भूमि अधिग्रहण का विरोध करने वाले ग्रामीणों के निरंतर उत्पीड़न के ख़िलाफ़ संघर्ष

ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले के ढिंकिया गांव के निवासियों ने सशस्त्र पुलिस द्वारा उन पर किए गए क्रूर हमले की दूसरी बरसी पर 14 जनवरी, 2024 को भुवनेश्वर के पी.एम.जी. स्क्वायर पर ‘काला दिवस’ मनाया।

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भुबनेश्वर में विरोध प्रदर्शन, 14 जनवरी 2024

प्रदर्शनकारियों ने याद किया कि 14 जनवरी, 2022 को लगभग 30 ग्रामीण घायल हो गए थे। जिनमें 20 महिलाएं और बच्चे शामिल थे। पुलिस की 12 प्लाटून ने आंदोलनकारी ग्रामीणों पर लाठीचार्ज किया, जो जिंदल स्टील वक्र्स (जे.एस.डब्ल्यू.) लिमिटेड के लिए भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की सुरक्षा में कंपनी के अधिकारियों द्वारा किये जा रहे अपने पान के बागानों का अधिग्रहण से बचाने के लिए अवरोध स्थापित किए थे। पान के बाग वहां रहने वाले लोगों के लिए आजीविका का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं।

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धिंकिया में पुलिस का लाठीचार्ग (फ़ाइल फ़ोटो)

यह याद किया जा सकता है कि कोरियाई इस्पात कंपनी पोस्को ने हिन्दोस्तान में सबसे बड़ा एकीकृत इस्पात संयंत्र बनाने के लिए ओडिशा सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के 12 साल से अधिक समय बाद, एक छोटे से समुद्र तटीय गांव, ढिंकिया, के लोगों के प्रतिरोध के कारण इसे अपनी परियोजना छोड़नी पड़ी थी। पोस्को को 2017 में अपनी योजनाओं को वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। ओडिशा सरकार ने बाद में सितंबर 2018 में इस सामुदायिक भूमि को हिन्दोस्तान की स्टील की इजारेदार कंपनी जे.एस.डब्ल्यू. उत्कल स्टील लिमिटेड (जे.यू.एस.एल.), को स्टील तथा सीमेंट संयंत्र, बिजली संयंत्र और एक बंदरगाह स्थापित करने के लिए सौंप दिया।

जे.यू.एस.एल. के लिए भूमि अधिग्रहण के ख़िलाफ़ ढिंकिया के लोगों ने अपना विरोध जारी रखा है। इन विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व जिंदल प्रतिरोध संग्राम समिति कर रही है।

ओडिशा राज्य ने पिछले दो वर्षों में विरोध प्रदर्शनों का गंभीर दमन किया है ताकि लोगों को अपना संघर्ष छोड़ने के लिए आतंकित किया जा सके। ढिंकिया के पूर्व पंचायत समिति सदस्य और जे.एस.डब्ल्यू. परियोजना के ख़िलाफ़ आंदोलन के नेताओं में से एक, पिछले दो वर्षों से जेल में हैं। एक अन्य प्रमुख कार्यकर्ता भी इस अवधि के दौरान जेल के अंदर और बाहर रहे हैं।

पुलिस ने जनवरी 2022 से ढिंकिया, नुआगांव और गाडा कुजंग की तीन ग्राम पंचायतों पर क़ब्ज़ा कर लिया है, जिससे लोगों में आतंक और असुरक्षा फैल गई है। ढिंकिया पंचायत में लगभग 1,000 लोगों के विरुद्ध मनगढ़ंत साक्ष्यों के आधार पर लगभग 100 झूठे आपराधिक मामले दर्ज़ किये गये हैं। यह 2,000 लोगों के ख़िलाफ़ 300 झूठे आपराधिक मामलों के अतिरिक्त है, जो 2017 से पहले पोस्को विरोधी आंदोलन के समय से अभी भी लंबित हैं, जब पोस्को को साइट से हटने के लिए मजबूर किया गया था।

मनगढ़ंत आरोपों के आधार पर आंदोलन के कई नेताओं को बार-बार गिरफ़्तार किया गया और जमानत देने से इनकार कर दिया गया। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस ने 15 ग्रामीणों पर बेहद बेबुनियाद आरोप लगाए हैं। उनका प्रयास विरोध को आपराधिक बनाना और जे.यू.एस.एल. के लिए भूमि अधिग्रहण के ख़िलाफ़ लोगों के प्रतिरोध को कुचलना है।

प्रदर्शनकारियों द्वारा उन पर जारी आतंक के शासन को समाप्त करने के लिए ओडिशा राज्य सरकार से की गई सभी अपीलों को अब तक अनसुना कर दिया गया है। ढिंकिया के क्रोधित लोग अपनी भूमि और आजीविका की रक्षा के अधिकार और उन पर पुलिस की बर्बरता को समाप्त करने के लिए देशभर के जन संगठनों से समर्थन जुटा रहे हैं।

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