आंगनवाड़ी मज़दूरों ने अपने अधिकारों का संघर्ष तेज़ किया

दिल्ली की आंगनवाड़ी मज़दूरों ने, कुछ महीने पहले नौकरी से निकाली गई 800 मज़दूरों की बहाली के लिए अपना संघर्ष तेज़ कर दिया है। अपने अधिकारों की रक्षा में यूनियन द्वारा आयोजित की गई कार्रवाइयों में भाग लेने के कारण इन मज़दूरों को बर्ख़ास्त कर दिया गया था।

मज़दूरों की किसी भी मांग पर ध्यान न देने के लिए, मज़दूरों ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार को और दिल्ली नगर निगम पर सत्ता संभाल रही भाजपा, दोनों को झूठे वादे करने के लिये ज़िम्मेदार ठहराया है। मज़दूरों की मांगों में  शामिल है – अनुचित रूप से बर्ख़ास्त किए गए मज़दूरों की लोगों की बहाली की जाये, उचित वेतन दिया जाये, स्वास्थ्य सेवा के साधन उपलब्ध कराये जायें, ग्रेच्युटी दी जाये, आदि।

आंगनवाड़ी मज़दूरों ने 4 नवंबर को दिल्ली स्टेट आंगनवाड़ी वर्कर्स एंड हेल्पर्स यूनियन के बैनर तले इन मज़दूरों के एक अभियान शुरू किया। इस अभियान के ज़रिये ये मज़दूर दिल्ली नगर निगम के आगामी चुनावों में, आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी का बहिष्कार करेंगे। आंगनबाड़ी मज़दूरों ने इस अभियान की शुरुआत आम आदमी पार्टी के मुख्यालय के पास प्रदर्शन और रैली करके की। उन्होंने आम आदमी पार्टी के पोस्टरों और बैनरों जलाकर अपने गुस्से को प्रकट किया। यूनियन ने घोषणा की है कि 22,000 आंगनवाड़ी मज़दूर, भाजपा और आम आदमी पार्टी के नेताओं को उन इलाकों में प्रचार करने से सक्रिय रूप से रोकेंगे जहां ये मज़दूर रहते हैं और काम करते हैं।

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