रेलवे के सिग्नल और टेलीकॉम मज़दूरों ने काम की सुरक्षित परिस्थितियों की मांग की

भारतीय रेल के सिग्नल और टेलीकॉम विभाग के कर्मचारियों ने घोषणा की है कि वे 14 मार्च, 2024 को ड्यूटी के दौरान अनशन करेंगे और अपनी कमीज की दाहिनी बाजू पर काली पट्टी बांधकर काम करेंगे और पूर्ण मौन रखेंगे। यह उनके विरोध को प्रकट करेगा कि उनकी मांगों को नज़र अंदाज़ किया जा रहा है। उनकी मुख्य मांगें हैं – (1) जोखि़म और कठिनाई भत्ता (2) नाईट ड्यूटी फेलियर गैंग (एक ऐसा समूह जो रात के समय होने वाली खराबियों को ठीक करने के लिय हो) की स्थापना और (3) अधिकारियों द्वारा एच.ओ.ई.आर. (रोज़गार के घंटे और आराम का मैनुअल की अवधि) नियम के उल्लंघन को तत्काल रोकना।

उन्होंने अपनी इसी तरह की मांगों को लेकर, 27 सितंबर, 2016; 9 फरवरी, 2019; 31 अक्तूबर, 2020 और 9 फरवरी, 2022 को इसी तरह के विरोध प्रदर्शन आयोजित किए थे। इससे यही दिखता है कि ये महत्वपूर्ण मांगें, जो न केवल काम पर उनकी सुरक्षा से बल्कि यात्रियों की सुरक्षा से भी जुड़ी हुई हैं, उन्हें रेल प्रशासन द्वारा वर्षों से नज़र अंदाज़ किया जाता रहा है।

इस वर्ष 22 जनवरी से 6 फरवरी तक केवल 16 दिनों में, सिग्नल और टेलीकॉम विभाग के 6 कर्मचारियों की ड्यूूटी के दौरान चलती ट्रेनों के नीचे आने से मृत्यु हो गई। 22 जनवरी को रात को क़रीब 9 बजे, पश्चिम रेल मुंबई डिविज़न के वसई स्टेशन के पास तीन मज़दूरों की ट्रेन से कुचलकर मौत हो गई। 27 जनवरी को सुबह क़रीब 8 बजे उत्तर मध्य रेलवे के आगरा मंडल के रूंधी स्टेशन के पास एक मज़दूर की ट्रेन से कुचलकर मौत हो गई, जबकि 6 फरवरी को पूर्व मध्य रेलवे के दीनदयाल उपाध्याय मंडल के पुसौली स्टेशन के पास दो मज़दूरों की ट्रेन से कुचलकर मौत हो गई।

भारतीय रेल एस.एंडटी. मेंटेनर्स यूनियन (आई.आर.एस.टी.एम.यू.) ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इन सभी घटनाओं की न्यायिक जांच कराने की मांग की है। पत्र में बताया गया है कि हर साल 24 से अधिक सिग्नल और टेलीकॉम कर्मचारी ड्यूटी के दौरान विभिन्न दुर्घटनाओं के परिणामस्वरूप मारे जाते हैं, जिनमें ट्रेनों से कटना भी शामिल है। वे काफ़ी समय से “नाइट ड्यूटी फेलियर गैंग” की स्थापना की मांग कर रहे हैं, लेकिन रेलवे ने इस मांग पर कार्रवाई नहीं की है। परिणामस्वरूप, रात के दौरान फेलियर की स्थिति में सिग्नल और टेलीकॉम के कर्मचारियों को ख़राबियों को देखने के लिए तत्काल बुलाया जाता है, बिना यह पता लगाए कि कर्मचारी उचित शारीरिक स्थिति में है या नहीं और कर्मचारी को उचित आराम मिला है या नहीं। ऐसी आपात स्थितियां नियमित रूप से उत्पन्न होती हैं, लेकिन रात्रि ड्यूटी फेलियर गैंगों को बनाया नहीं जा रहा है, क्योंकि रिक्त पदों को भरने के लिए तत्काल भर्ती की आवश्यक होगी। इसके बजाय, मौजूदा सिग्नल और टेलीकॉम मज़दूरों को पूरे दिन की काम की शिफ्ट के बाद काम करने के लिए मजबूर किया जाता है।

रेल प्रशासन हर दिन समय पर अधिकतम संख्या में ट्रेनें चलाने के प्रति इतना उतावला है कि पॉइंट फेलियर जैसी छोटी-मोटी ख़राबी की स्थिति में सिग्नल और टेलीकॉम कर्मचारी को मरम्मत करने के लिए कहा जाता है, और इसी दौरान ट्रेनों को 40 किमी प्रति घंटे तक की गति से चलाने की अनुमति होती है! अक्सर, कर्मचारियों पर इतना ज्यादा दबाव रहता है कि उन्हें फटाफट, उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना ख़राबी को ठीक करना होता है। कई मामलों में, सिग्नल फेलियर और मरम्मत के मामलों को दर्ज़ भी नहीं किया जाता है क्योंकि इसमें विस्तृत प्रोटोकॉल का पालन करना होगा, जिससे ट्रेनों के चलने में देरी हो सकती है। कई बार लोको पायलटों को चल रहे ऐसे काम के बारे में जानकारी भी नहीं दी जाती है। ऐसे मामलों में यदि सिग्नल और टेलीकॉम कर्मचारी किसी दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं, तो लापरवाही के लिए उन्हें स्वयं या संबंधित लोको-पायलट को दोषी ठहराया जाता है!

आई.आर.एस.टी.एम.यू. द्वारा जारी पत्र, इस तथ्य की ओर भी इशारा करता है कि सिग्नल और टेलीकॉम मज़दूरों को उचित ड्यूटी रोस्टर बनाए बिना एच.ओ.ई.आर. के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हुए अतिरिक्त घंटों तक काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। अगर थके हुए मज़दूर से कोई ग़लती हो जाती है तो उन्हें तुरंत आरोप पत्र दे दिया जाता है, यहां तक कि कई बार निलंबन के आदेश भी जारी कर दिए जाते हैं। इस पत्र में उनके तीन सहयोगियों की रिहाई की भी मांग की गई है जो बालासोर रेल दुर्घटना में लापरवाही बरतने का आरोप लगने के बाद से सी.बी.आई. की जेल में बंद हैं।

दक्षिण मध्य रेल मज़दूर यूनियन (एस.सी.आर.एम.यू.) ने भी रेल अधिकारियों द्वारा रेल बोर्ड के एच.ओ.ई.आर. के दिशानिर्देशों का अनुपालन न करने का मुद्दा ज़ोरदार ढंग से उठाया है। एस.सी.आर.एम.यू. ने यह भी मांग की है कि ड्यूटी रोस्टर एच.ओ.ई.आर. के दिशानिर्देशों के अनुसार जारी किया जाना चाहिए।

उचित ड्यूटी रोस्टर न रखना निजी पूंजीपति मालिकों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली एक पसंदीदा रणनीति है, ताकि वे विभिन्न नियमों और विनियमों का उल्लंघन करते हुए अतिरिक्त और कई बार असुरक्षित काम ले सकें। भारतीय रेल अपने सभी विभागों में समान रणनीति का उपयोग कर रहा है। रेल मज़दूरों से न सिर्फ़ ज़्यादा और असुरक्षित काम लिया जाता है, बल्कि कई बार उनसे वह काम भी लिया जाता है, जिसके लिए एक प्राइवेट कंपनी को ठेका दिया गया है!

यह महत्वपूर्ण है कि भारतीय रेल के सभी कर्मचारियों को एकजुट होकर सभी रिक्तियों को भरने, सुरक्षा संबंधी दिशानिर्देश जारी करने और उनका पालन करने तथा प्रत्येक रेलकर्मी को सौंपे गए कार्य का स्पष्ट रूप से उल्लेख करते हुए दैनिक रोस्टर प्रकाशित करने की मांग उठानी चाहिए। रेल कर्मचारियों और यात्रियों की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के लिए इन मांगों को पूरा करना महत्वपूर्ण है।

Share and Enjoy !

Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *