हम कॉमरेड एम.एन. प्रसाद के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हैं

ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (ए.आई.एल.आर.एस.ए.) के महासचिव कॉमरेड एम.एन. प्रसाद का 11 फरवरी, 2024 को 81 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

MNPrasadकॉमरेड एम.एन. प्रसाद का जन्म 8 मई, 1942 को बिहार के सीवान के नाथू छाप गांव में हुआ था। उन्होंने सीवान में डी.ए.वी. डिग्री कॉलेज से अपनी शिक्षा पूरी की। इसके बाद, वे दक्षिण पूर्व रेलवे के आद्रा डिवीजन में सेकेंड फायरमैन के पद पर नियुक्त किये हुये थे (बाद में इस पद को सहायक लोको पायलट के रूप में पुनः नामित किया गया)।

वे ए.आई.एल.आर.एस.ए. के संस्थापक सदस्यों में से एक थे, जिसका गठन 1972 में हुआ था। वे एक सेनानी थे, जिन्होंने अन्य मांगों के अलावा, कार्य दिवस को छोटा करने की मांग को लेकर 1973 में लोको पायलटों की ऐतिहासिक हड़ताल में सक्रियता से भाग लिया था। लोको पायलटों के जुझारू संघर्ष के परिणामस्वरूप, केंद्र सरकार को लोकसभा में यह घोषणा करने के लिए मजबूर होना पड़ा कि लोको पायलटों के काम के घंटे अब से 10 घंटे तक सीमित रहेंगे। इससे पहले लोको पायलटों के काम के घंटों की कोई सीमा नहीं थी। हालांकि, 1973 में लोकसभा में इस घोषणा के बावजूद, रेलवे बोर्ड ने 50 से अधिक वर्षों के बाद भी इसे लागू नहीं किया है!

ए.आई.एल.आर.एस.ए. ने अगले वर्ष (1974) ऐतिहासिक रेलवे हड़ताल में सक्रियता से भाग लिया, जिसका नेतृत्व रेलवे कर्मचारियों के छत्र संगठन, नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ रेलवेमेन्स स्ट्रगल (एन.सी.सी.आर.एस.) ने किया था, जिसमें मान्यता प्राप्त और गैर-मान्यता प्राप्त रेलवे की सभी यूनियनें शामिल थीं। कॉमरेड एम.एन. प्रसाद उन पांच लोगों में से एक थे जिन्हें उस हड़ताल के दौरान सरकार ने देखते ही गोली मारने का आदेश दिया था।

लोको पायलटों के हितों की दृढ़ रक्षा के लिए कॉमरेड प्रसाद को रेलवे प्रबंधन द्वारा बार-बार प्रताड़ित किया गया। ए.आई.एल.आर.एस.ए. के निर्माण कार्य को बाधित करने के लिए, उन्हें भारतीय रेल के एक ज़ोन से दूसरे ज़ोन में स्थानांतरित कर दिया गया। 1981 की ए.आई.एल.आर.एस.ए. हड़ताल के दौरान उन्हें सज़ा के तौर पर मध्य रेलवे के नागपुर में स्थानांतरित कर दिया गया। फिर 1988 में उन्हें सज़ा के तौर पर पूर्व तट रेलवे (ईस्ट कोस्ट रेलवे) के विशाखापट्टनम में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां से वे 2002 में सेवानिवृत्त हुए।

उन्होंने 2008 में ए.आई.एल.आर.एस.ए. के महासचिव का पद संभाला और इसे लोको पायलटों के अधिकारों की रक्षा में एक लड़ाकू संगठन के रूप में बनाने के लिए अथक प्रयास किया। ए.आई.एल.आर.एस.ए. द्वारा किए गए निरंतर आंदोलनों ने 2012 में केंद्रीय श्रम आयुक्त (सी.एल.सी.), श्रम मंत्रालय और हिन्दोस्तान की सरकार को ए.आई.एल.आर.एस.ए. और रेलवे बोर्ड को चर्चा के लिए एक साथ बुलाने के लिए मजबूर किया।

रोज़गार के घंटे, ग्रेड वेतन और माइलेज भत्ते और अन्य मांगों के संबंध में ए.आई.एल.आर.एस.ए. की मांगों को राष्ट्रीय औद्योगिक न्यायाधिकरण (एन.आई.टी.) को भेजा गया था, जिसे 2012 में गठित किया गया था। परन्तु, 11 साल से अधिक समय के बाद भी, और ए.आई.एल.आर.एस.ए. और रेलवे बोर्ड द्वारा सभी तर्कं पेश करने के बावजूद, एन.आई.टी. ने अब तक अपना फै़सला नहीं सुनाया है। सभी आंदोलनों में सबसे आगे रहते हुए, कॉमरेड एम.एन. प्रसाद ने मुंबई में एन.आई.टी. की बैठकों में नियमित रूप से भाग लेने और सभी मोर्चों पर दबाव बनाए रखने का निश्चय किया।

कॉमरेड एम.एन. प्रसाद एक सरल व्यक्ति थे। वे जोशीले स्वभाव के थे और कम्युनिस्ट थे। वे हमारी पार्टी, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के मित्र थे।

लोको पायलटों के अधिकारों के लिए लड़ते हुए उन्होंने रेलवे कर्मचारियों की एकता बनाने के लिए भी काम किया। उन्होंने 28 अक्तूबर, 2020 को एन.सी.सी.आर.एस. के पुनर्गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपने पूरे जीवन में उन्होंने ए.आई.एल.आर.एस.ए. के सदस्यों की चेतना और संगठन के स्तर को ऊपर उठाने के लिए काम किया। 2012 में बेंगलुरु में 2014 में चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) में आयोजित ए.आई.एल.आर.एस.ए. की द्विवार्षिक जनरल बॉडी मीटिंग (बी.ई.जी.एम.) और 2022 में विजयवाड़ा (आंध्र प्रदेश) में स्वर्ण जयंती बी.ई.जी.एम. ऐसे अवसर थे जब लोको पायलटों ने न केवल अपनी तात्कालिक मांगों पर चर्चा की, बल्कि मज़दूर वर्ग और मेहनतकश किसानों की चिंताओं के इर्द-गिर्द एकता बनाने की आवश्यकता पर भी चर्चा की। ए.आई.एल.आर.एस.ए. ने 2021-2022 में दिल्ली की सीमाओं पर एक साल तक चलने वाले किसान आंदोलन का समर्थन किया।

कॉमरेड एम.एन. प्रसाद ने लोको पायलटों, रेलवे मज़दूरों तथा संपूर्ण मज़दूर वर्ग और सभी मेहनतकश व उत्पीड़ित लोगों के हित में अपनी आखिरी सांस तक संघर्ष किया।

कॉमरेड एम.एन. प्रसाद अमर रहें!

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