हवाईअड्डों के निजीकरण के ख़िलाफ़ एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के मज़दूरों का प्रदर्शन

जॉइंट फोरम ऑफ यूनियंस एंड एसोसिएशन्स ऑफ ए.ए.आई. (एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया-भारतीय उड्डयन प्राधिकरण) और एयरपोर्ट्स अथॉरिटी एम्पलाइज़ यूनियन (ए.ए.ई.यू.) ने 31 मार्च 2021 को देशव्यापी औद्योगिक हड़ताल का आह्वान दिया है। इस औद्योगिक हड़ताल के जरिये, सरकार द्वारा भारतीय उड्डयन प्राधिकरण के हवाईअड्डों को इजारेदार पूंजीपतियों को चलाने हेतु दिए जाने के फैसले का विरोध जताया गया।

यूनियनों के इस आह्वान को लागू करते हुए देशभर के 123 हवाईअड्डों पर धरना प्रदर्शन आयोजित किये गए।

Demonstration of pilots in Chennai
31 मार्च को चेन्नई में भारतीय उड्डयन प्राधिकरण के कर्मचारियों ने हवाईअड्डे पर धरना प्रदर्शन आयोजित किया

चेन्नई में पायलटो का धरना प्रदर्शन

चेन्नई हवाईअड्डे पर भारतीय उ ड्डयन प्राधिकरण के कर्मचारी बड़ी तादाद में प्रशासकीय भवन के सामने इकठ्ठा हुए और उन्होंने धरना प्रदर्शन आयोजित किया। ए.ए.आई. जॉइंट फोरम के संयोजक, और ए.ए.ई.यू. के क्षेत्रीय सचिव कामरेड डॉक्टर एल. जॉर्ज ने सभी कर्मचारियों का स्वागत किया और धरना प्रदर्शन के उद्देश्यों के बारें में बताया। कामरेड गुहन, अध्यक्ष, ए.ए.ई.यु. – दक्षिण क्षेत्रीय कामरेड भास्करन, संयोजक ए.ए.आई, जॉइंट फोरम – दक्षिण क्षेत्रीय कामरेड सुबरायण, सहायक महासचिव, ए.ए.ई.यू. और वर्कर्स यूनिटी मूवमेंट के कामरेड भास्कर ने धरना प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों को संबोधित किया।

सभी वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि ए.ए.आई. के कर्मचारियों और यात्रियों द्वारा निजीकरण के जबरदस्त विरोध के बावजूद, केंद्र सरकार हवाईअड्डों का निजीकरण करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। केंद्र सरकार ने हाल ही में 6 और हवाई अड्डों को इजारेदार पूंजीपतियों के हवाले करने की घोषणा की और बताया कि जल्दी ही अन्य हवाई अड्डों के साथ भी ऐसा किया जायेगा। ए.ए.आई. के कर्मचारी शुरुआत से ही हवाईअड्डों के निजीकरण का विरोध करते आये हैं।

वक्ताओं ने बताया कि ये भारी मुनाफा देने वाले हवाईअड्डे, लोगों के खून-पसीने की कमाई से खड़े किये गए हैं। ये हिन्दोस्तान के लोगों की संपत्ति हैं और सरकार को इन्हें पूंजीपतियों के हाथों में देने का कोई अधिकार नहीं है। हवाईअड्डों के निजीकरण से भारतीय उड्डयन प्राधिकरण के कर्मचारियों के रो़जगार की सुरक्षा और उनके अधिकार ख़तरे में पड़ जायेंगे। वक्ताओं ने बताया कि सरकार के तमाम खोखले वादों के बावजूद मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद और बंगलूरु के हवाईअड्डों का पहले से ही निजीकरण किया जा चुका है। हवाईअड्डों के अधिकारी तमाम हवाई सेवाओं को एक-दूसरे से अलग करते हुए उनका निजीकरण कर रहे हैं और इन सेवाओं को प्रदान करने का काम अन्य कंपनियों को सौंप रहे हैं।
वक्ताओं ने आगे बताया कि हवाईअड्डों के निजीकरण के चलते हवाईअड्डा यूज़र फी (ग्राहक शुल्क) और डेवलपमेंट चार्ज (विकास शुल्क) में भारी बढ़ोतरी की गयी है। ऐसा करने से हवाई टिकट का दाम बढ़ गया है, जिसकी वसूली यात्रियों से की जाएगी और इससे इन हवाईअड्डों को चलाने वाले पूंजीपतियों को भारी मुनाफा होने वाला है। उन्होंने आगे बताया कि सत्ता में बैठे हुक्मरान, दिन दहाड़े देश के लोगों की संपत्ति को लूट रहे हैं, और उन्हें पूंजीपतियों को सौंप रहे हैं।

यूनियन नेताओं ने बताया की चेन्नई हवाई अड्डे के कर्मचारियों ने इससे पहले भी सरकार द्वारा हवाईअड्डों के निजीकरण की ओर बढ़ते कदनों का बार-बार सख़्त विरोध किया है। इस विरोध के चलते हम सरकार को इन संपत्तियों को लालची पूंजीपतियों के हाथों बेचे जाने से रोक पाए हैं। धरना प्रदर्शन पर बैठे कर्मचारियों ने लड़ाकू नारे लगाये – “एयरपोर्ट और सार्वजनिक कम्पनियों का निजीकरण, हमें स्वीकार नहीं!”, “सरकार की किसान-विरोधी नीतियों का विरोध करें!”, “मज़दूर एकता जिंदाबाद!”, इत्यादि।

वर्कर्स यूनिटी मूवमेंट के प्रतिनिधि कामरेड भास्कर ने ए.ए.आई. के निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूरों के संघर्ष को अपना पूरा समर्थन घोषित किया। धरना प्रदर्शन समाप्त करने से पहले प्रण लिया गया कि हवाईअड्डों के निजीकरण के सभी प्रयासों का जमकर सामना किया जायेगा। एयरपोर्ट कर्मचारियों ने फैसला लिया है कि हर सप्ताह बुधवार को भोजन के अवकाश के दौरान देश भर में सभी हवाईअड्डों पर धरना प्रदर्शन आयोजित किये जायेंगे।

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