ऐमज़ान के लुटेरी और एकाधिकार जमाने की हरकतों के ख़िलाफ़ छोटे व्यापारियों का आंदोलन

15 अप्रैल को हिन्दोस्तान के लाखों छोटे व्यापारियों और व्यवसायिकों ने ऐमज़ान डॉट कॉम जैसी बड़ी एकाधिकार वाली ई-कॉमर्स कंपनियों के ख़िलाफ़ एक धरना आयोजित किया था।

यह आंदोलन उसी समय पर आयोजित हुआ जिस दौरान ऐमज़ान का अप्रैल 15 से 18 के बीच “संभव” नाम का वार्षिक प्रचार कार्यक्रम ऑनलाइन किया जा रहा था। इस कार्यक्रम का आयोजन इस झूठ को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है कि ऐमज़ान छोटे व्यापारियों और स्टार्टप्स का “मित्र और मार्गदर्शक” है और “छोटे व्यवसायों को ऑनलाइन विस्तार और बिक्री के अवसर प्रदान करता है”।

ऐमज़ान के कार्यक्रम का विरोध करते हुए आंदोलन ने इस प्रदर्शन को “असंभव” नाम दिया गया था।

एक अरब 30 करोड़ आबादी वाले हिन्दोस्तानी खुदरा बाज़ार में बड़ी-बड़ी वैश्विक ई-कॉमर्स कंपनियों के प्रवेश के ख़िलाफ़, छोटे व्यापारी और दुकानदार पिछले दो सालों से लगातार आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने ऐमज़ान और इसकी प्रतियोगी वालमार्ट की मलिकी की फ्लिपकार्ट जैसी बड़ी वैश्विक ई-कॉमर्स के एकाधिकार वाली कंपनियों पर प्लेटफार्म का ढोंग रचकर और विभिन्न तरीक़ों से हजारों छोटे दुकानदार और खुदरा व्यापारियों की आजीविका को नष्ट करने का आरोप लगाया है। यह आंदोलन दुकानदारों और व्यापारियों द्वारा आयोजित किया गया सबसे हाल ही का एक उदाहरण है।

बड़ी वैश्विक ई-कॉमर्स वाली कंपनियों की आक्रामक नीतियों और गतिविधियों पर रोशनी डालने के लिए इस आंदोलन का आयोजन किया गया था। यह वैश्विक एकाधिकारी कंपनियां उनके प्लटफॉर्म पर सामान बेचने वाली सैकड़ों छोटी कंपनियों पर मलिकी या नियंत्रण रखते हैं। इसके बाद ऐसी कंपनियों के द्वारा, मूल ई-कॉमर्स वाली कंपनी स्मार्टफोन और अन्य लोकप्रिय सामान के उत्पादकों के साथ विशेष सौदे करती हैं, सामान के भाव में ऊपर-नीचे करने के लिये चालाकी के हथकंडे अपनाती हैं और ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए अपने प्लेटफार्मों पर बेचे जाने वाले सामानों पर छूट प्रदान करती हैं।

इस साल फरवरी में प्रकाशित रॉयटर्स की एक विशेष रिपोर्ट में बताया गया है कि ऐमज़ॉन कई वर्षों से अपने हिन्दोस्तानी प्लेटफार्म पर कंपनियों के एक छोटे समूह का पक्ष लेते हुए उन्हें विशेष मौके दे रहा है। असलियत में, ये सभी कंपनियां इजारेदार पूंजीपतियों की मालिकी की हैं। ऐमज़ॉन ने इन कंपनियों के पूंजीवादी मालिक और हिन्दोस्तानी राज्य के साथ अपने क़रीबी के रिश्ते का फ़ायदा उठाते हुए विदेशी निवेश के नियमों को दरकिनार किया है।

यह बात गौर करने वाली है कि हिन्दोस्तान का एक सबसे बड़ा इजारेदार पूंजीपति घराना, यानी मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस इंडस्ट्री, आज हिन्दोस्तान में बड़ी तेजी से ई-कॉमर्स के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। रिलायंस समूह फेसबुक के साथ सौदा कर रहा है। हिन्दोस्तानी खुदरा बाज़ार को लेकर विभिन्न बड़े ई-कामर्स वाली कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बहुत तेज़ है। ऐमज़ॉन और रिलायंस एक कोर्ट केस में फंसे हुए हैं जिसमें ऐमज़ॉन रिलायंस द्वारा फ्यूचर ग्रुप के अधिग्रहण को रोकने की कोशिश कर रहा है। फ्यूचर ग्रुप फिलहाल हिन्दोस्तान का दूसरा सबसे बड़ा खुदरा व्यापारी है जिसके देशभर में 1700 से भी ज्यादा दुकानें हैं। इसमें बिग बाज़ार, ईज़ी-डे, नीलगिरी, सेवन इलेवन और कई अन्य ब्रांड शामिल हैं।

कोविड-19 की महामारी और उसके बाद के लॉकडाउन की वजह से बड़ी वैश्विक ई-कॉमर्स की इजारेदारी वाली कंपनियां जैसी ऐमज़ॉन की ऑनलाइन बिक्री में बहुत बढ़ोतरी हुई है। इस सबके परिणामस्वरूप छोटे दुकानदारों और व्यापारियों को जो पहले से ही इन कंपनियों की आक्रामक और लुटेरी गतिविधियों से परेशान थे, उन पर और गहरा संकट आया है, जिसकी वजह से देशभर में सैकड़ों दुकानों को बंद करना पड़ा है। व्यापारियों और छोटे उत्पादकों का प्रतिनिधित्व करने वाले कई समूहों ने न्यायालय और राज्य के नियंत्रण वाले विभागों में याचिकायें दाखिल की हैं कि विदेशी निवेश के नियम दुबारा संशोधित किये जाने चाहिएं और खुदरा व्यापार में इजारेदारी रखने वाली बड़ी कंपनियों के संचालन के लिये सख्त कानून बनाए जाने चाहिए।

विरोध प्रदर्शन के आयोजकों में ऑल इंडिया ऑनलाइन वेंडर्स एसोसिएशन और ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन, हेल्पलेस अगेंस्ट हेल्पलेसनेस एंड एक्शन फॉर रिड्रेसल (प्रहार) और कई अन्य छोटे उत्पादकों और व्यापारियों के समूह शामिल हैं।

आंदोलन में व्यापारियों ने ऐमज़ॉन के निर्माता बेजोस, ऐमज़ॉन इंडिया के प्रमुख अमित अग्रवाल, हिन्दोस्तान के उसके व्यापारिक सांझेदार – नारायण मूर्ति – जो इंफोसिस के अरबपति सह-संस्थापक हैं और वैश्विक ई-खुदरा व्यापार इजारेदारियों के अन्य उच्च प्रतिनिधियों को “असंभव” पुरस्कार दिया गया। ये सभी वे लोग हैं, जो व्यापारियों की आजीविका पर इस बड़े हमले के लिए ज़िम्मेदार हैं।

हिन्दोस्तानी राज्य सबसे बड़े हिन्दोस्तानी और विदेशी इजारेदार पूंजीवादी घरानों के हितों की रक्षा करता है और उन्हें आगे बढ़ता है। छोटे उत्पादकों और व्यापारियों की मांग है कि सरकार उनके हितों की रक्षा करे।

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