किसान-विरोधी कानूनों की प्रतियों की होली जलाई गई

होली की पूर्व संध्या, 28 मार्च को दिल्ली के बॉर्डर पर धरना प्रदर्शन कर रहे किसानों ने किसान-विरोधी कानूनों की प्रतियों की होली जलाई और मांग की कि इन कानूनों को तुरंत रद्द किया जाये।

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सिंघु बॉर्डर पर कृषि कानूनों की प्रतियों की होली जलाई गई

किसानों के सांझा मंच, संयुक्त किसान मोर्चा (एस.के.एम.) ने एक बयान जारी करके कहा है कि धरना प्रदर्शन पर बैठे किसानों ने इस वर्ष बॉर्डर पर ही होली मनाई है और ऐलान किया है कि उनका संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक किसान-विरोधी कानून रद्द नहीं किये जाते और फ़सलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी देने के लिए कानून पारित नहीं किया जाता। संयुक्त किसान मोर्चा ने यह भी ऐलान किया कि 5 अप्रैल को वे “एफ.सी.आई. बचाओ दिवस” के रूप में मनाएंगे। इस दिन देशभर में सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक भारतीय खाद्य निगम (एफ.सी.आई.) के दफ़्तरों का घेराव आयोजित किया जायेगा। हाल के वर्षों में सरकार द्वारा बड़े ही सुनियोजित तरीक़े से फ़सलों की ख़रीदी में एफ.सी.आई. की भूमिका को लगातार कम किये जाने के विरोध में किसान यह आंदोलन चला रहे हैं।

संयुक्त किसान मोर्चा के बयान में कहा गया है कि “सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एम.एस.पी.) और सार्वजनिक वितरण व्यवस्था (पी.डी.एस.) को ख़त्म करने की कई कोशिशें की हैं। पिछले कुछ वर्षों से एफ.सी.आई. के बजट को भी कम किया गया है। हाल ही में एफ.सी.आई. ने फ़सलों की ख़रीदी के नियमों में बदलाव किया है।”

इसके साथ ही किसान संगठनों ने कहा कि वे सही मायने में तब तक होली नहीं मना सकते, जब तक तीन किसान-विरोधी कानून रद्द नहीं किये जाते और उनकी मांगों को स्वीकार नहीं किया जाता।

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गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों ने कृषि-कानूनों की प्रतियां जलाईं

किसान संगठनों ने हरियाणा की विधानसभा द्वारा “सार्वजनिक व्यवस्था में गड़बड़ी के दौरान संपत्ति के नुकसान की भरपाई वसूली विधेयक-2021” को पारित किये जाने पर भी विरोध प्रकट किया और आशंका जताई कि इस कानून का इस्तेमाल किसानों के आंदोलन के साथ-साथ अन्य जन आंदोलनों को भी कुचलने के लिए किया जायेगा।

29 मार्च को सिंघु बॉर्डर पर किसानों ने ज़ोर-शोर से “होल्ला मोहल्ला” त्योहार मनाया। इस समय हरियाणा की महिला किसान भी उत्सव में शामिल हो गईं और उन्होंने प्रण लिया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं की जाती हैं, तब तक वे इसी तरह से हर एक त्यौहार बॉर्डर पर ही मनाएंगी।

टीकरी बॉर्डर पर किसानों ने मुख्य मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया और अपना संघर्ष जारी रखने का प्रण लिया। इसके बाद उन्होंने आस-पास के इलाके में सफाई अभियान चलाया।

गाजीपुर बॉर्डर पर राज्य द्वारा तमाम तरह की कठिनाइयां खड़ी किये जाने के बावजूद किसानों ने बड़ी ही धूम-धाम से होली मनाई। दिल्ली और आस-पास के इलाके के लोग भी इस जश्न में शामिल हुए। मंडी मुल्लनपुर से आये लोक कला मंच ने अपने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ किसानों की होली में जोश भर दिया। उन्होंने “उठन दा वेला” नाटक पेश किया और किसानों को अपने संघर्ष की एकजुटता और मजबूती को बरकरार रखते हुए उसे जारी रखने का आह्वान दिया।

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