यह धर्म-युद्ध है मज़दूरों और किसानों का, अधर्मी राज्य के ख़िलाफ़!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 10 जनवरी, 2021

आज हमारे देश और पूरी दुनिया को हमारी सरकार और देश की बहुसंख्यक आबादी, किसानों और मजदूरों, के बीच में एक ऐसा विवाद नज़र आ रहा है, जिसका कोई हल नहीं दिखता है। 26 नवम्बर से दिल्ली की सीमाओं पर ऐसा विशाल जन-विरोध चल रहा है, जिसका इससे पहले किसी को अनुमान न था। जन-विरोध की फौरी मांगों में मुख्य मांग यह है कि उन तीनों कानूनों को रद्द किया जाये, जिन्हें संसद में पारित किया गया था और जिनके लागू होने पर इजारेदार पूंजीवादी कॉर्पोरेट घराने कृषि क्षेत्र पर पूरी तरह हावी हो जायेंगे।

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2020 में हिन्दोस्तान: हुक्मरान वर्ग के हमलों के ख़िलाफ़ लोगों के तेज़ होते संघर्षों का साल

वर्ष 2020 का आगाज़ नागरिकता संशोधन कानून (सी.ए.ए.) और प्रस्तावित नागरिकों का राष्ट्रीय रजिस्टर (एन.आर.सी.) के खिलाफ़ जन-विरोधों के साथ हुआ। दिसंबर 2019 में जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय और शाहीन बाग से शुरू होकर ये जन-विरोध देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालय परिसरों और शहरों में तेज़ी से फैल गया। तमाम समाजिक बंधनों को ठुकराते हुए युवतियों और वृद्ध महिलाओं ने इस

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मज़दूर-किसान एकता ज़िंदाबाद!

मज़दूरों-किसानों को देश का असली मालिक बनाने के लिये संघर्ष को तेज़ करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान, 5 जनवरी, 2021

देशभर में मज़दूर और किसान पूंजीपतियों और उनके राज्य द्वारा अपने अधिकारों पर किये जा रहे वहशी हमलों के ख़िलाफ़ संघर्ष में उतर रहे हैं।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की स्थापना की 40वीं वर्षगांठ पर उत्साहपूर्ण समारोह

सरकार की मज़दूर-विरोधी और किसान-विरोधी नीतियों के ख़िलाफ़ मज़दूरों और किसानों के अभूतपूर्व और एकजुट संघर्ष की पृष्ठभूमि में पार्टी की वर्षगांठ मनाई गयी। हर जगह की बैठकों में साथियों का उत्साह नज़र आ रहा था जो न केवल पिछले वर्ष, बल्कि दशकों से मज़दूर वर्ग और किसानों के बीच पार्टी को बनाने के लिए कड़ी मेहनत से काम करते आ रहे हैं।

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किसान-विरोधी कानूनों को रद्द कराने के लिए किसानों ने पूरे देश में आंदोलन तेज़ किया

सिंघू, टिकरी, गाजीपुर, चिल्ला, धूना, औचंदी, पियू मनारी और सबोली सहित दिल्ली की सीमाओं के विभिन्न विरोध स्थलों पर जारी किसानों के विरोध प्रदर्शन ने 30 दिसंबर को 35वें दिन में प्रवेश किया। शाहजहांपुर और राजस्थान के पास राजस्थान-हरियाणा सीमा पर और पलवल के पास उत्तर प्रदेश-हरियाणा सीमा पर भी विरोध प्रदर्शन जारी है।

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एयर इंडिया के पायलटों ने अपने वेतन में कटौती का विरोध किया

एयर इंडिया के पायलटों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों, इंडियन पायलट्स गिल्ड (आई.पी.जी.) और इंडियन कमर्शियल पायलट एसोसिएशन (आई.सी.पी.ए.) ने इस बात पर प्रतिरोध किया है कि सरकार ने उनके वेतन में की गई काटौती का सिर्फ 5 प्रतिशत कम करने का प्रस्ताव पेश किया है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि यदि वेतन में कटौती को जल्दी से जल्दी वापस नहीं लिया गया तो वे हड़ताल पर जाने के लिए मजबूर होंगे।

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केंद्रीय मंत्री का दावा झूठा कि चीनी पर निर्यात सब्सिडी से गन्ना किसानों को होगा फ़ायदा

केंद्रीय मंत्री यह बता रहे हैं कि यह सब्सिडी गन्ना किसानों को मिलेगी, जबकि असलियत तो यह है कि चीनी का निर्यात चीनी मिल के पूंजीपति मालिक करते हैं और यह निर्यात सब्सिडी उन्हें ही मिलेगी।

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विस्ट्रों और टोयोटा किर्लोस्कर मोटर्स के मज़दूर हड़ताल पर: बढ़ते शोषण के ख़िलाफ़ लड़ाकू प्रतिरोध

हिन्दोस्तानी और विदेशी बड़े पूंजीपतियों के लिए हर क़ीमत पर “व्यापार के अनुकूल” माहौल बनाने की मोदी सरकार की कोशिशों को कर्नाटक के मज़दूरों की ओर से जबरदस्त लड़ाकू चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

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किसान-विरोधी कानूनों के खिलाफ़ लोक राज संगठन द्वारा आयोजित विचार गोष्ठी

राजस्थान के रामगढ़ की कुम्हार धर्मशाला में 23 दिसंबर को किसान दिवस के अवसर पर, केंद्र के कृषि कानूनों के विरोध में लोक राज संगठन द्वारा किसान सभा का आयोजन किया गया। इसमें दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलित 35 किसान शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद, किसानों की दशा और दिशा पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। विचार

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सुप्रीम कोर्ट के प्रस्ताव और किसान आन्दोलन का जवाब

सुप्रीम कोर्ट के प्रस्तावों का बस एक ही मकसद है, कि सरकार को थोड़ा और वक्त दिलाना, किसानों को कड़ाके की ठंड में इतने दिनों तक बाहर बैठे रहने को मजबूर करके, उन्हें बदनाम करके, उनकी एकता को तोड़ने की कोशिश करके, किसानों को थका देने और उनकी हिम्मत को तोड़ने के लिए सरकार को और वक्त दिलाना।

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