ध हुए हैं।

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धर्म के नाम पर हुक्मरानों की भटकाऊ और भड़काऊ हरकतें

सरकारी ओहदेदार, मंत्री, उनके काम से जुड़ी एजेंसियां व संगठन अत्यंत घटिया स्तर के दांवपेंच अपना रहे हैं। लोगों में फूट डालने, नफ़रत व डर फैलाने के तरीक़ों का सहारा ले रहे हैं ताकि नौजवान तबका व व्यापक समाज, मंहगाई, बेरोज़गारी पर सरकार से सवाल न करे।

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बाबरी मस्जिद के विध्वंस के 29 वर्ष बाद

संपादक महोदय,

हिन्दोस्तान और दुनिया का पूंजीपति वर्ग निजीकरण के कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की दिशा में देश की आम जनता में अनेकों हथकंडों का इस्तेमाल करके मज़दूरों और किसानों की एकता को तोड़ने का काम हमेशा करता रहता है।

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पूंजीपति वर्ग श्रमिक वर्ग के राजनीतिक अधिकारों का हनन कर रहा है

‘उदारीकरण और निजीकरण के तीस साल बाद’ तथा ‘सर्व हिन्द निजीकरण विरोधी मंच’ (ए.आई.एफ.ए.पी.) की स्थापना की रिपोर्ट, ये दोनों ही लेख मौजूदा हालात को देखते हुए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

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हमारे पाठकों से : लेनिन और समाजवाद का निर्माण

बोल्शेविक पार्टी ने 7 नवम्बर, 1917 को अंतरिम सरकार को गिरफ़्तार करने के साथ ही देश के वित्त, संचार, परिवहन के सभी साधनों पर कब्ज़ा कर लिया। वित्त संस्थानों पर कब्ज़ा न करना, जो पेरिस कम्यून की असफलता का एक मुख्य कारण था, उस सबक को बोल्शेविक पार्टी ने याद रखा।

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हमारे पाठकों से: मजदूर वर्ग की एकता, वक्त की एक अविलंब जरूरत

मैं 4 जुलाई 2020 को प्रकाशित “मजदूर वर्ग की एकता, वक्त की एक अविलंब जरूरत” शीर्षक वाले सी.सी. स्टेटमेंट के जवाब में यह पत्र लिख रही हूँ। लेख में अपने हकों की लड़ाई लड़ने के लिए मज़दूर वर्ग की एकता के आह्र्वान से में पूरी तरह सहमत हूँ।

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हमारे पाठकों से : वैक्सीन उत्पादन पर इजारेदारी अधिकारों का विरोध किया जाना चाहिए!

मैं यह पत्र 13 मई, 2021 को हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित “वैक्सीन उत्पादन पर इजारेदारी अधिकारों का विरोध किया जाना चाहिए!” शीर्षक वाले लेख के सन्दर्भ में लिख रही हूं। लेख बहुत ही सही समय पर लिखा गया है और बड़ी फार्मा कंपनियों की घिनौनी हरकतों को, जिनका उपयोग वे हमेशा से अपने फायदे के लिए करते आए हैं और इस बार फिर कर रहे हैं, उनको सामने लाता है।

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हमारे पाठकों से: भारत की टीकाकरण नीति – स्वास्थ्य सेवा के निजीकरण की दिशा में बढ़ता एक और कदम

“कोविड टीकाकरण का निजीकरण जनविरोधी है” लेख में सही बयान किया गया है कि भारत की नई वैक्सीन नीति लोगों के कल्याण के लिए नहीं बल्कि निजी वैक्सीन उत्पादकों और निजी अस्पतालों के लाभ के लिए बनाई गई है।

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हमारे पाठकों से : भारतीय रेल का निजीकरण

मजदूर एकता लहर द्वारा प्रकाशित लेख, ‘भारतीय रेल का निजीकरण’ भाग 1 और भाग 2 में बहुत ही बारीकी और महत्वपूर्ण जानकारी पेश की है, जिससे आम लोगों तक इस जागरूकता को फैलाया जा सकता है कि भारतीय रेल के निजीकरण की असली वजह को छुपाया जाता रहा हैI

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