सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण से संबंधित बजट प्रस्तावों के विरोध में कामगार एकता कमेटी ने मीटिंग आयोजित की

सार्वजनिक क्षेत्र को बेचने के लिए पेश किये केंद्र सरकार के बजट प्रस्तावों का विरोध करने के लिये 14 फरवरी, 2021 को कामगार एकता कमेटी (केईसी) ने एक जनसभा आयोजित की। पूंजीपतियों द्वारा चलाये जा रहे निजीकरण के कार्यक्रम के खि़लाफ़ मज़दूर वर्ग की एकता गठित करने के प्रयास में कामगार एकता कमेटी की लगातार आयोजित की गयी मीटिंगों की श्रृंखला में यह 8वीं मीटिंग थी। मीटिंग में रेलवे, इन्श्योरेन्स, बैंक, कोयला, गोदी एवं बंदरगाह, पेट्रोलियम तथा इस्पात उद्योग के सर्व हिंद एवं राज्य स्तरीय नेतागणों तथा सौ से अधिक ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता शामिल हुए।

केईसी के सचिव कॉमरेड मेथ्यू ने सभी का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि गत कुछ महीनों में केईसी द्वारा निजीकरण के विरोध में लगातार आयोजित की गई मीटिंगों ने सभी क्षेत्रों की समस्याओं के बारे में हमारी जानकारी बढ़ाने तथा निजीकरण के ख़िलाफ़ एक विस्तृत मोर्चा बनाने की दिशा में बड़ा योगदान दिया है। अनेक क्षेत्रों के मज़दूरों एवं ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं ने केईसी के आह्वान को उत्साही अनुकूल प्रतिक्रिया दी है। कॉमरेड मेथ्यू ने मीटिंग को संबोधित करनेवाले सर्व हिंद एवं राज्य स्तरीय ट्रेड यूनियन नेताओं का परिचय दिया। केईसी की शुरुआती प्रस्तुति ने विभिन्न क्षेत्रो में निजीकरण के बजट प्रस्तावों को संक्षेप में पेश किया। उसके बाद कॉमरेड मेथ्यू ने सभी वक्ताओं से आह्वान किया कि उनके क्षेत्र में निजीकरण के सरकार के प्रस्तावों का विरोध करने की क्या योजना है, यह वे बतायें।

कॉमरेड मेथ्यू ने पहले आल इंडिया रेलवेमेन्स फेडरेशन (ए.आई.आर.एफ.) के महासचिव एवं नेशनल कॉर्डिनेशन कमेटी ऑफ रेलवेमेन्स स्ट्रगल (एन.सी.सी.आर.एस.) के संयोजक कॉमरेड शिव गोपाल मिश्रा को मीटिंग को संबोधित करने के लिये आमंत्रित किया।

कॉमरेड शिव गोपाल मिश्रा ने चिन्हांकित किया कि अनेक मान्यता प्राप्त एवं गैर-मान्यता प्राप्त रेलवे यूनियनों को एन.सी.सी.आर.एस. के झंडे तले लाया गया है। उन्होंने बताया कि निजीकरण के खि़लाफ़ संघर्ष को केवल रेलवे तक ही सीमित नहीं रखा जायेगा बल्कि निजीकरण के खि़लाफ़ एक विस्तृत जन आंदोलन खड़ा करने के उद्देश्य से रेलवे पर निर्भर लोगों तक भी ले जाया जायेगा। केवल यही भारतीय रेल के निजीकरण को रोक सकता है, उन्होंने कहा।

उनके बाद नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमेन (एन.एफ.आई.आर.) के महासचिव तथा नेशनल कॉर्डिनेशन कमेटी ऑफ रेलवेमेन्स स्ट्रगल (एन.सी.सी.आर.एस.) के सह-संयोजक कॉमरेड एम. राघवैया ने मीटिंग को संबोधित किया। जनहित विरोधी बजट का विरोध करने के लिए पहल के लिए उन्होंने केईसी को धन्यवाद दिया। उन्होंने बताया कि सरकार भारतीय रेल के 109 प्रमुख मार्गों को कॉर्पोरेट घरानों को सौंपना चाहती है तथा रेलवे की उत्पादन इकाइयों का कॉर्पोरेटीकरण करने की भी सरकार की योजना है। उन्होंने इस सबके ख़िलाफ़ रेलवे मज़दूर तथा उनके परिवारों को एन.सी.सी.आर.एस. के झंडे तले एकजुट करने के प्रयासों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने निजीकरण के खि़लाफ़ संघर्ष में सार्वजनिक क्षेत्र एवं अर्ध-सार्वजनिक क्षेत्र के सभी मज़दूरों को एकजुट होने का आह्वान किया।

उनके बाद आल इंडिया इन्श्योरेन्स इम्प्लॉइज़ एसोसिएशन के महासचिव कॉमरेड श्रीकांत मिश्रा ने मीटिंग को संबोधित किया। निजीकरण करने की सरकार की ख़तरनाक नीतियों के खि़लाफ़ लोगों की एकता बनाने की पहलकदमी के लिये केईसी को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि इन नीतियों को “आत्मनिर्भर भारत!” के नाम पर प्रोत्साहित किया जा रहा है। बीमा क्षेत्र में निजीकरण करने के सरकार तीन प्रस्तावों के बारे में उन्होंने विस्तार से समझाया – बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी पूंजी निवेश की सीमा को 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 74 प्रतिशत करना, एक जनरल इन्श्योंरेन्स कंपनी का निजीकरण करना एवं एल.आई.सी. के शेयर खुले बाज़ार में बेचना। तीनों का विरोध करना ज़रूरी है।

उन्होने बताया कि एकजुट संघर्ष द्वारा बीमा क्षेत्र के मज़दूर जनरल इन्श्योरेन्स कंपनियों का निजीकरण 25 वर्ष तक रोक पाये हैं। पहला निजीकरण का प्रस्ताव जब मल्होत्रा कमेटी ने रखा तब ऑल इंडिया इन्श्योरेन्स इम्प्लॉइज़ एसोसिएशन ने उसके विरोध में 1.5 करोड़ लोगो से हस्ताक्षर इकट्ठे किये थे जो ट्रेड यूनियन के इतिहास में विश्व कीर्तिमान था। एक शक्तिशाली संघर्ष छेड़ने के लिए बीमा तथा बैंकिंग क्षेत्र की ट्रेड यूनियनों को एकजुट करने के लिए उठाए जा रहे क़दमों के बारे में उन्होंने विस्तार से बताया।

उनके बाद महाराष्ट्र स्टेट बैंक इम्प्लॉइज़ फेडरेशन के महासचिव एवं आल इंडिया बैंक इम्प्लॉइज़ एसोसिएशन के संयुक्त सचिव कॉमरेड देविदास तुलजापुरकर ने बात रखी। आई.डी.बी.आई. एवं सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों का निजीकरण करने के बजट प्रस्ताव की उन्होंने भर्त्सना की। निजीकरण के खि़लाफ़ संघर्ष को और तीव्र करने के लिये बैंकिंग क्षेत्र की ट्रेड यूनियनों ने जो कार्यक्रम तय किया है उसे उन्होंने घोषित किया – 19 फरवरी को सभी राज्यों की राजधानी में प्रदर्शन, अगले 15-20 दिनों में सभी जिलों में हड़ताल, विधानसभा, लोकसभा, जिला परिषद एवं महानगरपालिका सदस्यों आदि सभी से संघर्ष की हिमायत करने की अपील, इसके साथ-साथ यूनाइटेड फोरम ऑफ बैक यूनियन ने 15 एवं 16 मार्च को हड़ताल का ऐलान किया है जिसमे 9 लाख बैंक कर्मचारी शामिल होंगे।

कॉमरेड तुलजापुरकर ने विश्वास जताया कि बैकों के ग्राहक एवं आम लोगों को इस संघर्ष में शामिल करने में वे निश्चित ही कामयाब होंगे। कई निजी बैंक जो दिवालिया हुये हैं उनके उदाहरण देकर लोगों को वे समझायेंगे कि निजीकरण करने से लोगों का पैसा ख़तरे में पड़ेगा। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में लोगों का 70 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा बचत जमा है। अगर लोगों की मेहनत से जमा की गई यह पूंजी सुरक्षित रखनी है तो हमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को बचाना होगा। हमारे आंदोलन ने यह नारा दिया है कि “लोगों का पैसा, लोगों की खुशहाली के लिये!” उन्होंने बताया कि उन्होंने पोस्टर बनाये हैं, उनका प्रदर्शन किया है तथा ग्राहकों के बीच पर्चे वितरित किये हैं।

बीमा क्षेत्र के कर्मचारियों की ओर से जनरल इन्श्योरेन्स इम्प्लॉइज़ आल इंडिया एसोसिएशन (जी.आई.ई.ए.आई.ए.) के महासचिव कॉमरेड के. गोविंदन ने संबोधित किया। उन्होंने बताया कि रणनैतिक विनिवेश के नाम से सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों को बेचना और उनका प्रबंधन निजी मालिकों को सौंपना चाहती है। संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिये बीमा क्षेत्र के सभी कर्मचारी 24 फरवरी को 2 घंटे काम बंद रखेंगे। राजनीतिक पार्टियों के नेताओं को निवेदन देने तथा आम लोगों के बीच पर्चे वितरित करने की उनकी योजना है। बैंक, एल.आई.सी. एवं जनरल इन्श्योरेन्स के मज़दूरों का एक फोरम बनाने का काम भी शुरू हुआ है, ऐसा उन्होंने बताया।

विशाखापट्टनम पोर्ट इम्प्लॉइज़ यूनियन के महासचिव तथा आल इंडिया पोर्ट एंड डॉक वर्कर फेडरेशन के महासचिव कॉमरेड डी.के. सर्मा ने पोर्ट और डॉक मज़दूरों के संघर्ष के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि विदेशी मुद्रा कमाने में बंदरगाहों की महत्वपूर्ण भूमिका है मगर पी.पी.पी. परियोजना के ज़रिये सरकार सभी मुख्य बंदरगाहों को बहुदेशीय एवं बड़ी हिन्दोस्तानी कंपनियों को सौंपना चाहती है। विदेशी कंपनियों से सलाह मशविरा करके सरकार ने पोर्ट ऑथोरिटी बिल (2021) बनाया है। हाल ही में उसे राज्य सभा में पारित किया गया। गत 15 वर्षों से मज़दूर लगातार निजीकरण की विरोध कर रहे हैं लेकिन उसे नज़रंदाज़ किया गया है।

कोयला मज़दूर सभा के महासचिव एवं हिंद खदान मज़दूर फेडरेशन के अध्यक्ष कॉमरेड नाथूलाल पांडे ने केईसी को धन्यवाद दिया क्योंकि वह निजीकरण के खि़लाफ़ एकजुट बनाने में बहुत मेहनत कर रहा है। निजीकरण के खि़लाफ़ कोयला मज़दूरों के संघर्ष को उन्होंने उजागर किया। रेलवे के बाद कोल इंडिया में सबसे बडी संख्या में मज़दूर हुआ करते थे मगर अब बडी तादाद में स्थाई मज़दूरों की जगह पर ठेका मज़दूर रखे जाते हैं जिनका बेहद ज्यादा शोषण होता है।

उन्होंने घोषणा की कि 2 जुलाई, 2021 से 4 जुलाई, 2021 के दौरान देशभर के कोयला मज़दूर हड़ताल करके कोयला क्षेत्र का निजीकरण करने की सरकार की नीति को चुनौती देंगे।

दिल्ली की सीमापर ठिठुरती ठंड में संघर्ष कर रहे किसानों की सभी मांगों का समर्थन करने का उन्होंने आह्वान किया। सभी क्षेत्रों की सभी ट्रेड युनियनों को एक साथ 3-4 दिन की हड़ताल करके निजीकरण का विरोध करना चाहिये, ऐसा उन्होंने प्रस्ताव दिया। तभी मोदी सरकार पर दबाव आएगा और वो सुनेगी। जब लोहा गरम है तभी एकजुट होकर हथौड़ा चलाना चाहिये और हमें कंधे से कन्धा मिलाकर एक दूसरे का साथ देना चाहिये, ऐसा उन्होंने आह्वान किया।

पेट्रोलियम तथा गैस क्षेत्र के निजीकरण का विरोध करते हुए, कोचीन रीफाईनरी वर्कर एसोसिएशन (सी.आई.टी.यू.) के महासचिव तथा पेट्रोलियम एंड गैस वर्कर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय सचिव कॉमरेड एम.जी. आगी ने बताया कि बजट के अनुसार 2021-22 में बी.पी.सी.एल. का विनिवेश होगा। उसका विरोध प्रकट करने के लिये जब मोदी ने कोचीन रीफाईनरी के एक नये प्लांट का उद्घाटन किया तब मज़दूरों ने उसका बहिष्कार किया।

उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष जब सभी राजस्व के कर संग्रह में कमी हुई तब एकमात्र कर जो ज्यादा जमा हुआ वह था पेट्रोलियम उत्पाद पर उत्पाद शुल्क का संग्रह। 2.6 लाख करोड़ रुपये के बजट के अंदाज से कहीं ज्यादा 3.65 लाख करोड़ रुपये होने का अंदाज किया गया है। इसका मतलब आम आदमी से सरकार अधिक कर वसूल रही है।

सभी क्षेत्रों के मज़दूरों को एकजुट करने का जो प्रयास केईसी लगातार बड़ी लगन से कर रही है, उन्होंने उसकी सराहना की। सरकार के निजीकरण के कार्यक्रम को रोकने के लिये, अपने किसान भाइयों से सीखकर सभी सार्वजनिक क्षेत्र के मज़दूरों को एक साथ संघर्ष करने का आह्वान उन्होंने किया।

राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आर.आई.एन.एल.) स्टील प्लांट इम्प्लॉइज़ यूनियन (सी.आई.टी.य.) के माननीय अध्यक्ष कॉमरेड नरसिंह राव ने इस्पात मज़दूरों की तरफ से संबोधित किया। राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड “घाटे में है” ऐसा बताकर सरकार उसकी रणनैतिक बिक्री करने की कोशिश कर रही है। मगर राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड कभी घाटे में नहीं रहा है ऐसा उन्होंने स्पष्ट किया। खुद ही के साधन एवं वित्त संस्थानों से खुद ही कर्ज़ लेकर राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड ने अपनी उत्पादन क्षमता सालाना 73 लाख मेट्रिक टन तक बढ़ाई है।

वाईजैग स्टील प्लांट बहुत अच्छी गुणवत्ता के इस्पात का उत्पादन करता है जिसकी बाज़ार में बहुत अच्छी मांग भी है। अपने देश में समुद्री तट पर स्थित वह एकमात्र स्टील प्लांट है। यह केंद्र तथा राज्य सरकार को अब तक 44 हजार करोड़ रुपये कर तथा डिविडेंड के रूप में दे चुका है।

निजीकरण के खि़लाफ़ सभी ट्रेड यूनियनों का एकजुट होने एवं आम लोगों के सक्रिय समर्थन का महत्व समझाने के लिये उन्होंने विशाखापट्टनम के ड्रेजिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया का उदाहरण दिया। मज़दूर एवं आम लोगों के सांझा संघर्ष की वजह उसका निजीकरण करने की सरकार की योजना को सफलतापूर्वक रोका गया है। इस अनुभव से सीखकर वाईजैग स्टील प्लांट के मज़दूरों ने 5 लाख से ज्यादा पर्चे आम लोगों के बीच बांटे जिसकी वजह से निजीकरण के खि़लाफ़ आयोजित विरोध प्रदर्शन में लाखों आम लोग भी शामिल हुए। उन्होंने घोषित किया कि 18 फरवरी को एक बड़ी आम सभा होगी एवं 5 मार्च को मोटर साईकिल रैली निकाली जायेगी। किसान संघर्ष से प्रेरित होकर पूरे देशभर में मज़दूरों को आंदोलन करना चाहिये, ऐसा उन्होंने आह्वान किया और विश्वास जताया कि निजीकरण की सरकार की योजना नाकामयाब होगी।

आमंत्रित वक्ताओं के बाद मीटिंग में शामिल सभी लोगों के लिये मंच खोल दिया गया। सभी ने निजीकरण के खि़लाफ़, अपनी जीविका पर हमलों के खि़लाफ़, 4 श्रम संहिताओं के ज़रिये अपने हक़ों पर हमलों के खि़लाफ़, सभी दबे-कुचले लोगों के हक़ों की रक्षा के लिये तथा किसान संघर्ष के समर्थन में मज़दूर वर्ग की एकता का महत्व अपने वक्तव्य में बताया।

किसान संघर्ष को समर्थन देने के लिये मीटिंग में शामिल सभी संगठन एक सांझा बयान जारी करेंगे, ऐसा प्रस्ताव पारित किया गया। बेहद आशावर्धक माहौल में मीटिंग समाप्त हुई। कॉमरेड मेथ्यू ने घोषित किया कि केईसी अगली मीटिंग पोर्ट एवं डॉक क्षेत्र पर आयोजित करेगी।

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