अपने असूलों पर अटल रहें!

सेवा में,

संपादक जी,

मजदूर एकता लहर,

मैनें हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह, के द्वारा नव वर्ष 2012की शुभकामनाओं के संदेश को पढ़ा।

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भूमि अधिग्रहण के खिलाफ़ आंदोलन

28 दिसम्बर, 2010 को हरियाणा के जिला फतेहाबाद के आंदोलनकारी किसानों ने भागूराम की पार्थिव शरीर को लेकर लघु सचिवालय पर धरना दिया और राष्ट्रीय राजमार्ग 10 को जाम कर दिया।
विदित है कि गांव गोरखपुर के किसान, परमाणु ऊर्जा संयंत्र के लिए सरकार द्वारा अपनी भूमि के अधिग्रहण के खिलाफ, किसान संघर्ष समिति (गोरखपुर) की अगुवाई में 12 अगस्त, 2010 से लगातार संघर्ष कर रहे हैं। ग

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नर्सों का संघर्ष

27 दिसम्बर, 2010 को मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पताल की 2500 नर्सों ने हड़ताल की। वह वेतन में बढ़ोतरी और काम के हालातों को सुधारने की मांग कर रही थीं। मध्य प्रदेश सरकार ने नर्सों पर हमला करने के लिए एस्मा (एस्सेंशियल सर्विसेस मैनटनन्स एक्ट) का इस्तेमाल किया। 
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लवासा परियोजना के खिलाफ संघर्ष

महाराष्ट्र में पुणे के नजदीक लवासा परियोजना का विरोध कर रही एक महिला के घर पर बम धमाका किये जाने की मजदूर एकता लहर निंदा करती है। इस बम धमाके में इस महिला का घर और सारा सामान बर्बाद हो गया। महिला कार्यकर्ता ने यह आरोप लगाया है कि यह बम धमाका इस विवादात्मक परियोजना के मालिकों द्वारा इसका विरोध करने वालों को आतंकित करने के लिए आयोजित किया गया है।
लवासा परियोजना महाराष्ट्र में पुणे क

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खनन क़ानून में संशोधन

केंद्रीय श्रम मंत्री ने यह ऐलान किया है कि आने वाले संसद सत्र में खनन क़ानून में संशोधन किया जाएगा। इस संशोधन में से एक प्रस्तावित संशोधन यह है कि किसी भी दुर्घटना के लिए खान के मालिक को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। यह प्रस्तावित संशोधन मजदूरों की मांग पर शामिल किया गया है। वर्तमान क़ानून के मुताबिक दुर्घटना की जिम्मेदारी मैनेजर और सुपरवाईजर पर डाली जाती है। दूसरा प्रस्तावित संशोधन के मुताबिक गैरकान

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कारवार में बंद

कारवार कर्नाटक में 21 मजदूर यूनियनों और असोसिएशन के मजदूरों ने 6 जनवरी 2011 को बी.एल.आई.टी. के मजदूरों के समर्थन में बंद आयोजित किया। बी.एल.आई.टी. के मजदूर पिछले 90 दिनों से वेतन में बढ़ोतरी की मांग को लेकर हड़ताल कर रहे हैं।
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असबेस्टस के शिकार लोगों ने प्रदर्शन किया

राजस्थान में उदयपुर जिले में झाडोल के असबेस्टस खान के सैकड़ों मजदूरों ने अहमदाबाद स्थित नेशनल इंस्टिटयूट ऑॅफ़ ओक्युपेश्नल हेल्थ (एन.आई.ओ.एच) के सामने 4 जनवरी, 2011 से चार दिन का धरना दिया। विदित है कि इस संस्थान ने पिछले साल असबेस्टस खान मजदूरों के स्वास्थ्य पर एक रिपोर्ट बनाने का ऐलान किया था। राजस्थान राज्य के खान मजदूर यूनियन के मुताबिक इस रिपोर्ट में यह पाया गया है कि 164 मजदूरों में

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दिंडीगुल के हस्तकरघा मज़दूर

हमारे दिंडीगुल संवाददाता के अनुसार, नागल नगर के करीब 35,000 हस्तकरघा मज़दूरों के पास कोई नौकरी नहीं है और करीब 7,000 हस्तकरघे रुके पड़े हैं। इसका कारण, साड़ियों को बुनने के लिये सूत और रेशम के धागे जैसे कच्चे माल की कीमतों में बहुत उतार-चढ़ाव, है। यहां की बनी साड़ियां तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र और ओडिसा में बेची जाती हैं और इनके व्यापार में सालाना 100 करोड़ रु.

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दवाई युनिटों में मजदूरों का संघर्ष

गोवा में दवाई बनाने वाली कंपनी के वेरना स्थित तीन युनिटों के तालाबंदी किये जाने के खिलाफ़ सैकड़ों मजदूरों ने युनिटों के गेट को बंद कर दिया और वाहनों को फैक्ट्री से बाहर जाने से रोका। इससे पहले तालाबंदी की गयी तीन युनिटों – ऑर्किड, कुअलप्रो और झेफिर के मजदूरों ने न्याय की मांग करते हुए मारगोवा के श्रम आयुक्त के दफ्तर पर प्रदर्शन आयोजित किया। मैनेजमेंट ने तालाबंदी का ऐलान तब किया जब मजदूरों

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