पूरे यूरोप में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन जारी हैं

यूरोप के कई देशों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन एक बार फिर शुरू हो गए हैं। लोग बैनर लेकर बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरे रहे हैं और महंगाई के ख़िलाफ़, रूस पर लगाये गये प्रतिबंधों के ख़िलाफ़ और नाटो के विरोध में नारे लगा रहे हैं। इन देशों के लोग यह मांग कर रहे हैं कि उनकी सरकारें नाटो से बाहर निकल जाएं।

Dresden_protestफ्रांस, बेल्जियम, मोल्दोवा, चेक गणराज्य, हंगरी और जर्मनी के शहरों में लोगों ने मार्च किया, जिसमें हजारों ने भाग लिया और रूस पर लगे प्रतिबंधों को ख़त्म करने की मांग की, जिसकी वजह से बहुत से घरों और व्यवसायों के लिए आर्थिक संकट पैदा हो गया है।

मज़दूर कह रहे हैं कि मुद्रास्फीति की भरपाई के लिए वेतन वृद्धि हो, ईंधन की क़ीमतों को कम करने के लिए सरकार के ऊर्जा बाज़ार में हस्तक्षेप करे और रूस के ख़िलाफ़ लगाये गये प्रतिबंधों को समाप्त किया जाये। यूरोपीय देशों द्वारा रूस के ख़िलाफ़ लगाए गए प्रतिबंधों के परिणामस्वरूप ऊर्जा के बिलों में भारी वृद्धि हुई है।

एक महीने के भीतर ही पूरे यूरोप में बड़े पैमाने पर होने वाले विरोध प्रदर्शनों की यह दूसरी लहर है। सितंबर की शुरुआत में दसों हजार लोग, बिजली के बढ़ते बिल और दशकों में सबसे अधिक मुद्रास्फीति का विरोध करने के लिए यूरोपीय शहरों की सड़कों पर आ गए।

यूक्रेन की सुरक्षा के नाम पर उनकी सरकारों द्वारा चलाए जा रहे युद्ध को जारी रखने के रवैये के ख़िलाफ़, यूरोप के देशों के मज़दूर वर्ग और लोगों के बीच जागरुकता और विरोध बढ़ रहे हैं। वे देख रहे हैं कि उनकी सरकारें, आम लोगों के हितों की रक्षा करने के बजाय अमरीका और नाटो के हितों के लिए काम कर रही हैं। इन देशों के लोग उनकी सरकारों द्वारा यूक्रेन को की जा रही हथियारों की आपूर्ति का विरोध कर रहे हैं। युद्ध को समाप्त करने की मांग बढ़ रही है ताकि आर्थिक उथल-पुथल को कम किया जा सके।

22 अक्तूबर को फ्रांस की राजधानी पेरिस की सड़कों पर नाटो और यूरोपीय संघ के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुये थे। हड़ताली शिक्षकों, रेलवे और स्वास्थ्य कर्मियों ने पेरिस सहित दर्जनों और शहरों में मार्च निकाला, यातायात को रोकने की और सार्वजनिक परिवहन को रोकने की कोशिश की। उन्होंने आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती क़ीमतों को पूरा करने के लिए वेतन में वृद्धि की मांग की।

महंगाई से जूझ रही नर्सें और अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारी पूछ रहे हैं कि जब सरकार यूक्रेन को सैकड़ों मिलियन यूरो के सैन्य उपकरणों को भेज सकती है तो सरकार हमारा वेतन क्यों नहीं बढ़ा सकती। सभी यूनियनों ने आह्वान किया है कि 10 नवंबर को राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन करेंगे।

28 अक्तूबर को चेक गणराज्य के लोग विरोध करने के लिए सड़कों पर उतरे और यूरोपीय यूनियन और नाटो से अपने देश को अलग करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने नारा लगाया कि “रूस हमारा दुश्मन नहीं है, हमलावर चेक सरकार है!”

29 अक्तूबर को रूस के ख़िलाफ़ लगाये गये प्रतिबंधों को हटाने की मांग को लेकर मोल्दोवा में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। उन्होंने यूरोपीय यूनियन समर्थक, नाटो समर्थक और अमरीका समर्थक रुख़ के लिए अपनी सरकार की निंदा की और इसे बदलने का आह्वान किया। उसी दिन शांति के लिए, प्राग में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। प्राग में हजारों प्रदर्शनकारियों ने सर्दियों से पहले ऊर्जा-संकट को दूर करने के लिए, रूस के साथ बातचीत करने का आह्वान किया। उन्होंने घोषणा की कि वे नाटो के हितों को पूरा करने के लिए, सर्दियों में तकलीफें सहने के लिए बिल्कुल सहमत नहीं होंगे।

उसी दिन हैम्बर्ग में शांति और स्वतंत्रता के लिये प्रदर्शन नामक एक विशाल विरोध-प्रदर्शन भी देखने में आया। लोग, जर्मन सरकार की युद्ध समर्थक और जन-विरोधी नीतियों, जीवन यापन की लागत में असहनीय वृद्धि और नाटो के ख़िलाफ़, विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। जर्मनी में गर्मियों की समाप्ति के बाद से हर सप्ताह, विरोध रैलियां देखी जा रही हैं।

30 अक्तूबर को हजारों लोगों ने जर्मनी के ड्रेसडेन की सड़कों पर मार्च निकाला और रूस पर लगे प्रतिबंधों को ख़त्म करने की मांग की। फिर, उसी दिन इटली के लोग नाटो के विरोध में और रूस पर लगे प्रतिबंधों के खि़लाफ़ रोम की सड़कों पर उतरे।

अमरीकी साम्राज्यवाद के वर्चस्व वाली अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने ऊर्जा की बढ़ती क़ीमतों, नाटो के खि़लाफ़ और अपनी सरकारों के युद्धोन्माद के विरोध में यूरोप के आम लोगों के विरोध प्रदर्शनों को पूरी तरह से ब्लैक आउट कर दिया है।

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