शिक्षकों और छात्रों ने एन.ई.पी. 2020 को वापस लेने की मांग उठाई

मज़दूर एकता कमेटी के संवाददाता की रिपोर्ट

NEP_2024-02-04ऑल-इंडिया फोरम फॉर राइट टू एजुकेशन (ए.आई.एफ.आर.टी.ई.) ने 3 फरवरी, 2024 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। 100 से अधिक छात्र संगठनों, शिक्षक संगठनों, अभिभावकों के संगठनों के साथ-साथ आम-लोगों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले देशभर से आये हुए एक हज़ार से अधिक लोगों ने इस विरोध प्रदर्शन में भाग लिया।

प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एन.ई.पी.) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एन.सी.एफ.) 2023 को वापस ले। उन्होंने प्री-प्राइमरी से पोस्ट-ग्रेजुएशन तक सर्वव्यापी, पूरी तरह से राज्य द्वारा वित्त पोषित, समान और अच्छी गुणवत्ता वाली शिक्षा की मांग की। उन्होंने सभी अनुबंध शिक्षकों के लिए नियमितीकरण और कार्यकाल की सुरक्षा, सभी रूपों में शिक्षा के निजीकरण और व्यवसायीकरण को समाप्त करने, शिक्षा प्रणाली के माध्यम से सांप्रदायिक, विभाजनकारी और अवैज्ञानिक विचारों के प्रसार को समाप्त करने, आदि की भी मांग की।

NEP_2024-02-04विरोध स्थल पर बैनर और प्लेकार्ड्स पर उनकी मांगों को उठाने वाले नारे लिखे हुए थे, जैसे कि, ‘हम सभी के लिए समान शिक्षा की मांग करते हैं!’, ‘शिक्षा हमारा मौलिक अधिकार है!’, ‘एकजुट होकर सभी के लिए एक समान शिक्षा प्रणाली के लिए लड़ें!’, ‘एनईपी 2020 को वापस लो!”, “शिक्षा का निजीकरण और व्यवसायीकरण बंद करो!”, “सभी अनुबंध शिक्षकों के नियमितीकरण की गारंटी दो!”, “सर्वव्यापी, अच्छी गुणवत्ता और मुफ़्त शिक्षा सुनिश्चित करना राज्य का कर्तव्य है!”, इत्यादि।
धरना-प्रदर्शन में भाग लेने वाले सहभागियों को विभिन्न सहभागी संगठनों के प्रतिनिधियों ने संबोधित किया। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली को व्यवस्थित रूप से नष्ट किया जा रहा है। शिक्षा के लिए केंद्रीय बजट में बार-बार कटौती की गई है। विश्वविद्यालयों को अपने पाठ्यक्रमों को चलाने के लिए ऋण लेने को मजबूर किया जा रहा है, जिसके कारण देशभर में बड़े पैमाने पर शुल्क में वृद्धि के साथ ‘स्व-वित्तपोषण‘ – सेल्फ फाइनांस (यानी निजी) पाठ्यक्रम तेज़ी से बढ़ रहे हैं। मेहनतकश और उत्पीड़ित तबकों के अधिकांश युवाओं के शिक्षा प्राप्त करने के सपने धराशायी हो रहे हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि शिक्षा का निजीकरण और व्यवसायीकरण रोका जाना चाहिए।

देश के कई हिस्सों से शिक्षकों ने सभी राज्यों पर केंद्रीय शिक्षा नीति लागू करने और एन.ई.ई.टी., जे.ई.ई. और सी.यू.ई.टी. जैसी सर्व हिन्द आम प्रवेश परीक्षाओं की शुरूआत के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई, जो देश के विभिन्न क्षेत्रों के युवाओं की आकांक्षाओं के लिए हानिकारक हैं।

उन्होंने शिक्षा के लिए सरकार के बजट में वृद्धि, अच्छी गुणवत्ता वाले पड़ोस के स्कूल, मातृभाषा में शिक्षा, शिक्षकों की भर्ती में पारदर्शिता और शिक्षकों के साथ-साथ गैर-शिक्षण कर्मचारियों को काम पर रखने की अनुबंध प्रणाली को समाप्त करने की मांग की। उन्होंने दिव्यांग छात्रों के लिए बेहतर सुविधाओं की मांग की।

विभिन्न संगठनों के छात्र प्रतिनिधियों ने भी छात्रों, युवाओं और अन्य उत्पीड़ित वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए विरोध करने के अधिकार पर सरकार के हमलों की निंदा की।

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