दुनियाभर के मज़दूर कोविड-19 के लॉकडाउन के दौरान अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं

बेल्जियम

डॉक्टरों और नर्सों ने अप्रशिक्षित कर्मचारियों के काम में लगाये जाने के खि़लाफ़ विरोध किया

17 मई को बेल्जियम के डॉक्टरों और नर्सों ने, स्वास्थ्य-सेवाओं में अप्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ को काम में लगाये जाने के, बेल्जियम सरकार के फरमान के खि़लाफ़ एक मूक लेकिन शक्तिशाली विरोध प्रदर्शन किया।

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बेल्जियम में डॉक्टरों और नर्सों का प्रदर्शन

बेल्जियम की प्रधानमंत्री सुश्री सोफी विल्मेस की ब्रसेल्स में सेंट पीटर अस्पताल की यात्रा के दौरान, डॉक्टरों और नर्सों ने अस्पताल के प्रवेश द्वार के दोनों ओर दो पंक्तियों में खड़े होकर अपना विरोध प्रदर्शन किया। और जैसे ही प्रधानमंत्री की कार अस्पताल के प्रवेश द्वार के पास पहुंची, उनमें से प्रत्येक ने अपने स्थान में खड़े रहकर, उलट कर अपनी पीठ दिखाकर अपना विरोध प्रकट किया। इस मूक लेकिन बहुत ही जबरदस्त विरोध को व्यापक रूप से मीडिया में भी प्रसारित किया गया।

बेल्जियम की नर्सों की जनरल यूनियन ने सरकार के इस आदेश को नर्सों का अपमान और “नर्सों के मुंह पर थप्पड़” मारने के जैसा व्यवहार कहकर उसका विरोध किया।

देश के बारह अस्पतालों के डॉक्टरों और नर्सों ने सरकार से इस फैसले को वापस लेने का आह्वान किया है।

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया है कि मरीजों के देख-रेख करने के लिए न केवल नर्सों को अच्छी तरह प्रशिक्षित किया जाता है और जिसकी सख़्त ज़रूरत है, बल्कि इस महामारी की परिस्थितियों में वे सब अत्यधिक कठिन काम कर रही हैं।

वास्तव में बेल्जियम में कोविड मरीजों की बहुत ही दयनीय स्थिति है। बेल्जियम में प्रति 100,000 लोगों में 66 मौतें दर्ज़ की गई हैं; और इस तरह बेल्जियम की गिनती, दुनिया में सबसे अधिक कोविड मौतों वाले देशों में की जाती है। अब तक बेल्जियम में 9,000 से अधिक लोगों ने कोविड के कारण अपनी जान गवां दी है। 55,000 से अधिक लोग इस महामारी से संक्रमित पाए गये हैं इसकी तुलना में अमेरिका, जिसकी गिनती भी महामारी से बुरी तरह प्रभावित देशों में की जाती है वहां पर प्रति 100,000 लोगों पर लगभग 19 मौतें दर्ज की गई हैं। इससे पहले भी बेल्जियम में डॉक्टरों और नर्सों ने बजट कटौती और कम वेतन जैसी सरकार की नीतियों का विरोध किया है।

इंग्लैंड (यूनाइटेड किंगडम)

स्कूल के शिक्षकों की यूनियनों ने स्कूलों को जल्दीखोलने का विरोध किया

10 मई को बर्तानवी प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने एक अप्रत्याशित घोषणा की कि इंग्लैंड में, 1 जून से स्कूल खुल जायेंगे और दोनो शिक्षक और छात्र स्कूल में आना शुरू कर देंगे। इस ख़बर ने सभी शिक्षक यूनियनों और पूरे देश में स्कूलों में जाने वाले शिक्षकों और छात्रों को चैंका दिया क्योंकि न तो सरकार ने और न ही शिक्षा राज्य मंत्री ने इस तिथि को निर्धारित करने से पहले किसी भी शिक्षण संघ के साथ परामर्श किया था। यूनियनों और स्कूल प्रशासनों ने सरकार से मांग की है कि उसे, शिक्षकों, कर्मचारियों, छोटे बच्चों और उनके संपर्क में आने वाले अन्य लोगों की सुरक्षा से जुड़े, इस तरह के गंभीर फैसले लेने से पहले, उनसे सलाह लेनी चाहिए।

13 मई को नौ शिक्षकों और स्कूल में काम करने वाले कर्मचारियों की यूनियनों ने एक संयुक्त बयान जारी किया। उन्होंने सरकार से स्कूल खोलने की 1 जून की तारीख को आगे बढ़ाने की मांग की। उन्होंने कहा कि वे निश्चित रूप से स्कूलों को फिर से खोलना चाहते थे लेकिन ऐसा करने के लिए सभी की सुरक्षा सुनिश्चित होने पर ही। उन्होंने सरकार को बताया कि सरकार स्कूलों के भीतर, कोरोनोवायरस के संक्रमण के बढ़ने के खतरों को नजरंदाज कर रही है। स्कूल में संक्रमित होकर बच्चे घर लौटने के बाद अपने माता-पिता, भाई-बहनों और छात्रों के रिश्तेदारों के साथ-साथ व्यापक समुदाय में इस संक्रमण के फैलाने के साधन बन सकते हैं। उन्होंने अपने सभी सदस्यों की तरफ से अत्यधिक चिंता व्यक्त की कि स्कूल के कर्मचारी भी, कम से कम दो मीटर के दूरी रखने के निर्देशों का पालन नहीं कर सकते और इसलिए वे अपने को सुरक्षित नहीं महसूस करते और उन्हें इस बात की भी चिंता है कि कक्षाओं में छात्र, विशेष रूप से जिनमें छोटे-छोटे बच्चे पढ़तें हैं, वे सब कोविड-19 के संक्रमण के प्रसारण का स्रोत हो सकते हैं।

शिक्षकों ने बताया कि स्कूलों को खोलने की किसी भी तारीख को निर्धारित करने के लिए, कोविड संक्रमण के फैलने के ख़तरे के बारे में पहले पर्याप्त जानकारी इकट्ठा करने की सख़्त ज़रूरत है; और उन्होंने उन सभी सिद्धांतों और परीक्षणों को दोहराया जो स्कूलों के फिर से खुलने से पहले होने चाहिए। उनकी सबसे बड़ी चिंता सभी विद्यार्थियों और कर्मचारियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को बनाए रखना है। ऐसा करने के लिए यूनियनों ने सभी स्कूलों, नर्सरी और कॉलेजों में कोविड के विश्वसनीय टेस्ट, ट्रैक और ट्रेस प्रक्रियाओं के साथ-साथ, सभी स्कूलों के लिए अतिरिक्त संसाधनों और व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों (पीपीई) का इन्तज़ाम करने की भी मांग की है। उन्होंने सरकार से स्कूलों, यूनियनों के साथ मिल कर एक कोविड-19 एजुकेशन टास्कफोर्स बनाने की मांग की है। इस टास्कफोर्स का मक़सद होगा कि शिक्षण संस्थानों, स्कूलों के खुलने और उनको चलाने के दौरान, स्कूलों से जुड़े सभी लोगों की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपायों पर चर्चा करे और उनकी व्यवस्था करने के लिए तुरन्त आवश्यक क़दम उठाये।

ब्राजील

कोविड-19 से संक्रमित लोगों की संख्या में दुनिया में तीसरे नंबर के देश ब्राजील में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े मज़दूरों का संघर्ष

इस समय ब्राजील दुनिया में तीसरे सबसे अधिक कोविड-19 के संक्रमण से प्रभावित लोगों वाला देश है और महामारी का सबसे अधिक बोझ, स्वाभाविक रूप से स्वास्थ्य कर्मचारियों पर पड़ा है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य के संबंध में कुल मिलाकर ब्राजील में स्थिति बहुत खराब है और उन क्षेत्रों में जहां मज़दूर रहते हैं वहां तो स्थिति और भी बदतर है, कुछ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं न के बराबर हैं। सोमवार 18 मई को प्रदर्शनकारियों ने साओ पाउलो के सबसे बड़े और सबसे ग़रीब इलाकों में से एक पराइसपोलिस से अपना विरोध मार्च शुरू किया और राज्य सरकार की सीट, पलासिओ डॉस बंदेइरेंटेस तक मार्च किया। मार्च करने वाले लोग, सरकार का विरोध कर रहे थे जिसने उन्हें भूखा रखा, पानी की लगातार कमी और स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित करके भिखारियों की ज़िन्दगी जीने को मजबूर किया है। जैसा कि संभावना थी, सैन्य पुलिस के सैनिकों द्वारा इस प्रदर्शन को रोका गया।

रियो डी जनेरियो में 30,000 से अधिक संक्रमित लोगों और इस संक्रमण से होने वाली 3,000 मौतों की पुष्टि की गई है। ऐसा अनुमान भी लगाया जा रहा है कि हक़ीक़त में, कोविड-19 की वजह से होने वाली मौतों की संख्या सरकारी आंकड़ों से दुगनी है। मई की शुरुआत में ही राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो गई थी। 2 मई को पुराक्वेरा जेल इकाई में एक हिंसक विरोध प्रदर्शन हुआ जिसमें कैदियों ने, उनको दिए जाने वाले सड़े हुए भोजन और जेल प्रशासन द्वारा दी जाने वाली किसी भी तरह की चिकित्सा सहायता के अभाव के खि़लाफ़ अपना गुस्सा प्रकट किया। पुनः सोमवार 18 मई को ब्राजील के उत्तर-पूर्व में बाहिया और पियाउई दोनों राज्यों में कैदियों के परिवारों ने जेल में कैद अपने रिश्तेदारों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए विरोध प्रदर्शन किया, उनके हाथों में पोस्टरों पर लिखा था: “कैदियों के भी अधिकार होते हैं” और “कोरोना वायरस उनको भी मारता है।”

उसी दिन (18 मई) को टेरीसिना में स्वास्थ्य कर्मचारियों का एक और विरोध प्रदर्शन हुआ था। टेरिसिना के आपातकालीन अस्पताल (एचयूटी) की नर्सों और नर्सिंग तकनीशियनों ने अपने एक सहकर्मी की मृत्यु के बाद, इस अस्पताल में व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) की कमी के खि़लाफ़ एक ज़ोरदार प्रदर्शन किया। एचयूटी में स्वास्थ्य कर्मचारियों ने संक्रमण के इतने तेज़ी से फैलने की निंदा की, विशेष रूप से “गैर-कोविड” वार्डों में, जहां पर कर्मचारियों को अपनी सुरक्षा के लिए ज़रूरी, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण भी नहीं दिया जाता, हालांकि वे भी कोविड बीमारी से संक्रमित लोगों के संपर्क में आते हैं। उन्होंने उन ख़तरनाक परिस्थितियों में काम करने के लिए 40 प्रतिशत अतिरिक्त वेतन वृद्धि की मांग भी उठाई।

दुनिया में किसी और जगह की तुलना में ब्राजील में कोरोनो वायरस से काफी अधिक नर्सों की मौतें हो रही हैं। फेडरल नर्सिंग काउंसिल के अनुसार, 15,000 ब्राजीलियाई नर्सें कोविड संक्रमण की शिकार है और 137 नर्सों की तो कोविड संक्रमण के कारण मौत हो चुकी है। पूरी दुनिया में, इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ नर्सेस ने मई 2020 के मध्य तक कोविड संक्रमण के कारण नर्सों की कुल 260 मौतें दर्ज की हैं। इनमें आधी से ज्यादा मौतें केवल ब्राजील में ही हुई हैं।

फेडरल काउंसिल ऑफ मेडिसिन (सीएफएम) ने घोषणा की कि उसे कोविड-19 से जुड़े स्वास्थय केंद्रों में काम करने वाले डॉक्टरों से लगभग 17,000 शिकायतें मिलीं हैं। इनमें मुख्य रूप से पीपीई की कमी के बारे में, इसके बाद स्वास्थ्य संसाधनों की आपूर्ति की कमी, परीक्षण साधनों (टेस्टिंग किट्स) और दवाओं की कमी और उनके स्वास्थ्य केन्द्रों में उपयुक्त ट्रेनिंग पाए हुए कर्मचारियों की कमी आदि शामिल हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े मज़दूरों ने पिछले दो हफ्तों में, ज़ोरदार प्रदर्शनों की एक श्रृंखला का आयोजन किया है। ब्राजील में, स्वास्थ्य से जुड़े मज़दूरों द्वारा दर्जनों विरोध प्रदर्शन और हड़तालें आयोजित की गई हैं।

खाद्य वितरण सेवाओं से जुड़े हुए मज़दूरों ने अपनी अनिश्चित स्थिति के खि़लाफ़ विरोध किया

बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा नियंत्रित खाद्य वितरण सेवाओं से जुड़े हुए मज़दूरों ने एक के बाद एक, हड़ताल और विरोध प्रदर्शन आयोजित किये हैं। उनकी मांगें बेहतर वेतन (डिलीवरी रेट), सुरक्षित काम करने की परिस्थितियों और आवश्यक सुरक्षात्मक उपकरणों (पीपीई) की सप्लाई की हैं, जिनके लिए कंपनियों ने मज़दूरों से पहले ही पैसा वसूल कर रखा है, लेकिन उनको (पीपीई) की सप्लाई अभी तक नहीं हुई हैं। 14 मई को एस्पिरिटो सैंटो की राजधानी विटोरिया में भोजन वितरण से जुड़े मज़दूरों ने कुछ घंटों के लिए आईफूड के ऐप को बंद करके अपना विरोध जाहिर किया। महामारी के दौरान, उनकी काम करने की स्थिति पहले से और भी बदतर हो गई है और कम्पनियां कई मज़दूरों को बिना किसी नोटिस के नौकरी से निकाल रही हैं। पूरे ब्राजील में खाद्य वितरण कर्मचारी 30 मई को हड़ताल पर जाने की योजना बना रहे हैं।

अमरीका

फल और मांस पैकिंग कंपनियों के मज़दूरों की हड़ताल

वाशिंगटन राज्य के याकिमा काउंटी में, फलों की पैकिंग की छह कंपनियों में सैकड़ों कर्मचारी हड़ताल पर चले गए, उनकी मांगें थी कि – कंपनियां कोविद-19 के संक्रमण के जोखिम को कम करने के लिए पर्याप्त व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई), अतिरिक्त वेतन और सुरक्षित कामकाजी परिस्थितियों का इंतज़ाम करें।

15 मई को जैसे ही उन्हें पता चला कि उनके 12 सह कर्मचारियों को कोविड संक्रमण के लिए पॉजिटिव पाया गया, एलन ब्रदर्स फ्रूट कंपनी के मज़दूरों ने तुरंत हड़ताल का ऐलान कर दिया। इस हड़ताल और वाकआउट ने आस-पास की कंपनियों में भी, वॉकआउट की लगातार श्रृंखला की शुरुआत की : मैट्सन फ्रूट, जैक फ्रॉस्ट फ्रूट, मोनसन फ्रूट और सबसे हाल ही में कोलंबिया रीच और मैडेन फ्रूट – इन सभी कंपनियों के मज़दूर अपनी मांगों को पूरा करने के लिए हड़ताल पर जा रहे हैं।।

मीट पैकिंग उद्योग में काम की ख़तरनाक परिस्थितियों का विरोध जारी है, यहां पर कम से कम 12,000 मज़दूरों को कोविड पॉजिटिव पाया गया है और कोरोना के कारण कम से कम 48 लोगों की मौत हो गई है। जॉर्जिया, कैलिफोर्निया, आयोवा, नेब्रास्का और अन्य राज्यों में हड़ताल और अन्य विरोध प्रदर्शनों ने इन मीट पैकिंग कंपनियों को बंद करने के लिए मजबूर किया, अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने “रक्षा उत्पादन अधिनियम” लागू करके, इस कानून के तहत, उन्हें फिर से खोलने के आदेश दिए हैं। ट्रम्प की इस कार्रवाई के बाद वाले सप्ताह में, कोरोना वायरस का संक्रमण, इन काओउनटीयों में जहां पर मीट पैकिंग की कंपनियों के कारखाने हैं, अमरीका में कोरोना के फैलने की राष्ट्रीय दर से दुगनी है। 13 मई को मज़दूरों ने काम करने की इन ख़तरनाक स्थितियों का विरोध करते हुए, दक्षिण कैरोलिना के वेस्ट कोलंबिया में एक पोल्ट्री प्लांट से वाकआउट करने का फैसला लिया। अमरीका में अन्य मीट पैकिंग की कंपनियों के कारखानों में भी विरोध प्रदर्शन जारी हैं।

गारमेंट कर्मचारियों का विरोध

जैसे ही उनको पता चला कि उनका एक सह-कर्मचारी कोरोना से संक्रमित पाया गया है और प्रबंधन उसे छुपाने की कोशिश कर रहा है तो तीन सौ कपड़ा मज़दूरों ने 11 मई को उत्तर मिसिसिपी के एक तकिया कारखाने से वाक आउट करने का फैसला लिया। पिछले महीने अलबामा के सेल्मा शहर में, अमरीकी आपरेल कंपनी में गारमेंट मज़दूरों ने विरोध प्रदर्शन आयोजित किये थे। विडम्बना तो यह है कि ये मज़दूर अमरीकी सैनिकों के लिए फेस मास्क की सिलाई करते हैं लेकिन खुद को संक्रमण से बचाने के साधनों से वंचित हैं!

स्वच्छता क्षेत्र से जुड़े मज़दूर अपने काम की ख़तरनाक परिस्थितियों का विरोध कर रहे हैं

महामारी के बीच मई के प्रारंभ में न्यू ऑरलियन्स में अपने कम वेतन और काम की ख़तरनाक परिस्थितियों के विरोध में स्वच्छता कर्मचारियों ने हड़ताल की थी, अमरीका के अन्य राज्यों की तरह लुइसियाना राज्य भी कोरोना वायरस से तबाह है। प्रतिदिन सुबह 4 से शाम 4 बजे तक कूड़ा उठाने के लिए ड्यूटी करने वाले मज़दूर अपने वेतन में 15 डॉलर प्रति घंटे की बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं।

मई के मध्य में मेट्रो डिस्पोजल, एक निजी वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी ने कई स्वच्छता कर्मचारियों, जो हड़ताल पर थे, उनको नौकरी से निकाल दिया। अब कंपनी जेल के मज़दूरों को “हड़ताल तोड़ने वालों” की तरह इस्तेमाल कर रही है! लुइसियाना श्रम कानूनों के अनुसार, अहिंसक अपराध के दोषी कैदियों को स्वच्छता श्रमिकों के रूप में सामान्य प्रति घंटा मज़दूरी के केवल 13 प्रतिशत वेतन पर रखा जा सकता है, इसका मतलब यह है कि 2020 में भी मालिकों को मज़दूरों का गुलामों की तरह शोषण करने का अधिकार हासिल है।

लेकिन, न्यू ऑरलियन्स के नागरिकों और साथ ही अन्य आवश्यक सेवा क्षेत्रों से जुड़े और मज़दूरों भी, जिन्हें ख़तरनाक परिस्थितियों में काम करने के लिए मजबूर किया गया है, उन सबने मिलकर हड़ताल कर रहे स्वच्छता कर्मचारियों को उनके सघर्ष को सफल बनाने के लिये अपना समर्थन दिया है।

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