किसान आंदोलन ने अपना संघर्ष तेज़ किया

किसान आंदोलन ने घोषणा की है कि किसान-विरोधी तीन कानूनों को वापस लेने और सभी फ़सलों के लिए कानूनी न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी के लिए वे अपने आंदोलन को तेज़ करेंगे। उन्होंने फिर से दिल्ली की ओर कूच करने का आह्वान किया है – फिर दिल्ली चलो। 20 अप्रैल से ही हजारों किसान अपने गावों से निकलकर फिर से दिल्ली की ओर चल पड़े हैं। 23 अप्रैल को पंजाब गवर्नमेंट टीचर्स एसोसिएशन के 100 से भी अधिक शिक्षक टिकरी बॉर्डर पहुंचे।

पंजाब और हरियाणा में रबी की फ़सल की बुआई के लिए मार्च के अंत और अप्रैल महीने की शुरुआत में कई किसान अपने गांव वापस लौट गए थे। फ़सल पूरी करने के बाद, ज्यादातर किसान दिल्ली सीमा के सिंघु, टिकरी, गाजीपुर और हरियाणा राजस्थान सीमा के शाहजहांपुर के आंदोलन स्थलों पर लौट रहे हैं।

सरकार और उनके प्रवक्ताओं ने किसान आंदोलन को यह कहकर एक बार फिर बदनाम करने की कोशिश की है कि सीमाओं पर आंदोलन की वजह से हरियाणा और उत्तर प्रदेश से दिल्ली में आने वाले ऑक्सीजन सिलेंडर की डिलीवरी में बाधा उत्पन्न हो रही है। आंदोलन स्थलों को कोविड-19 संक्रमण के संभावित “सुपर-स्प्रेडर्स” (बड़ी संख्या में फैलाने वाले) के रूप में बताकर सरकार आंदोलन को तोड़ने की भी धमकी दे रही है। वे देशभर में विशेष रूप से दिल्ली में कोविड-19 संक्रमण और मौतों के बढ़ते मामले के संबंध में किसान आंदोलन के ख़िलाफ़ लोगों के मत को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं।

किसान आंदोलन ने इन आरोपों को ख़ारिज़ कर दिया है। 24 अप्रैल को दिए गए बयान में, संयुक्त किसान मोर्चे ने कोविड-19 के संक्रमण से पीड़ित और उससे मरने वाले लोगों के परिवारों के प्रति हार्दिक सहानुभूति जताई है। किसानों ने पहले ही दिल्ली सीमा की सड़क का एक हिस्सा आपातकालीन सेवाओं के लिए खोल दिया था। हर एक सीमा पर आपातकालीन सेवाएं शुरू हैं और किसान स्वयं सेवक यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि मरीजों तक ऑक्सीजन या अन्य आवश्यक वस्तु लेकर जाने वाले वाहनों के यातायात में कोई दिक्कत न आए।

22 अप्रैल को हरियाणा के सरकारी अधिकारियों के साथ हुई एक मीटिंग में निर्णय लिया गया कि सड़क की एक ओर से अब बैरिकेड हटा दिए जाएंगे। हालांकि दिल्ली पुलिस ने अभी तक बैरिकेड नहीं हटाए हैं, फिर भी दिल्ली में आने वाले या दिल्ली से जाने वाले वाहनों को किसान आंदोलन की वजह से कोई दिक्कत नहीं हो रही है। वास्तव में, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के अधिकारी जानबूझकर अस्पतालों तक ऑक्सीजन सिलिंडर पहुंचाने वाले ट्रकों को लम्बे रास्तों से भेजकर उनके पहुंचने में देरी करवा रहे हैं और फिर किसान आंदोलन को इस देरी के लिए दोषी ठहरा रहे हैं।

किसान आंदोलन में सहभागी सभी आंदोलनकारियों को बढ़ती महामारी के बारे में जागरुकता है और वे सभी ज़रूरी एहतियाती उपायों का पालन कर रहे हैं। सिंघु, गाजीपुर, टिकरी और शाहजहांपुर पर स्वयं सेवक लगातार आंदोलन स्थलों की परिस्थितियों का जायज़ा ले रहे हैं।

लॉकडाउन होने के बाद से दिल्ली छोड़कर जा रहे मज़दूरों को आनंद विहार बस अड्डे पर किसान खाना दे रहे हैं। वे राजधानी के अस्पतालों में भर्ती मरीजों में खाना और जरूरी दवाई का वितरण कर रहे हैं।

किसानों ने आंदोलन के ख़िलाफ़ लगाए गए झूठे आरोपों को सही तरीक़े से ख़ारिज किया है। उन्होंने बढ़ती महामारी का बहाना लेकर किसान आंदोलन को बदनाम करने की सरकार की सभी कोशिशों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने बहुमत से यह घोषणा की है कि, जब तक कृषि कानून वापस नहीं लिए जाते और कानूनी न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित नहीं किया जाता है तब तक उन्हें अपने संघर्ष को जारी रखने की प्रतिज्ञा से कोई नहीं हिला सकता है।

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