लेबर कोड के विरोध में प्रदर्शन

दिल्ली की संयुक्त ट्रेड यूनियनों और मज़दूर संगठनों ने 1 अप्रैल, 2021 को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन केन्द्र सरकार द्वारा लाये गये चार लेबर कोडों को रद्द करने की मांग को लेकर किया गया।

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ट्रेड यूनियनों द्वारा 1 अप्रैल को जंतर मंतर में लेबर कोड के विरोध में प्रदर्शन

कार्यक्रम के मुख्य आयोजक थे – सीटू, एटक, मज़दूर एकता कमेटी, एच.एम.एस., इंटक, यू.टी.यू.सी., ए.आई.सी.सी.टी.यू., एल.पी.एफ., सेवा, ए.आई.यू.टी.यू.सी., आई.सी.टी.यू., टी.यू.सी.सी. व अन्य।

प्रदर्शनकारी मज़दूरों के हाथों में बैनर और प्लाकार्ड थे, जिन पर चारों लेबर कोडों को रद्द करने और मज़दूरों पर बढ़ते हमलों को रोकने की मांग के नारे लिखे हुए थे। “श्रम कानूनों का हनन करना बंद करो!”, “चारों लेबर कोडों को रद्द करो!”, “पूंजीवादी घरानों की तिजौरियां भरना बंद करो!”, “सभी के लिए सुरक्षित रोज़गार और खुशहाली सुनिश्चित करो!”, “मज़दूरों का शोषण-दमन नहीं चलेगा!”, “कारपोरेट घरानों के हित में मज़दूरों का शोषण तेज़ करना बंद करो!”, “अपना हक़ लेकर रहेंगे!”, “मज़दूर एकता ज़िन्दाबाद!”, “इंक़लाब ज़िन्दाबाद!”, इन नारों को पूरे जोश के साथ बुलंद करते हुए, मज़दूरों ने कार्यक्रम को आगे बढ़ाया।

सहभागी संगठनों के वक्ताओं ने एक आवाज़ में केन्द्र सरकार द्वारा पास किए गये लेबर कोडों की कड़ी निन्दा की। उन्होंने समझाया कि इन लेबर कोडों को लागू करके केन्द्र सरकार मज़दूरों के उन सभी मौलिक अधिकारों को छीन रही है, जिनके लिए हमने मिलकर इतने सालों तक कठिन संघर्ष किए हैं।

‘इज ऑफ डूइंग बिजनेस’ व मौजूदा श्रम कानूनों को सरल बनाने के नाम पर सरकार ने पूंजीपतियों के आगे घुटने टेकने का काम किया है। फिक्स टर्म रोज़गार लाकर हायर एन्ड फायर की अनुमति दिया जाना, काम के घंटे बढ़ाए जाने, यूनियन गठन को जटिल बनाये जाने, हड़ताल के अधिकार को कमज़ोर किये जाने, निरीक्षण प्रणाली को कमजोर बनाये जाने जैसे प्रस्ताव, कुल मिलाकर मज़दूरों के लिये ये चार लेबर कोड गुलामी के दस्तावेज हैं जो अलोकतांत्रिक तरीके से लाये गए हैं।

यह बड़े-बड़े देशी-विदेशी कारपोरेट घरानों के मुनाफ़ों को तेज़ी से बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। इसके साथ-साथ, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों व सेवाओं को और इस देश के श्रमिकों के जल, जगल, ज़मीन और क़ीमती संसाधानों को सस्ते से सस्ते दाम पर इन देशी-विदेशी कारपोरेट घरानों को खुल्लम-खुल्ला बेचा जा रहा है। आज दिल्ली की सीमाओं पर हमारे लाखों किसान भाई-बहन कारपोरेट घरानों के हित के लिए लाये गये किसान-विरोधी कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर संघर्ष पर डटे हुऐ हैं। हमारा संघर्ष एक है। हमारा संघर्ष इजारेदार पूंजीवादी घरानों के हित में सरकार द्वारा लागू की जा रही, इन सरासर मज़दूर-विरोधी, किसान-विरोधी और राष्ट्र-विरोधी नीतियों के खि़लाफ़ है।

वक्ताओं ने बड़े-बड़े इजारेदार पूंजीवादी घरानों के तय किए गये कार्यक्रम को लागू करने वाली सरकारों की कड़ी निन्दा की। यह बात स्पष्ट रखी गई कि हमें एकजुट होकर, इजारेदार पूंजीपतियों की इस हुकूमत को ही ख़त्म करना होगा और मज़दूर-किसान का राज स्थापित करना होगा। ऐसा करके ही हम मज़दूरों के बढ़ते शोषण-दमन को ख़त्म कर सकते हैं।

सभा को संबोधित करने वाले थे – सीटू के राष्ट्रीय महासचिव तपन सेन, एच.एम.एस. के महासचिव हरभजन सिंह सिद्धू, एटक के दिल्ली प्रदेश महामंत्री मुकेश कश्यप, इंटक के उपाध्यक्ष अशोक सिंह, मज़दूर एकता कमेटी से लोकेश कुमार, यू.टी.यू.सी. दिल्ली प्रदेश सचिव शत्रुजीत, ए.आई.सी.सी.टी.यू. के महासचिव राजीव डिमरी, ए.आई.यू.टी.यू.सी. के दिल्ली प्रदेश सचिव मनैजर चैरसिया और आई.सी.टी.यू. के उपाध्यक्ष उदय नारायण।

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