रूस के ख़िलाफ़ लगाये गये प्रतिबंधों में स्विफ्ट की भूमिका

शीत युद्ध की समाप्ति और दुनिया के दो-ध्रुवीय विभाजन के ख़त्म होने के बाद से, अमरीका अपने वर्चस्व के तहत एक-ध्रुवीय दुनिया की स्थापना करने की रणनीति पर आगे बढ़ता जा रहा है। वर्तमान समय में, अमरीका इस रणनीति को आगे बढ़ाने के लिए यूक्रेन के लोगों को मोहरे की तरह इस्तेमाल कर रहा है। अमरीका का उद्देश्य है रूस को घेरना और कमज़ोर करना, फ्रांस व जर्मनी को कमज़ोर करना और यूरोप में अमरीका के वर्चस्व को मजबूत करना।

रूस को कमज़ोर करने के लिए, अमरीका और उसके यूरोपीय सहयोगियों ने रूस पर कई प्रतिबंध लगाए हैं। इन प्रतिबंधों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद या संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा की सहमति के बिना एकतरफ़ा तरीक़े से लगाया गया है। फ्रांस के वित्त मंत्री ने इन प्रतिबंधों को “सम्पूर्ण आर्थिक और वित्तीय युद्ध“ के रूप में वर्णित किया है।

रूसी अर्थव्यवस्था को कमज़ोर करने वाले प्रतिबंधों में से एक का उद्देश्य है विदेशी मुद्रा के व्यापार में, माल के आयात और निर्यात में अनेक बाधाएं डालना। इसे अंजाम देने के लिये कई सारे रूसी बैंकों को एस.डब्ल्यू.आई.एफ.टी. – सोसाइटी फॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशन (स्विफ्ट) – से हटा दिया गया था। स्विफ्ट तेज़ी से और सुरक्षित संदेश भेजने की प्रणाली है जिसका उपयोग बैंकों द्वारा, एक देश से दूसरे देश को फंड ट्रांसफर करने के निर्देश भेजने के लिए किया जाता है। विदेशी मुद्रा के लेनदेन के लिए यह एक आवश्यक वैश्विक प्रणाली है, क्योंकि विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त कोई और विकल्प नहीं है।

स्विफ्ट की स्थापना 1973 में टेलेक्स के माध्यम से संदेश भेजने की पुरानी प्रथा को बदलने के लिए की गई थी और अब इसका उपयोग 200 से अधिक देशों में 11,000 से अधिक बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा सुरक्षित संदेश और भुगतान आदेश भेजने के लिए किया जाता है। यह प्रतिदिन 4 करोड़ से अधिक संदेश भेजता है, क्योंकि कंपनियों और सरकारों के बीच रोज़ाना खरबों डॉलर का लेनदेन होता है। (स्विफ्ट के बारे में विस्तृत विवरण के लिए बॉक्स देखें)

मार्च 2022 में सात रूसी बैंकों को स्विफ्ट से हटा दिया गया, जिनमें बैंक ओत्कृति, नोविकोम्बैंक, प्रोम्सव्याजबैंक, बैंक रोसिया, सोवकोमबैंक, विनेशीकोनोमबैंक और वीटीबी बैंक शामिल हैं। जून 2022 में रूस के सबसे बड़े बैंक स्बेर बैंक सहित तीन और रूसी बैंकों को स्विफ्ट से हटा दिया गया।

स्विफ्ट से हटा दिये गए किसी भी बैंक को अन्य वित्तीय संस्थानों को धन भेजने में बहुत मुश्किल होगी और उसके ग्राहकों को अपने विदेशी मुद्रा व्यवसाय का संचालन करने में जद्दोजहद करनी पड़ेगी।

इसका उद्देश्य रूसी कंपनियों के लिए स्विफ्ट द्वारा प्रदान की जाने वाली सामान्य सुचारू और तत्काल लेनदेन की पहुंच को ख़त्म करना था, जिससे रूस के मूल्यवान ऊर्जा और कृषि निर्यात के लिए भुगतान बाधित हो जाये।

रूसी आयात और निर्यात के भुगतान में शामिल बैंकों को अब एक दूसरे के साथ सीधे लेनदेन करना होगा, जिसकी वजह से ज्यादा समय और ख़र्च लगेगा और इसके फलस्वरूप, रूसी सरकार के राजस्व में कटौती होगी।

2014 में भी रूस को स्विफ्ट से हटा देने की धमकी दी गई थी। लेकिन अमरीकी साम्राज्यवाद और उसके सहयोगियों ने उस समय उस धमकी पर अमल नहीं किया था। अमरीकी साम्राज्यवादियों ने बड़े रूसी बैंकों को ब्लैक लिस्ट कर दिया था और अमरीकी क्रेडिट कार्ड कंपनियों ने रूसी बैंकों के लेन-देन को रोक दिया था। इस ख़तरे ने रूस को स्विफ्ट के विकल्प के रूप में अपने स्वयं की क्रेडिट कार्ड भुगतान प्रणाली और एक सीमा-पार बैंक हस्तांतरण प्रणाली विकसित करने के लिए प्रेरित किया, जिसे सिस्टम फॉर ट्रांसफर ऑफ फाईनेन्सीअल मेसेजेस (एस.पी.एफ.एस.) कहा जाता है। 2020 तक, एस.पी.एफ.एस. में 1.3 करोड़ संदेशों का ट्रैफिक था, जबकि 400 से अधिक वित्तीय संस्थान इस प्रणाली से जुड़े थे। स्विफ्ट से निकाले जाने के प्रभाव को कम करने के लिए, रूसी सरकार वर्तमान में चीनी सरकार के साथ चीन की क्रॉस-बॉर्डर इंटरबैंक पेमेंट सिस्टम (सी.आई.पी.एस.) से जुड़ने के लिए काम कर रही है, जो कि स्विफ्ट का एक अन्य विकल्प है और जो चीनी मुद्रा, युआन में भुगतान की प्रक्रिया करता है।

रूस पर वित्तीय प्रतिबंध न केवल रूस को प्रभावित करते हैं, बल्कि वे जर्मनी व यूरोपीय संघ के अन्य देशों सहित हिन्दोस्तान, चीन और उन सारे दूसरे देशों को भी प्रभावित करते हैं जो रूस के साथ व्यापार करते हैं।

अमरीकी साम्राज्यवादियों ने 2013 में ईरान के ख़िलाफ़ इसी तरह के प्रतिबंधों का इस्तेमाल किया था ताकि ईरान की सरकार पर अमरीकी वर्चस्व के सामने घुटने टेकने के लिए दबाव डाला जा सके। प्रतिबंधों के ज़रिये किसी भी देश को ईरान के साथ व्यापार करने से रोक दिया गया था और ईरानी बैंकों को स्विफ्ट प्रणाली का उपयोग करने की इजाज़त नहीं थी।

स्विफ्ट एक ‘पक्ष निरपेक्ष’ संगठन होने का दावा करता है। हक़ीक़त यह है कि यह अमरीकी साम्राज्यवादियों और उसके यूरोपीय सहयोगियों के आदेश पर काम करता है। इस सच्चाई को छुपाने के लिये यह दावा किया जा रहा है कि स्विफ्ट को बेल्जियम के फै़सलों का पालन करना होता है, क्योंकि इसका तथाकथित मुख्यालय बेल्जियम में स्थित है! पर इस सच्चाई को छिपाया जाता है, कि बेल्जियम को अमरीका और उसके प्रमुख नाटो सहयोगियों के हुक्म का पालन करना पड़ता है!

यह जाना जाता है कि अमरीका की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एन.एस.ए.) हजारों बैंकों द्वारा उपयोग किए जाने वाले स्विफ्ट नेटवर्क के डाटा को अपने नेटवर्क में भेज देती है। इस तरह वह स्विफ्ट के माध्यम से होने वाले बैंकिंग लेनदेन और साथ ही क्रेडिट कार्ड के लेनदेन पर निगरानी रखती है।

अमरीका अपनी भारी आर्थिक और सैन्य शक्ति का उपयोग करके इस या उस देश पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने में और स्विफ्ट को उन देशों के बैंकों की लेनदेन को रोकने के लिए मजबूर करने में सक्षम है। अमरीका ने नाटो पर अपने नियंत्रण का इस्तेमाल करके, नाटो के यूरोपीय सदस्य देशों को अपनी लाइन पर चलने के लिए बार-बार मजबूर किया है।

स्विफ्ट के बारे में

स्विफ्ट बेल्जियम के क़ानून के तहत एक सहकारी कंपनी है और इसकी मालिकी व नियंत्रण इसके शेयरधारकों (वित्तीय संस्थानों) द्वारा किया जाता है, जो दुनियाभर के लगभग 2,400 शेयरधारकों का प्रतिनिधित्व करते हैं। शेयरधारक दुनियाभर के बैंकों का प्रतिनिधित्व करने वाले 25 ’स्वतंत्र’ निदेशकों के एक बोर्ड का चुनाव करते हैं, जो कंपनी को नियंत्रित करता है और कंपनी के प्रबंधन पर निगरानी रखता है।

जी-10 (बेल्जियम, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, नीदरलैंड, ब्रिटेन, अमरीका, स्विट्जरलैंड और स्वीडन) के केंद्रीय बैंकों के साथ ही साथ यूरोपीय सेंट्रल बैंक द्वारा स्विफ्ट के कामकाज पर चौकसी रखी जाती है। नेशनल बैंक ऑफ बेल्जियम स्विफ्ट पर प्रमुख निगरानी रखता है।

2012 में, इस ढांचे की समीक्षा की गई और स्विफ्ट ओवरसाइट फोरम की स्थापना की गई, जिसमें जी-10 केंद्रीय बैंकों के अलावा प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के अन्य केंद्रीय बैंकों को शामिल किया गया था। इनमें शामिल हैं रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया, पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना, हांगकांग मॉनेटरी अथॉरिटी, रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ कोरिया, बैंक ऑफ रूस, सऊदी अरेबियन मॉनेटरी एजेंसी, मॉनेटरी अथॉरिटी ऑफ सिंगापुर, साउथ अफ्रीकन रिज़र्व बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ द रिपब्लिक ऑफ टर्की।

स्विफ्ट को अमरीकी और यूरोपीय बैंकों द्वारा संयुक्त रूप से बनाया गया था, जो नहीं चाहते थे कि कोई भी संस्था अपनी स्वयं की प्रणाली विकसित करे और अपनी इजारेदारी स्थापित करे।

1960 के दशक के अंत में, सोसाइटी फाइनेंसिएर यूरोपिएन (एस.एफ.ई.), जो कि लक्ज़मबर्ग और पेरिस में स्थित छह प्रमुख बैंकों का एक संघ है, उसने एक ’संदेश-स्विचिंग’ परियोजना शुरू की थी, जो बाद में स्विफ्ट प्रणाली में विकसित हुई।

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